दीपावली से पहले दून की हवा पर नजर, 13 अक्टूबर से 24 घंटे होगी एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग

दीपावली से पहले दून की हवा पर नजर

 

इस साल दीपावली से पहले देहरादून की हवा पर बारीकी से निगरानी रखी जाएगी ताकि वायु प्रदूषण की स्थिति बिगड़े नहीं। पिछले साल दीपावली के मौके पर दून का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 तक पहुंच गया था, जबकि फिलहाल दून की हवा मध्यम श्रेणी में है। वाहनों की बढ़ती संख्या और निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल-मिट्टी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 13 अक्टूबर से 24 घंटे की थर्ड पार्टी मॉनिटरिंग शुरू करने का निर्णय लिया है, जो दीपावली के बाद 27 अक्टूबर तक चलेगी। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल के अनुसार, हवा की निगरानी देहरादून में घंटाघर और नेहरू कॉलोनी, ऋषिकेश में नगर निगम कार्यालय, और टिहरी में एक निर्दिष्ट स्थल पर की जाएगी। यह पहली बार होगा जब टिहरी में दीपावली से पहले वायु गुणवत्ता की जांच होगी, ताकि यह समझा जा सके कि त्योहार के दौरान और बाद में प्रदूषण का स्तर कैसे बदलता है और हवा को सामान्य होने में कितना समय लगता है।

 

 

इस बार के आंकड़े तय करेंगे वायु गुणवत्ता की दिशा

 

दीपावली के दौरान देहरादून की वायु गुणवत्ता में पिछले वर्षों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। वर्ष 2020 और 2021 में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बेहद खराब स्तर पर 300 तक पहुंच गया था, लेकिन 2022 में नागरिकों ने संयम बरतते हुए कम पटाखे जलाए, जिससे AQI मध्यम श्रेणी में 300 से नीचे रहा। 2023 में इसमें हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि 2024 में फिर कमी आई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दून के नागरिक इसी तरह वायु गुणवत्ता के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखाते रहें तो प्रदूषण को नियंत्रण में रखा जा सकता है। बुजुर्गों, बच्चों और श्वास रोगियों की सुरक्षा के लिए यह सामूहिक जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक को निभानी होगी।

 

 

दीपावली पर ध्वनि प्रदूषण की भी होगी निगरानी

दीपावली के मौके पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब केवल वायु प्रदूषण ही नहीं, बल्कि ध्वनि प्रदूषण के स्तर पर भी नजर रखेगा। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल ने बताया कि दीपावली से पूर्व और उसके बाद ध्वनि प्रदूषण के आंकड़े दर्ज किए जाएंगे ताकि पर्यावरणीय स्थिति का समग्र मूल्यांकन किया जा सके। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और बेहतर पर्यावरण के लिए वायु के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण भी बेहद आवश्यक है, इसलिए इस बार दोनों श्रेणियों में निगरानी के आंकड़े दर्ज कर उनकी तुलना की जाएगी।


लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

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