सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने होटल, ढाबा और खान-पान से जुड़े सभी व्यवसायों को लेकर एक अहम और सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि जो भी होटल या ढाबा संचालक फूड लाइसेंस लेकर व्यापार कर रहे हैं, उन्हें अब अपने बोर्ड और नाम में वही पहचान सार्वजनिक करनी होगी जो लाइसेंस में दर्ज है। यानी जिस नाम से लाइसेंस लिया गया है, वही नाम चश्मे की तरह साफ दिखना चाहिए, और साथ ही उस पर टैक्स कोड भी अंकित होना जरूरी होगा। कोर्ट ने ये भी कहा कि बिजनेस करना हर किसी का हक है, लेकिन अपनी असल पहचान छुपाकर काम करना जुर्म है। इस फैसले का सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा जो धार्मिक आयोजनों में या भीड़ वाले आयोजनों में अपनी पहचान छुपाकर आस्था का लाभ उठाने की कोशिश करते हैं। इस फैसले को लेकर शिवभक्तों से बात की गई तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया। श्रद्धालुओं का कहना है कि आस्था के साथ कोई खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं होगा। जो लोग धार्मिक आड़ में व्यवसाय करते हैं, वो अब सतर्क हो जाएं।
स्थानीय कारोबारियों ने किया फैसले का समर्थन
वहीं जब मीडिया ने ढाबा और रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़े संचालकों से बात की, तो उन्होंने भी कोर्ट के आदेश को सराहा। एक संचालक ने कहा कि हमें अपनी असली पहचान दिखाने में कोई परेशानी नहीं है। बल्कि जो लोग फर्जी नाम से या पहचान छुपाकर व्यापार कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ढाबा संचालकों ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सिर्फ कांवड़ मेले के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे देशभर में हमेशा लागू रहना चाहिए ताकि हर उपभोक्ता को यह पता हो कि वह किसके पास खा-पी रहा है और किसी तरह की आपत्ति या दिक्कत की स्थिति में जवाबदेही तय हो सके। यह फैसला न सिर्फ पारदर्शिता की दिशा में एक ठोस कदम है बल्कि सामाजिक सौहार्द और उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। इस पर राजनीतिक बयान भी अब सामने आने लगे हैं राजनीति से जुड़े लोग भी अब कोर्ट के इस फैसले को अति उत्तम फैसला बता रहे हैं और उनका कहना है कि इस फैसले का हम भी स्वागत करते हैं।
लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

