उत्तराखंड में पंचायत चुनाव के मतदान से दलों में उधेड़बुन
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रथम चरण के मतदान संपन्न हो चुके हैं, लेकिन सियासी गलियारों में इसके बाद सुगबुगाहट काफी बढ़ चुकी है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर लगातार मंडरा रहे आशंकाओं के बादलों के छंटते ही और मौसम दुश्वारियों को पीछे छोड़ मतदाताओं ने पहले चरण के मतदान में उत्साह से भाग लेकर राजनीतिक दलों की उधेड़बुन करने पर विवश कर दिया है। उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव इस समय भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उत्तराखंड में इसे 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि उत्तराखंड में संख्याबल में ग्रामीण मतदाता सबसे बड़ा वर्ग है लिहाजा इस सबसे बड़े वर्ग यानी ग्रामीण मतदाताओं का समर्थन जिसके पक्ष में भी झुकेगा, पंचायतों के साथ ही आगामी विधानसभा चुनावों में भी उसी दल के हाथों में सत्ता की चाबी रहेगी। वहीं उत्तराखंड में इन ग्रामीण मतदाताओं के रुख को भांपना दोनों ही दलों के लिए इतना आसान नहीं रहने वाला है। इसी कारण भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख राष्ट्रीय दल सतर्क हैं, दोनों दलों की नजरें मतपेटियों में बंद समर्थित प्रत्याशियों के भाग्य पर टिकी हैं। चूंकि इन मतपेटियों से मात्र प्रत्याशियों का भाग्य ही नहीं बल्कि राजनीतिक दलों का भविष्य भी जुड़ा हुआ है।
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए साबित होंगे निर्णायक
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायतों के लिए प्रथम चरण में 49 विकासखंडों में गुरुवार को चुनाव हुए, जिसमें 6049 पदों के लिए 17829 प्रत्याशियों का भाग्य मतपेटियों में बंद हो गया। वहीं दूसरे चरण के लिए अब मतदान 28 जुलाई को होना है, वहीं इस चुनाव में कुल 47.74 लाख से अधिक मतदाता हैं। अब मतदाताओं का यह वर्ग उत्तराखंड के कुल मतदाताओं 85.07 लाख के वर्ग का 56 प्रतिशत से अधिक है और यदि इसमें हरिद्वार जिले में पंचायत के मतादाता सम्मिलित कर दिए जाऐं तो यह आंकड़ा 60 प्रतिशत के पार होना तय है। लिहाजा इस प्रकार विधानसभा की कुल 70 सीटों में से 42 से अधिक सीटों पर इस समय गांवों के मतदाता निर्णायक स्थिति में है, जिस दल की ओर ग्रामीण मतदाता अपना भरोसा जताएंगे आगामी विधानसभा चुनाव में वही राजनीतिक दल सत्ता की कुर्सी पर बैठेगा यह बात भी तय है। वहीं उत्तराखंड में अब तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर प्रथम चरण में जिन पंचायतों में चुनाव हुए हैं, उनमें अधिकतर पर्वतीय व दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित हैं, वहीं अब इन क्षेत्रों में पंचायतों का चुनावी समर रोचक रहने जा रहा है।
भाजपा को है अटूट विश्वास
उत्तराखंड में भाजपा ने एक ओर जहां ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी डबल इंजन वाली सरकार, भ्रष्टाचार पर कड़े रुख
और अपनी नई-नई विकास योजनाओं के साथ एंट्री ली है, तो वहीं कांग्रेस ने भी भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार होते हुए भी राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की धीमी चाल को मुद्दा बनाया। हालांकि, हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस को शहरी क्षेत्रों से सटे पर्वतीय और अर्द्ध ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक सफलता मिली थी, लिहाजा इस बार पंचायत चुनाव में भी उसे इसी ट्रेंड पर अड़े रहकर अधिक सफलता पाने की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड की भाजपा सरकार को अपने चुनावी ब्रांड प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ ही डबल इंजन के सहयोग से हो रहे विकास कार्यों पर अधिक भरोसा है। क्योंकि इस भरोसे का परिणाम हमें नगर निकाय चुनाव में सभी 11 नगर निगमों पर भाजपा के कब्जे के रूप में देखने को मिल चुका है। सत्ताधारी दल को अटूट विश्वास है कि इन त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उसे और अधिक जन समर्थन मिलेगा।
लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

