Delhi artificial rain

Delhi artificial rain: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार का बड़ा कदम, आज हो सकती है कृत्रिम बारिश का परीक्षण

 

Delhi artificial rain:  दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए सरकार ने कृत्रिम बारिश कराने का फैसला लिया है। माना जा रहा है कि राजधानी में आज पहला परीक्षण किया जा सकता है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि क्लाउड सीडिंग के लिए आईआईटी कानपुर की टीम ने तैयारी पूरी कर ली है। इसके लिए सेसना एयरक्राफ्ट ने कानपुर से उड़ान भरी है और मौसम की स्थिति के आधार पर मेरठ पहुँचने के बाद आगे की योजना तय की जाएगी।

मंत्री ने बताया कि सुबह दृश्यता कम होने के कारण विमान उड़ान नहीं भर सका था, लेकिन जैसे ही मौसम साफ होगा, दिल्ली में क्लाउड सीडिंग का पहला परीक्षण किया जाएगा। क्लाउड सीडिंग के लिए बादलों की ऊंचाई लगभग 5,000 मीटर या उससे कम होनी जरूरी है।

क्या है कृत्रिम बारिश?

कृत्रिम बारिश एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें बादलों की भौतिक अवस्था में बदलाव लाकर बारिश कराई जाती है। इस प्रक्रिया को क्लाउड सीडिंग कहा जाता है।

क्लाउड सीडिंग कैसे होती है?

क्लाउड सीडिंग में विमान या रॉकेट के जरिए बादलों में सिल्वर आयोडाइड, नमक या अन्य रासायनिक पदार्थों का छिड़काव किया जाता है। ये रसायन बादलों की नमी को इकट्ठा करके बूंदों या बर्फ के कणों में बदल देते हैं। जब ये कण भारी हो जाते हैं, तो वे बारिश के रूप में गिरने लगते हैं। इससे वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषक नीचे बैठ जाते हैं, जिससे प्रदूषण के स्तर में अस्थायी कमी आती है।

तीन चरणों में होती है कृत्रिम वर्षा की प्रक्रिया

  • पहले चरण में रसायनों के जरिए हवा को ऊपर भेजा जाता है ताकि बादल बन सकें।
  • इसके लिए कैल्शियम क्लोराइड, नमक, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट जैसे यौगिकों का प्रयोग किया जाता है।
  • ये यौगिक हवा से जलवाष्प को सोखते हैं और संघनन की प्रक्रिया शुरू करते हैं।

सामान्य वर्षा कैसे होती है?

सामान्य तौर पर जब सूरज की गर्मी से हवा ऊपर उठती है, तो ठंडी होकर बादलों में बदल जाती है। जब बादलों में जलकण भारी हो जाते हैं, तो वे नीचे गिरने लगते हैं – यही प्राकृतिक बारिश कहलाती है।

क्यों जरूरी है यह प्रयोग?

दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो जाता है। सरकार को उम्मीद है कि कृत्रिम बारिश से हवा में मौजूद धूल और जहरीले कण नीचे बैठेंगे और लोगों को कुछ राहत मिलेगी।

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