UP Assembly Session : वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की चेतना और देशभक्ति का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि वंदे मातरम् का सम्मान हमें हमारे राष्ट्रीय कर्तव्यों और संवैधानिक मूल्यों की याद दिलाता है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की आत्मा और स्वतंत्रता संग्राम की चेतना का प्रतीक है। यह हमें हमारे राष्ट्रीय कर्तव्यों और संवैधानिक मूल्यों की याद दिलाता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वंदे मातरम् की रचना उस समय हुई थी, जब भारत ब्रिटिश हुकूमत के दमन और अत्याचारों के अधीन था। इस गीत ने भारतीयों के मन में देशभक्ति और स्वतंत्रता के लिए उत्साह जगाया। 1896 में पहली बार कांग्रेस के अधिवेशन में रविंद्रनाथ टैगोर ने इसे अपना स्वर दिया, और यह पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब वंदे मातरम् का शताब्दी महोत्सव मनाया गया, उस समय कांग्रेस ने देश में आपातकाल लागू कर संविधान का गला घोट दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के आत्मविश्वास और विकास की ओर बढ़ने की बात भी कही।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि वंदे मातरम् पर कभी विवाद का मुद्दा नहीं था। लेकिन तब तक, जब तक मोहम्मद अली जिन्ना कांग्रेस में थे। उनके कांग्रेस छोड़ने के बाद इसे मुस्लिम लीग का राजनीतिक हथियार बनाया गया। 15 अक्टूबर 1937 को लखनऊ से जिन्ना ने वंदे मातरम् के विरोध में नारा दिया, और 20 अक्टूबर को पंडित नेहरू ने सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखकर कहा कि यह गीत मुस्लिमों को असहज कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 26 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस ने गीत के कुछ अंश हटाने का निर्णय लिया गया। इसे सद्भाव का नाम दिया गया, जबकि यह वास्तव में तुष्टिकरण की पहली आधिकारिक मिसाल थी। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल तथ्य नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए सच्चाई और चेतावनी भी है।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमारे देश के क्रांतिकारियों के साहस और स्वतंत्रता संग्राम की चेतना का प्रतीक है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में मंगल पांडेय, शहीद बंधु सिंह, धन सिंह कोतवाल और रानी लक्ष्मीबाई जैसे वीरों ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने आम लोगों की भावनाओं को वंदे मातरम् के जरिए स्वर दिया। यह गीत आज भी देशभक्ति और आत्मसम्मान का संदेश देता है और हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाता है।
वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि हमारी स्वतंत्रता, साहस और देशभक्ति की अमूल्य धरोहर है। यह हमें याद दिलाता है कि देश के लिए समर्पण और प्यार हमेशा जीवित रहना चाहिए.
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