S4 Submarine: भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ा रहा है, और अब देश की चौथी परमाणु शक्ति से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी S4* ने समुद्री परीक्षण शुरू कर दिए हैं। यह पनडुब्बी भारतीय सुरक्षा के लिए एक अहम कदम है और इसका परीक्षण समुद्र में विशाखापत्तनम स्थित शिपबिल्डिंग सेंटर (SBC) से शुरू हुआ। S4* का वजन लगभग 7000 टन है और यह अरिहंत श्रेणी की आखिरी पनडुब्बी है।
S4 की ताकत और भूमिका
S4* का मुख्य उद्देश्य समुद्र से परमाणु जवाब देने की क्षमता को मजबूत करना है। इसमें 3500 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज वाली आठ परमाणु मिसाइलें K-4 तैनात की जा सकती हैं। इससे भारत की नौसेना की ताकत और बढ़ेगी। इस पनडुब्बी के शामिल होने के बाद भारत की समुद्री परमाणु शक्ति और अधिक मजबूत होगी।
स्वदेशी निर्माण और परीक्षण
S4* की खास बात यह है कि इसमें 80 प्रतिशत से ज्यादा उपकरण स्वदेशी हैं। यह अब तक की अरिहंत क्लास की पनडुब्बियों में सबसे अधिक स्वदेशी सामग्री से बनी है, जो भारत की आत्मनिर्भरता को दिखाता है। पनडुब्बी का परीक्षण एक से दो साल तक चल सकता है, और अगर सब कुछ ठीक रहा, तो यह 2027 के आसपास भारतीय नौसेना में शामिल हो सकती है।
S4 के परीक्षण की प्रक्रिया
S4* के समुद्री परीक्षण में रिएक्टर की क्षमता, इंजन की ताकत, पानी के भीतर हथियारों का परीक्षण और पूरे सिस्टम की सुरक्षा और विश्वसनीयता की जांच की जाएगी। पनडुब्बी का नाम परीक्षणों के बाद ही तय किया जाएगा। भारत के पास अब चार एसएसबीएन (स्ट्रेटेजिक सबमरीन बैलिस्टिक मिसाइल न्यूक्लियर पावर पनडुब्बी) हैं, जिनमें से दो सेवा में हैं और दो अभी परीक्षण के दौर में हैं।
भारत की परमाणु पनडुब्बी क्षमता में वृद्धि
S4* के शामिल होने से भारत की समुद्री परमाणु ताकत में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। इसके साथ ही, आईएनएस अरिधमन, जो तीसरी परमाणु पनडुब्बी है, 2026 के अंत तक नौसेना में शामिल हो जाएगी। ऐसे में भारत की सुरक्षा और सामरिक ताकत को और मजबूती मिलेगी।
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