India-EU (यूरोपीय संघ) जल्द ही नई दिल्ली में होने वाले 16वें India-EU शिखर सम्मेलन के लिए तैयार हैं। यह बैठक दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैश्विक राजनीति में युद्ध, आर्थिक दबाव और विभाजन के बीच, भारत-EU सहयोग को नए स्तर पर ले जाने पर जोर दिया जाएगा।

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चर्चा
शिखर सम्मेलन में सबसे बड़ी चर्चा लंबे समय से लंबित भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने पर होगी। इससे निर्यात और आयात के अवसर बढ़ेंगे, और क्लीन टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।
सुरक्षा और रक्षा सहयोग में मजबूती
सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को और बढ़ाया जाएगा। इसमें समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, एंटी टेररिज्म और हाईटेक वेपन शामिल हैं। दोनों लोकतांत्रिक देशों के लिए यह साझेदारी वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में अहम होगी।

गतिशीलता और कौशल आदान-प्रदान
शिखर सम्मेलन में शोध, नवाचार और शिक्षा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए उच्च कौशल पेशेवरों और छात्रों का आदान-प्रदान भी चर्चा का हिस्सा होगा। इससे तकनीकी और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
2030 तक साझा रोडमैप
EU के उच्च प्रतिनिधि काजा कलास ने कहा कि भारत अब यूरोप के लिए केवल महत्वपूर्ण नहीं बल्कि अपरिहार्य (indispensable) बन गया है। शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के बीच 2030 तक की रणनीतिक साझेदारी का रोडमैप तैयार किया जाएगा।
आर्थिक और वैश्विक प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, यह शिखर सम्मेलन India-EU के बीच लॉन्ग टर्म स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को मजबूत करेगा। इसके साथ ही वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा स्थिरता में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
शिखर सम्मेलन में व्यापारिक समझौते, निवेश योजनाएं और तकनीकी सहयोग पर भी चर्चा होगी, जिससे दोनों क्षेत्रों में रोजगार और विकास के नए अवसर खुलेंगे।
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