चमोली टनल हादसा: 7 मजदूरों की मौत, एक लापता; पानी और मलबे के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना की सुरंग में अचानक पानी और मलबा घुसने से बड़ा हादसा हुआ है। पीपलकोटी के मायापुर क्षेत्र में हुए इस हादसे में 7 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक मजदूर के अभी भी लापता होने की सूचना है। 14 अन्य मजदूरों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है।
हादसा गुरुवार शाम करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच हुआ। अधिकारियों के अनुसार, सुरंग के भीतर अचानक बड़ी मात्रा में पानी और मलबा आने से वहां काम कर रहे मजदूरों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया। बचाव दलों ने तुरंत अभियान शुरू किया।
यह सुरंग THDC India Limited के 444 मेगावाट Vishnugad-Pipalkoti Hydroelectric Project का हिस्सा है। THDC के अनुसार परियोजना चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर विकसित की जा रही है और इसमें लंबी भूमिगत सुरंगों का निर्माण शामिल है।
पानी और मलबे के बीच चला बचाव अभियान
हादसे के बाद SDRF, NDRF, पुलिस, CISF, ITBP और अन्य बचाव एजेंसियों को घटनास्थल पर भेजा गया। सुरंग में जमा पानी और मलबे के कारण अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बचाव दलों ने सुरंग तक पहुंचने के लिए उपलब्ध मशीनरी का इस्तेमाल किया और पानी निकालने तथा मलबा हटाने का काम शुरू किया। 14 मजदूरों को बाहर निकालने के बाद उन्हें इलाज के लिए गोपेश्वर के अस्पताल ले जाया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्रों में भेजे जाने की व्यवस्था की गई है।
कुछ शुरुआती रिपोर्टों में सुरंग के भीतर फंसे लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए थे। ताजा उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, 14 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है और एक व्यक्ति की तलाश जारी है।
खराब मौसम के बीच घटनास्थल पहुंचे मुख्यमंत्री धामी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को खराब मौसम के बीच पीपलकोटी पहुंचे और बचाव अभियान का जायजा लिया।
हेलिकॉप्टर की लैंडिंग में मौसम के कारण कठिनाई आई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने घटनास्थल पर मौजूद प्रशासन, पुलिस और बचाव एजेंसियों से अभियान की जानकारी लेने की बात कही।
धामी ने कहा कि सुरंग में फंसे व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी संबंधित एजेंसियों को पूरी क्षमता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रशासन की ओर से बचाव कार्य में लगी एजेंसियों के बीच समन्वय बनाए रखने और आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
हादसे की वजह अभी स्पष्ट नहीं
अधिकारियों ने अभी तक यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि सुरंग में पानी और मलबा अचानक किस वजह से आया। हादसे की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए आगे तकनीकी जांच जरूरी होगी।
यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी निर्माणाधीन सुरंग में पानी का अचानक प्रवेश कई संभावित भू-तकनीकी जोखिमों से जुड़ा हो सकता है। लेकिन जब तक विशेषज्ञों की जांच पूरी नहीं होती, किसी एक कारण को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।
चमोली का इलाका भौगोलिक रूप से संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में आता है, जहां सुरंग और जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियां बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
THDC की परियोजना में 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल और करीब 3.07 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल शामिल हैं। परियोजना के अनुसार इसका उद्देश्य अलकनंदा नदी के पानी से बिजली उत्पादन करना है।
हिमालयी परियोजनाओं में सुरक्षा पर फिर सवाल
पीपलकोटी का यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्र में सुरंगों और जलविद्युत परियोजनाओं की सुरक्षा पहले से सार्वजनिक चर्चा का विषय रही है।
THDC ने जुलाई 2025 में इसी Vishnugad-Pipalkoti परियोजना में सुरंग के भीतर बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने की तैयारियों का परीक्षण करने के लिए एक बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल आयोजित की थी। इसमें NDRF, SDRF, CISF, पुलिस, THDC और परियोजना से जुड़ी एजेंसियों ने हिस्सा लिया था। कंपनी के अनुसार उस अभ्यास में अर्ली फ्लड वार्निंग सिस्टम की क्षमता भी परखी गई थी।
यह पृष्ठभूमि मौजूदा हादसे को समझने के लिए महत्वपूर्ण है, हालांकि केवल इस आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि पिछली सुरक्षा व्यवस्थाएं विफल हुईं। इसके लिए दुर्घटना की स्वतंत्र तकनीकी जांच और उपलब्ध सुरक्षा रिकॉर्ड की समीक्षा आवश्यक होगी।
Sources Used
Associated Press — Chamoli tunnel collapse report — हादसे और बचाव अभियान की स्वतंत्र पुष्टि के लिए।
अब सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता मजदूर को ढूंढना
फिलहाल बचाव अभियान का केंद्र उस मजदूर को सुरक्षित बाहर निकालना है जिसकी तलाश जारी है। सुरंग के अंदर पानी और मलबे की स्थिति अभियान की गति को प्रभावित कर रही है।
प्रशासन के सामने दो समानांतर चुनौतियां हैं—लापता मजदूर तक पहुंचना और बचावकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। ऐसे अभियानों में सुरंग के भीतर बदलती भूगर्भीय परिस्थितियां अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकती हैं।
इसके बाद हादसे की तकनीकी जांच यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होगी कि पानी और मलबा सुरंग में कैसे पहुंचा, क्या निर्माण स्थल पर पहले से कोई चेतावनी संकेत मौजूद थे और भविष्य में ऐसी घटना को रोकने के लिए किन सुरक्षा उपायों की जरूरत होगी।
फिलहाल सात परिवारों के लिए यह हादसा अपनों को खोने का दुख लेकर आया है, जबकि एक परिवार अब भी अपने लापता सदस्य के सुरक्षित लौटने की उम्मीद में है। बचाव दलों की कोशिशें जारी हैं और प्रशासन की अगली प्राथमिकता उस अंतिम मजदूर तक पहुंचना है।
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