उत्तराखंड के रवि टम्टा की Flying Car को सरकारी सहयोग, CM धामी ने दिए निर्देश

उत्तराखंड के रवि टम्टा की उड़ने वाली गाड़ी को सरकारी सहयोग का भरोसा, सीएम धामी ने दिए मदद के निर्देश

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में तैयार की जा रही एक इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल परियोजना अब सिर्फ एक युवा इनोवेटर का प्रयोग नहीं रह गई है। प्रोटोटाइप के शुरुआती उड़ान परीक्षण के बाद अब इस प्रोजेक्ट पर सरकार की भी नजर है। बुधवार को युवा स्टार्टअप उद्यमी रवि टम्टा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की और अपने प्रोजेक्ट की तकनीकी प्रगति तथा आगे की योजना के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नियमानुसार आवश्यक सरकारी सहयोग उपलब्ध कराने की कार्रवाई के निर्देश दिए।

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि टम्टा की परियोजना ऐसे राज्य में विकसित हो रही है जहां सड़क मार्ग कई इलाकों में लंबा और कठिन है। हालांकि, फिलहाल इसे सार्वजनिक परिवहन का तैयार विकल्प मानना जल्दबाजी होगी। HAPIDA SKYNeX अभी प्रोटोटाइप चरण में है और इसे व्यावसायिक उपयोग तक पहुंचने के लिए आगे के परीक्षण तथा नियामकीय मंजूरियों से गुजरना होगा।

अगस्त में हुआ था शुरुआती उड़ान परीक्षण

रवि टम्टा, अल्मोड़ा जिले के काफलीखान क्षेत्र से जुड़े युवा इनोवेटर हैं। उन्होंने अपने स्टार्टअप Hapida Sky Private Limited के तहत HAPIDA SKYNeX नाम के एक सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप विकसित किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह वाहन संशोधित ड्रोन या मल्टीकॉप्टर तकनीक पर आधारित है और शुरुआती परीक्षण अल्मोड़ा में किया गया था।

अगस्त में हुए परीक्षण के बाद इस प्रोजेक्ट ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा। मुख्यमंत्री धामी ने तब टम्टा को बधाई दी थी। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने भी उनके प्रयास की सराहना की थी।

लेकिन उड़ान परीक्षण और सड़क पर चलने वाली कार के व्यावसायिक विकल्प के बीच लंबा रास्ता है। शुरुआती प्रोटोटाइप का सफलतापूर्वक हवा में उठना अपने आप में अंतिम उत्पाद की सुरक्षा, विश्वसनीयता या बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की मंजूरी साबित नहीं करता।

अब सरकार की भूमिका क्यों अहम है?

मुख्यमंत्री से हुई ताजा मुलाकात में सबसे बड़ा विकास यही है कि सरकार ने प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए संस्थागत सहयोग का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री ने सचिव उद्योग विनय शंकर पांडेय को टम्टा के स्टार्टअप को नियमानुसार जरूरी शासकीय सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

धामी ने कहा कि उत्तराखंड के युवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। सरकार का तर्क है कि ऐसे तकनीकी प्रयोग भविष्य में रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

हालांकि, इस सहयोग का वास्तविक स्वरूप अभी स्पष्ट नहीं है। उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया गया है कि सरकार कितनी वित्तीय सहायता देगी, किस योजना के तहत मदद मिलेगी या प्रोजेक्ट को किस तरह की तकनीकी और नियामकीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसलिए फिलहाल इसे सरकारी समर्थन का आश्वासन कहना अधिक सटीक है, न कि वित्तीय स्वीकृति।

पहाड़ों के लिए कितना उपयोगी हो सकता है प्रोजेक्ट?

फ्लाइंग व्हीकल की चर्चा सिर्फ उसके भविष्यवादी स्वरूप के कारण नहीं हो रही। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क संपर्क की भौगोलिक सीमाएं इस तरह की तकनीक के संभावित इस्तेमाल का सवाल भी उठाती हैं।

अल्मोड़ा से सामने आए प्रोजेक्ट से जुड़ी रिपोर्टों में दावा किया गया है कि व्यक्तिगत हवाई परिवहन का इस्तेमाल कठिन पहाड़ी मार्गों पर यात्रा का समय कम करने में हो सकता है। लेकिन वास्तविक उपयोगिता तय करने के लिए वाहन की सुरक्षा, उड़ान नियंत्रण, बैटरी क्षमता, मौसम में संचालन, आपात स्थिति और नियामकीय अनुमति जैसे कई सवालों का जवाब जरूरी होगा।

यही वजह है कि अभी इसे ‘उड़ने वाली कार’ के बजाय प्रोटोटाइप इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल कहना ज्यादा तथ्यात्मक है।

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आगे की चुनौती परीक्षण से मंजूरी तक

रवि टम्टा के लिए अगला चरण शुरुआती उड़ान से कहीं ज्यादा कठिन हो सकता है। प्रोटोटाइप को लगातार परीक्षण, तकनीकी सुधार और सुरक्षा संबंधी मूल्यांकन से गुजरना होगा। व्यावसायिक संचालन के लिए विमानन नियमन और संबंधित अनुमतियां भी महत्वपूर्ण होंगी। टम्टा ने पहले भी कहा है कि प्रोटोटाइप को आगे के परीक्षण और नियामकीय मंजूरियों की जरूरत होगी।

सरकार की ओर से मिला समर्थन इस प्रक्रिया में संसाधन और संस्थागत मदद जुटाने में उपयोगी हो सकता है। लेकिन परियोजना की असली परीक्षा तब होगी जब यह प्रोटोटाइप नियंत्रित परीक्षणों से आगे बढ़कर सुरक्षा और नियमन के मानकों पर खरा उतरे।

फिलहाल इतना साफ है कि अल्मोड़ा के एक युवा इनोवेटर का प्रयोग अब सरकारी स्तर पर चर्चा में आ चुका है। अगला सवाल यह नहीं है कि वाहन एक बार उड़ सकता है या नहीं—बल्कि यह है कि क्या इस तकनीक को सुरक्षित, प्रमाणित और व्यावहारिक हवाई परिवहन के रूप में विकसित किया जा सकता है।

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