Champawat Road Protest – केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र के दिवली भनीग्राम में सरकार जनता के द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला सेवायोजन अधिकारी समेत प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान ग्रामीणों ने गांव की सड़क सुधारीकरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। वहीं ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई और गांव की सड़कों का निर्माण शुरू नहीं कराया गया, तो आगामी विधानसभा चुनाव में ग्रामीण सामूहिक रूप से चुनाव बहिष्कार करेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से गांव की सड़कें जर्जर हालत में है और सड़क निर्माण को लेकर कई बार अधिकारियों को आवेदन भी दिया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि सड़क की बदहाली के कारण उन्हें रोजाना आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत और आवेदन देने के बावजूद उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है।वहीं ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई और गांव की सड़कों का निर्माण शुरू नहीं कराया गया, तो आगामी विधानसभा चुनाव में ग्रामीण सामूहिक रूप से चुनाव बहिष्कार करेंगे।
Road की मांग क्यों बनी बड़ा मुद्दा?
कुकड़ौनी जैसे पहाड़ी गांवों में सड़क का न होना सामान्य inconvenience से कहीं बड़ी समस्या है। बाजार, अस्पताल, स्कूल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने के लिए लोगों को अतिरिक्त दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों की नाराजगी की मुख्य वजह यह भी है कि कई बार survey होने के बावजूद उन्हें निर्माण कार्य शुरू होता दिखाई नहीं दिया है।
- करीब 10 किलोमीटर सड़क की मांग।
- पांच–छह बार survey होने की बात सामने आई।
- क्षेत्र की करीब 1,000 आबादी प्रभावित।
- मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए करीब 4 किमी खड़ी चढ़ाई।
- समाधान नहीं होने पर Assembly Election boycott की चेतावनी।
Ground Reality vs ग्रामीणों की Demand
कुकड़ौनी में सड़क का मुद्दा अब development project से आगे बढ़कर ग्रामीणों के भरोसे से जुड़ा सवाल बन गया है। लगातार सर्वे और लंबे इंतजार के बीच ग्रामीण अब चाहते हैं कि संबंधित विभाग निर्माण प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट स्थिति बताए और काम शुरू किया जाए।
| मुद्दा | मौजूदा स्थिति | ग्रामीणों की मांग |
|---|---|---|
| सड़क | करीब 10 किमी सड़क की मांग लंबित | जल्द निर्माण शुरू हो |
| Survey | कई बार सर्वे होने की बात | Survey से आगे प्रक्रिया बढ़े |
| Connectivity | मुख्य मार्ग तक पैदल चढ़ाई | गांव तक road connectivity |
| आबादी | करीब 1,000 लोग प्रभावित | सुविधाओं तक आसान पहुंच |
| चुनाव | बहिष्कार की चेतावनी | पहले ठोस कार्रवाई |
पलायन और Basic Facilities भी बड़ी चिंता
सड़क की समस्या को गांव से हो रहे पलायन से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक एक दशक पहले क्षेत्र के दो गांवों में 140 से अधिक परिवार रहते थे, लेकिन वर्तमान में करीब 60 परिवार ही वहां रह रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं की कमी के बीच लगभग 80 लोगों के पलायन का भी उल्लेख किया गया है।
ग्रामीण इलाकों में road connectivity बेहतर होने पर स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बाजार और रोजगार तक पहुंच आसान होती है। इसलिए ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन सड़क के मामले में केवल paperwork या survey तक सीमित रहने के बजाय निश्चित समयसीमा के साथ निर्माण की दिशा में आगे बढ़े।
- सड़क निर्माण की clear timeline जारी हो।
- संबंधित विभाग project की मौजूदा स्थिति बताए।
- लंबित approvals और technical process जल्द पूरे किए जाएं।
- सड़क के साथ बिजली-पानी जैसी basic facilities पर भी ध्यान दिया जाए।
FAQs:Champawat Road Protest
1. कुकड़ौनी गांव कहां स्थित है?
कुकड़ौनी गांव उत्तराखंड के चंपावत जिले के सीमांत तल्लादेश क्षेत्र में स्थित है।
2. ग्रामीण सड़क को लेकर क्यों नाराज हैं?
ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 10 किलोमीटर सड़क के लिए कई बार survey होने के बावजूद निर्माण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है।
3. सड़क नहीं होने से कितने लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र की करीब 1,000 की आबादी को सड़क की कमी से परेशानी हो रही है।
4. ग्रामीणों ने क्या चेतावनी दी है?
ग्रामीणों ने कहा है कि सड़क और अन्य बुनियादी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कर सकते हैं।
5. कुकड़ौनी में पलायन भी समस्या है क्या?
हां। रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले 140 से अधिक परिवार क्षेत्र के दो गांवों में रहते थे, जबकि अब करीब 60 परिवार रह गए हैं और मूलभूत सुविधाओं की कमी के बीच पलायन भी हुआ है।

