नई दिल्ली: जो लोग महसूस करते हैं की सितंबर के आगमन के साथ ही मानसून का मौसम खत्म हो गया है और अब बारिश से राहत मिलने वाली है वो इस बारे में दो बार सोचें क्योंकि यह कहने के लिए बहुत जल्दी है ।देश के कई राज्यों में अभी भी बरसात का मौसम चल रहा है और दूसरे राज्यों में अगले कुछ दिनों में मानसून की गतिविधियाँ बढ़ सकती हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए मौसम के अनुसार 10 से 14 सितंबर के बीच केंद्रीय,पूर्वी उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश,बिजली गिरने और तेज हवाएँ हो सकती हैं। हाल के मौसम की रिपोर्टों के आधार पर स्थिति काफी दिलचस्प लग रही है।जबकि सितंबर के महीने में कुल वर्षा सामान्य रूप से देश में होने वाली वर्षा से कम होगी लेकिन कुछ क्षेत्रों में बहुत भारी बारिश कुछ छोटे अंतरालों में हो रही है ।इसलिए भले ही मानसून का मौसम खत्म हो रहा है लेकिन लोगों को अचानक बारिश और तूफान का सामना करना पड़ सकता है।
21 राज्यों में बारिश और आंधी का असर
वर्तमान मौसम की स्थिति के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में बारिश और बवंडर देखे जाएंगे।
लेकिन इन सभी राज्यों में बारिश का स्तर अलग-अलग हो सकता है।कुछ जगहों पर हल्की या मध्यम बारिश हो सकती है जबकि कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। 10 सितंबर को आईएमडी ने ओडिशा के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की भविष्यवाणी की थी ।इसके अलावा 12 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश में भी भारी बारिश होने की संभावना थी।
11 सितंबर के आसपास बंगाल की खाड़ी में बन सकता है नया सिस्टम
इस पूरे मौसम अपडेट की सबसे अहम कड़ी बंगाल की खाड़ी से जुड़ी है। IMD के 8 सितंबर के बुलेटिन के अनुसार, 11 सितंबर के आसपास बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिमी हिस्से तथा उससे सटे उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटों के पास एक निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है।
मौसम विज्ञान में ऐसे सिस्टम मानसूनी बारिश को फिर सक्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अगर यह सिस्टम अपेक्षित रूप से विकसित होता है, तो इसका असर ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य भारत के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकता है।
यही वजह है कि मानसून की विदाई से पहले बारिश का एक और सक्रिय दौर देखने की संभावना बन रही है।
यूपी और बिहार में भी बदल सकता है मौसम
उत्तर भारत की बात करें तो आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश और बिहार में पूरी तरह शांति नहीं रहेगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार निचले वायुमंडल में पूर्वी उत्तर प्रदेश और सटे बिहार में चक्रवाती परिसंचरण है। इसके अलावा गुजरात के दक्षिण से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश और सटे बिहार तक एक त्रिज्या है।उपरोक्त मौसम की स्थितियाँ कुछ क्षेत्रों में उच्च आर्द्रता और संवेदना का कारण बन सकती है जिससे बारिश और बिजली गिर सकती है। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश हुई है जहाँ मोहम्मदी और खैरी में 9 सेंटीमीटर बारिश हुई है।मेरा मानना है कि स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग आने वाले दिनों में खासकर खुले क्षेत्रों और खेतों में शांति की उम्मीद नहीं कर सकते।
उत्तराखंड में 10 से 14 सितंबर तक बारिश
पहाड़ी राज्यों में मौसम और ज्यादा संवेदनशील रह सकता है। IMD ने 10 से 14 सितंबर के दौरान उत्तराखंड में कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई है। हिमाचल प्रदेश में 13 और 14 सितंबर को व्यापक बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना बताई गई है।
पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश का असर केवल सड़क यातायात तक सीमित नहीं रहता। संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन, मलबा गिरने, सड़क बंद होने और स्थानीय जलभराव का खतरा भी बढ़ सकता है।
इसलिए अगर आप इन दिनों पहाड़ों की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा से पहले स्थानीय मौसम और प्रशासन की सलाह जरूर देखना बेहतर रहेगा।
मध्य भारत में फिर बढ़ेगी बारिश
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बारिश की गतिविधियां महत्वपूर्ण रहने वाली हैं।
IMD के अनुसार 10 से 14 सितंबर के दौरान छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में व्यापक बारिश हो सकती है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 12 से 14 सितंबर के दौरान बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा 12 और 13 सितंबर को पूर्वी तथा पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।
छत्तीसगढ़ में 10 से 14 सितंबर के बीच भारी बारिश की संभावना विशेष रूप से उल्लेखनीय है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और किसानों को जलभराव की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए।
ओडिशा में सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत
पूर्वी भारत में ओडिशा मौसम के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में नजर आ रहा है। IMD ने 10 सितंबर को कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके अलावा 9 और 11-12 सितंबर को भी बारिश का दौर जारी रह सकता है।
ओडिशा के लिए यह चेतावनी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बंगाल की खाड़ी में बनने वाला संभावित निम्न दबाव क्षेत्र राज्य के आसपास के मौसम को प्रभावित कर सकता है।
भारी बारिश की स्थिति में खेतों में पानी जमा होने, निचले इलाकों में जलभराव और सड़क-रेल यातायात प्रभावित होने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।
पूर्वोत्तर में भी बारिश का दौर
भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में भी मौसमी गतिविधियाँ होने की संभावना है। 10 सितंबर से लेकर 14 सितंबर तक अरुणाचल प्रदेश,असम और मेघालय में भारी बारिश होने की संभावना है। 8 सितंबर से लेकर 12 सितंबर तक नागालैंड,मेनिपुर,मिजोरम और त्रिपुरा में भी बारिश हो सकती है। 12 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश होने की संभावना है। पहाड़ी और पहाड़ी क्षेत्रों को इस स्थिति में खास ध्यान देने की ज़रूरत है।
महाराष्ट्र और पश्चिमी भारत में भी बारिश
महाराष्ट्र के कोंकण और गोवा में 8 से 14 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। मध्य महाराष्ट्र में 13-14 सितंबर के दौरान बारिश बढ़ सकती है, जबकि मराठवाड़ा में 12 सितंबर को व्यापक बारिश की संभावना बताई गई है।
गुजरात क्षेत्र तथा सौराष्ट्र-कच्छ में भी इस दौरान कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।
दक्षिण भारत में क्या होगा?
दक्षिण भारत में तस्वीर थोड़ी अलग है। IMD ने तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा तथा तमिलनाडु-पुडुचेरी में 8 से 14 सितंबर के दौरान कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना जताई है। तेलंगाना में 12 से 14 सितंबर के दौरान बारिश का क्षेत्र बढ़ सकता है।
हालांकि IMD के सितंबर के मासिक आउटलुक में प्रायद्वीपीय भारत में कई हिस्सों में बारिश की गतिविधि अपेक्षाकृत कमजोर रहने का संकेत भी दिया गया है। इसलिए पूरे दक्षिण भारत में लगातार भारी बारिश की संभावना मानना सही नहीं होगा।
दिल्ली-NCR में कैसा रहेगा मौसम?
दिल्ली-NCR में भी मौसम पूरी तरह साफ नहीं रहेगा, लेकिन यहां स्थिति बाकी कई राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत हल्की रहने का अनुमान है।
IMD के 8 सितंबर के दिल्ली पूर्वानुमान के अनुसार 9 और 10 सितंबर को आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। 11 सितंबर को कई स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है। 9-10 सितंबर को अधिकतम तापमान करीब 34-36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25-27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।
यानी दिल्ली में फिलहाल अचानक बहुत भारी बारिश की तुलना में हल्की बारिश और बादल अधिक संभावित नजर आ रहे हैं।
सितंबर में कुल बारिश सामान्य से कम, फिर भी अचानक तेज बारिश क्यों?
यह सवाल सबसे ज्यादा लोगों के मन में है। अगर पूरे सितंबर में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है, तो फिर इतनी जगहों पर भारी बारिश की चेतावनी क्यों?
इसका कारण बारिश का वितरण है। पूरे महीने की कुल बारिश कम हो सकती है, लेकिन कुछ दिनों में किसी विशेष मौसम प्रणाली के कारण बहुत तेज बारिश हो सकती है। IMD ने सितंबर 2026 के लिए देशभर की मासिक बारिश को दीर्घकालिक औसत की 91 प्रतिशत से कम, यानी सामान्य से कम रहने की सबसे अधिक संभावना जताई है। सितंबर का 1971-2020 के आधार पर देशव्यापी दीर्घकालिक औसत करीब 167.9 मिलीमीटर है।
इसलिए “सामान्य से कम बारिश” का मतलब यह नहीं है कि बारिश होगी ही नहीं। इसका अर्थ पूरे महीने की कुल वर्षा का औसत से कम रहना है।
अल नीनो का भी पड़ रहा है असर
IMD के सितंबर आउटलुक में एक और महत्वपूर्ण संकेत दिया गया है। विभाग के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में फिलहाल मजबूत अल नीनो स्थितियां बनी हुई हैं और समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक है। आने वाले महीनों में इनके और मजबूत होने की संभावना बताई गई है। वहीं हिंद महासागर में फिलहाल न्यूट्रल IOD स्थिति बनी हुई है।
ऐसी बड़ी जलवायु स्थितियां मानसून की व्यापक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि किसी खास शहर में किसी खास दिन कितनी बारिश होगी, यह स्थानीय मौसम प्रणालियों और अल्पकालिक परिस्थितियों पर ज्यादा निर्भर करता है।
किसानों के लिए बारिश राहत भी, चुनौती भी
सितंबर की बारिश किसानों के लिए दोधारी स्थिति पैदा कर सकती है। सही मात्रा में बारिश मिट्टी में नमी बनाए रखने और खरीफ फसलों के लिए मददगार हो सकती है। लेकिन बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर खेतों में जलभराव, फसल गिरने और कटाई प्रभावित होने का खतरा भी रहता है।
IMD ने ओडिशा, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम-मेघालय और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कृषि सलाह में जल निकासी बेहतर रखने और लंबे समय तक खेतों में पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी है।
बारिश के दौरान क्या सावधानी रखें?
मेरी नजर में इस मौसम में सबसे जरूरी बात है कि सिर्फ सोशल मीडिया की वायरल मौसम खबरों पर भरोसा न करें। अपने जिले की चेतावनी और स्थानीय प्रशासन के अपडेट को प्राथमिकता दें।
भारी बारिश और बिजली की संभावना के दौरान:
- खुले मैदान में जाने से बचें।
- बिजली चमकने पर पेड़ के नीचे खड़े न हों।
- पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें।
- निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति को नजरअंदाज न करें।
- तेज हवा के दौरान कमजोर ढांचे और बिजली के खंभों से दूरी रखें।
- किसानों को खेतों में पानी की निकासी की व्यवस्था पहले से दुरुस्त रखनी चाहिए।
IMD ने भी बिजली गिरने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहने तथा पेड़ों के नीचे शरण नहीं लेने की सलाह दी है।
निष्कर्ष: मानसून की विदाई से पहले एक और बारिश का दौर
कुल मिलाकर तस्वीर साफ है—मानसून की विदाई शुरू होने का मतलब बारिश का तुरंत खत्म हो जाना नहीं है। सितंबर के मध्य में बंगाल की खाड़ी के आसपास संभावित निम्न दबाव क्षेत्र और मौजूदा मौसम प्रणालियां कई राज्यों में बारिश को फिर सक्रिय कर सकती हैं।
IMD के ताजा पूर्वानुमान में 10 से 14 सितंबर के बीच उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, बिहार, पूर्वोत्तर, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
साथ ही, पूरे सितंबर के लिए IMD का अनुमान सामान्य से कम बारिश का है। इसलिए इसे “पूरे देश में मानसून की वापसी” कहना सही नहीं होगा। ज्यादा सटीक बात यह है कि मानसून की विदाई के बीच कुछ क्षेत्रों में बारिश का एक और सक्रिय दौर दस्तक दे रहा है।
अगर आप दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश या पूर्वी भारत में रहते हैं, तो अगले कुछ दिनों के स्थानीय मौसम अपडेट पर खास नजर रखना समझदारी होगी। मौसम तेजी से बदल सकता है और कुछ इलाकों में कुछ घंटों के भीतर ही बारिश और आंधी की स्थिति बन सकती है।

