The Revolutionaries Series Review: निखिल आडवाणी की नई हिस्टोरिकल वेब सीरीज The Revolutionaries एक ऐसे दौर की कहानी को सामने लाती है, जिसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की मुख्यधारा वाली कहानियों में अक्सर अपेक्षाकृत कम जगह मिलती है। Prime Video पर 11 सितंबर 2026 को रिलीज हुई यह आठ एपिसोड की सीरीज संजीव सान्याल की किताब Revolutionaries: The Other Story of How India Won Its Freedom पर आधारित है। इसमें भुवन बाम, रोहित सराफ, प्रतिभा रांता और गुरफतेह पीरजादा प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
सीरीज का सबसे बड़ा आकर्षण इसका विषय है। यह महात्मा गांधी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले अहिंसक आंदोलन से अलग उस क्रांतिकारी धारा पर फोकस करती है, जिसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध को स्वतंत्रता की लड़ाई का महत्वपूर्ण रास्ता माना। लेकिन सवाल यह है कि क्या The Revolutionaries इस बेहद महत्वपूर्ण इतिहास को उतनी ही गहराई से पेश कर पाती है, जितनी भव्यता से इसे पर्दे पर दिखाया गया है?
हमारी समीक्षा में जवाब पूरी तरह हां नहीं है।
The Revolutionaries की कहानी क्या है?
The Revolutionaries की कहानी 20वीं सदी के शुरुआती वर्षों में स्थापित है और मुख्य रूप से उन युवा क्रांतिकारियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो ब्रिटिश राज के खिलाफ भूमिगत नेटवर्क तैयार कर सशस्त्र प्रतिरोध की राह चुनते हैं।
सीरीज में राश बिहारी बोस, सचिंद्रनाथ सान्याल, बाघा जतिन और प्रतिभा लाहिड़ी जैसे किरदारों को केंद्र में रखा गया है। Prime Video के आधिकारिक विवरण के मुताबिक, ये चार युवा न्याय, स्वतंत्रता और आजादी के विचार से प्रेरित होकर ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ खड़े होते हैं।
कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राश बिहारी बोस के इर्द-गिर्द है। उनके साथ सचिंद्रनाथ सान्याल, बाघा जतिन और प्रतिभा लाहिड़ी जैसे किरदार क्रांतिकारी गतिविधियों और ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ संघर्ष को आगे बढ़ाते हैं।
यह वह दौर है जब भारत में आजादी की लड़ाई कई अलग-अलग विचारधाराओं और रणनीतियों के जरिए आगे बढ़ रही थी। The Revolutionaries इसी जटिल राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि को एक action-driven historical drama में बदलने की कोशिश करती है।
The Revolutionaries में कौन-कौन से कलाकार हैं?
सीरीज की मुख्य स्टारकास्ट में कई जाने-पहचाने नाम शामिल हैं:
- भुवन बाम — राश बिहारी बोस
- रोहित सराफ — सचिंद्रनाथ सान्याल
- गुरफतेह पीरजादा — बाघा जतिन
- प्रतिभा रांता — प्रतिभा लाहिड़ी
- जेसन शाह — जनरल डायर
- टोटा रॉय चौधरी — अबानी सान्याल
- पाओली डैम — पिशिमा
Prime Video ने सीरीज को निखिल आडवाणी द्वारा created और directed period drama बताया है। इसे Emmay Entertainment के बैनर के तहत मोनिशा आडवाणी और मधु भोजवानी ने प्रोड्यूस किया है।
The Revolutionaries Review: सीरीज की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
अगर इस सीरीज की एक सबसे बड़ी उपलब्धि चुननी हो, तो वह है भूले-बिसरे क्रांतिकारियों को मुख्यधारा की कहानी के केंद्र में लाना।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर बनी फिल्मों और सीरीज में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस और बाद के दौर में भगत सिंह जैसे नामों पर बहुत कुछ बनाया जा चुका है। इसके मुकाबले राश बिहारी बोस, सचिंद्रनाथ सान्याल और बाघा जतिन जैसे व्यक्तित्वों को लोकप्रिय हिंदी स्क्रीन पर उतनी प्रमुखता नहीं मिली।
The Revolutionaries इस कमी को दूर करने का प्रयास करती है।
कुछ समीक्षकों ने भी इसी पहल को सीरीज की सबसे बड़ी उपलब्धि माना है। The Times of India ने इसे armed freedom struggle का महत्वपूर्ण पुनर्पाठ बताया, जबकि Mid-Day ने इस बात पर जोर दिया कि सीरीज इतिहास में अक्सर कम याद किए जाने वाले युवा क्रांतिकारियों को केंद्र में रखती है।
भुवन बाम की एक्टिंग कैसी है?
The Revolutionaries में भुवन बाम का राश बिहारी बोस का किरदार निभाना सीरीज की सबसे ज्यादा चर्चा वाली बातों में से एक है।
एक ऐसे अभिनेता को गंभीर ऐतिहासिक किरदार में देखना, जिसकी पहचान लंबे समय तक डिजिटल कॉमेडी और YouTube कंटेंट से जुड़ी रही है, शुरुआत में थोड़ा असामान्य लगता है। लेकिन कुछ समीक्षाओं के मुताबिक, शुरुआती परिचित छवि से आगे निकलने के बाद बाम किरदार में गंभीरता लाने में सफल होते हैं।
हालांकि सभी समीक्षक उनकी परफॉर्मेंस से पूरी तरह प्रभावित नहीं हुए। कुछ आलोचनाओं में यह भी कहा गया कि किरदार के भीतर की रणनीतिक और भावनात्मक जटिलता को स्क्रीनप्ले पर्याप्त जगह नहीं देता।
यानी समस्या सिर्फ अभिनय की नहीं, बल्कि उस material की भी है जो अभिनेता को दिया गया है।
रोहित सराफ और प्रतिभा रांता का प्रदर्शन
रोहित सराफ ने सचिंद्रनाथ सान्याल की भूमिका निभाई है। यह उनके लिए उन romantic और contemporary characters से अलग भूमिका है, जिनके लिए युवा दर्शक उन्हें ज्यादा जानते हैं।
सीरीज में सचिंद्रनाथ के भीतर मौजूद आदर्शवाद, संघर्ष और क्रांतिकारी विचारों को धीरे-धीरे विकसित किया गया है। कुछ समीक्षकों ने उनके अभिनय और प्रतिभा रांता के साथ उनकी chemistry को सीरीज के मजबूत हिस्सों में गिना है।
प्रतिभा रांता प्रतिभा लाहिड़ी के किरदार में हैं। उनका किरदार खास इसलिए है क्योंकि सीरीज महिला पात्रों को केवल romantic subplot तक सीमित रखने के बजाय उन्हें क्रांतिकारी नेटवर्क का हिस्सा बनाने की कोशिश करती है।
गुरफतेह पीरजादा और पाओली डैम भी छोड़ते हैं प्रभाव
गुरफतेह पीरजादा ने बाघा जतिन का किरदार निभाया है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और controlled performance को कई समीक्षाओं में सराहा गया है।
वहीं पाओली डैम का किरदार अपेक्षाकृत सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद प्रभाव छोड़ता है। कुछ समीक्षकों ने उनकी performance को सीरीज के standout moments में शामिल किया है।
यहां सीरीज की casting की एक खूबी सामने आती है—कई supporting performers उस समय ज्यादा असरदार लगते हैं जब कहानी उन्हें बड़े संवादों के बजाय परिस्थितियों में प्रतिक्रिया करने का मौका देती है।
The Revolutionaries की सबसे बड़ी कमजोरी: जरूरत से ज्यादा ग्लॉस
यहीं से सीरीज की सबसे बड़ी आलोचना शुरू होती है।
The Revolutionaries का विषय स्वाभाविक रूप से gritty, राजनीतिक और भावनात्मक है, लेकिन इसका visual treatment कई जगह बहुत polished और stylised महसूस होता है।
Moneycontrol की समीक्षा ने इसी समस्या को प्रमुखता से उठाया और कहा कि कहानी की वास्तविक ताकत उसकी अनजानी ऐतिहासिक दुनिया में है, लेकिन जरूरत से ज्यादा style और polish उसके emotional impact को कम कर देते हैं।
कई दृश्यों में production design, slow motion, background score और action presentation इतने prominent हो जाते हैं कि वास्तविक ऐतिहासिक परिस्थितियों की कठोरता पीछे चली जाती है।
यानी जिस कहानी को जमीन, पसीने, डर और अनिश्चितता की जरूरत थी, वहां कभी-कभी spectacle ज्यादा दिखाई देता है।
क्या The Revolutionaries इतिहास को सही तरीके से दिखाती है?
यह सवाल सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक historical drama है।
सीरीज संजीव सान्याल की किताब पर आधारित है और वास्तविक क्रांतिकारी पात्रों तथा घटनाओं से प्रेरणा लेती है। लेकिन adaptation होने के कारण इसमें dramatization और creative liberties भी हैं।
कुछ समीक्षकों ने विशेष रूप से historical representation में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए हैं। Moneycontrol ने राश बिहारी बोस के वास्तविक पदनाम से जुड़े एक बदलाव का उदाहरण दिया है।
इसलिए The Revolutionaries को इतिहास की पाठ्यपुस्तक की तरह देखना सही नहीं होगा। इसे वास्तविक ऐतिहासिक घटनाओं और व्यक्तित्वों से प्रेरित dramatic interpretation के रूप में देखना ज्यादा उचित है।
Gandhi बनाम Revolutionaries: क्या सीरीज बहस को पर्याप्त गहराई देती है?
सीरीज का सबसे दिलचस्प विषय यही है।
भारत की आजादी की लड़ाई को केवल एक रणनीति से समझना मुश्किल है। एक तरफ महात्मा गांधी का अहिंसक आंदोलन था, वहीं दूसरी तरफ ऐसे क्रांतिकारी थे जो मानते थे कि ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती देने के लिए सशस्त्र संघर्ष जरूरी था।
The Revolutionaries इस दूसरे पक्ष को foreground करती है।
लेकिन कुछ समीक्षकों की शिकायत है कि सीरीज इस वैचारिक टकराव को पूरी जटिलता से explore नहीं कर पाती। The Hollywood Reporter India ने टिप्पणी की कि शो में अहिंसक आंदोलन के प्रति दूरी और armed resistance की प्रस्तुति कभी-कभी ऐसी लगती है जैसे दोनों विचारधाराएं आपस में प्रतिस्पर्धा कर रही हों, जबकि स्वतंत्रता आंदोलन की वास्तविक कहानी इससे कहीं अधिक जटिल थी।
यही वह जगह है जहां सीरीज और बेहतर हो सकती थी।
अगर शो यह दिखाता कि अलग-अलग विचारधाराओं के बावजूद सभी धाराओं का अंतिम लक्ष्य स्वतंत्रता था, तो इसका राजनीतिक और ऐतिहासिक प्रभाव कहीं अधिक गहरा हो सकता था।
क्या The Revolutionaries में एक्शन अच्छा है?
एक्शन सीरीज की presentation का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कहानी ही underground revolutionary networks, हथियारों, गुप्त योजनाओं और ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ resistance पर आधारित है।
लेकिन यहां भी प्रतिक्रिया मिली-जुली है।
कुछ समीक्षकों को इसकी pacing और action engaging लगी, जबकि दूसरी ओर कुछ ने महसूस किया कि action और visual spectacle कई बार कहानी की emotional depth पर हावी हो जाते हैं।
इसलिए अगर आप high-scale historical action series देखने के लिए तैयार हैं, तो इसमें काफी कुछ है। लेकिन अगर आप documentary-style realism या बेहद grounded historical drama चाहते हैं, तो कुछ हिस्से आपको अधिक stylised लग सकते हैं।
The Revolutionaries की सिनेमैटोग्राफी और Production Design
Visual scale सीरीज की स्पष्ट ताकत है।
Prime Video और मेकर्स ने इसे बड़े स्तर पर बनाया है। कहानी के लिए दिल्ली, लाहौर, कलकत्ता, देहरादून और बनारस जैसे स्थानों की दुनिया को re-create किया गया है।
पीरियड सेटिंग, costumes, locations और production design दर्शकों को शुरुआती 20वीं सदी के भारत में ले जाने का प्रयास करते हैं।
लेकिन यही visual richness कुछ समीक्षकों के लिए कमजोरी भी बनती है।
कहानी की ऐतिहासिक गंभीरता और दृश्य भव्यता के बीच संतुलन हर जगह कायम नहीं रह पाता।
The Revolutionaries कितने एपिसोड की है?
The Revolutionaries Season 1 में आठ एपिसोड हैं। सीरीज Prime Video पर हिंदी में उपलब्ध है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रिलीज किया गया है। Prime Video के अनुसार, इसका प्रीमियर भारत सहित 240 से अधिक देशों और क्षेत्रों में हुआ।
The Revolutionaries: Quick Details
- नाम: The Revolutionaries
- निर्देशक: निखिल आडवाणी
- मुख्य कलाकार: भुवन बाम, रोहित सराफ, प्रतिभा रांता, गुरफतेह पीरजादा
- भाषा: हिंदी
- एपिसोड: 8
- प्लेटफॉर्म: Prime Video
- रिलीज डेट: 11 सितंबर 2026
- आधार: संजीव सान्याल की Revolutionaries: The Other Story of How India Won Its Freedom
- Genre: Historical Drama / Period Action
- मुख्य विषय: भारत का सशस्त्र स्वतंत्रता आंदोलन
क्या The Revolutionaries देखने लायक है?
हां, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप सीरीज से क्या उम्मीद कर रहे हैं।
अगर आपको भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अनसुने अध्याय, क्रांतिकारी आंदोलन और Rash Behari Bose या Sachindranath Sanyal जैसे कम चर्चित ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की कहानियों में रुचि है, तो यह सीरीज देखने लायक है।
अगर आपकी प्राथमिकता सिर्फ तेज-तर्रार action और spectacle है, तो भी सीरीज कुछ आकर्षक moments देती है।
लेकिन अगर आप एक अत्यंत grounded, historically nuanced और ideologically balanced स्वतंत्रता संग्राम की कहानी चाहते हैं, तो इसकी कुछ सीमाएं निराश कर सकती हैं।
The Revolutionaries Review: हमारा Verdict
The Revolutionaries की कहानी खुद इतनी मजबूत और महत्वपूर्ण है कि उसे किसी अतिरिक्त चमक की जरूरत नहीं थी।
निखिल आडवाणी की सीरीज का इरादा सराहनीय है—यह उन लोगों को spotlight में लाती है जिनकी भूमिका भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की लोकप्रिय स्मृति में अक्सर पीछे छूट जाती है।
भुवन बाम, रोहित सराफ, प्रतिभा रांता और गुरफतेह पीरजादा अपने-अपने स्तर पर मजबूत प्रयास करते हैं। कई supporting performances भी असरदार हैं। सीरीज का scale, period setting और production value इसे देखने योग्य बनाते हैं।
लेकिन The Revolutionaries कई जगह इतिहास की गंभीरता को spectacle में बदल देती है। जरूरत से ज्यादा polished visuals, loud treatment और कुछ creative liberties कहानी की rawness को कम करते हैं। यही वजह है कि अलग-अलग समीक्षकों ने इसे लेकर काफी अलग राय दी है—कुछ ने इसे महत्वपूर्ण और engaging historical drama माना, जबकि कुछ ने इसे disappointing और overly stylised बताया।
रेटिंग: 3/5
अगर यह सीरीज अपने characters की आंतरिक दुनिया, revolutionary ideology और उस दौर की सामाजिक-राजनीतिक जटिलताओं को थोड़ा और गहराई से explore करती, तो इसका प्रभाव कहीं अधिक शक्तिशाली हो सकता था।
फिर भी, इसकी सबसे बड़ी सफलता शायद यही है कि The Revolutionaries देखने के बाद दर्शक उन नामों और आंदोलनों के बारे में और जानना चाहते हैं जिन्हें इतिहास के लोकप्रिय संस्करण में अक्सर कम जगह मिली।
और किसी historical series के लिए इससे बेहतर शुरुआती बातचीत शायद ही कोई हो।
FAQs: The Revolutionaries Series Review
The Revolutionaries कैसी है?
The Revolutionaries एक ambitious historical action drama है, जो भारत के सशस्त्र स्वतंत्रता आंदोलन के कम चर्चित क्रांतिकारियों की कहानी बताती है। इसकी performances और scale इसकी ताकत हैं, जबकि stylised treatment और pacing इसकी कमजोरियां मानी गई हैं।
The Revolutionaries किसकी कहानी है?
सीरीज मुख्य रूप से राश बिहारी बोस, सचिंद्रनाथ सान्याल, बाघा जतिन और प्रतिभा लाहिड़ी जैसे क्रांतिकारियों की कहानी पर केंद्रित है।
The Revolutionaries में भुवन बाम कौन बने हैं?
भुवन बाम ने राश बिहारी बोस की भूमिका निभाई है।
The Revolutionaries में रोहित सराफ का किरदार क्या है?
रोहित सराफ ने सचिंद्रनाथ सान्याल की भूमिका निभाई है।
The Revolutionaries में प्रतिभा रांता कौन बनी हैं?
प्रतिभा रांता ने प्रतिभा लाहिड़ी का किरदार निभाया है।
The Revolutionaries कहां देख सकते हैं?
सीरीज Prime Video पर स्ट्रीम हो रही है। इसका worldwide premiere 11 सितंबर 2026 को हुआ था।
The Revolutionaries में कितने एपिसोड हैं?
सीरीज का पहला सीजन आठ एपिसोड का है।
क्या The Revolutionaries सच्ची कहानी पर आधारित है?
सीरीज वास्तविक ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और घटनाओं से प्रेरित है तथा संजीव सान्याल की किताब Revolutionaries: The Other Story of How India Won Its Freedom पर आधारित है। इसे एक dramatized historical series के रूप में देखना चाहिए, न कि पूरी तरह documentary account के रूप में।
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