नारनौल: बाबा खेतानाथ आयुष कॉलेज के विद्यार्थियों ने इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाले स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से उनके स्टाइपेंड में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि इस अवधि में महंगाई लगातार बढ़ी है। छात्रों ने सरकार से मांग की कि आयुष पाठ्यक्रम की अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाले स्टाइपेंड को बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए।
विद्यार्थियों का कहना है कि आयुष पाठ्यक्रम में करीब साढ़े चार वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होती है। इस दौरान वे अस्पताल में मरीजों के उपचार सहित विभिन्न चिकित्सकीय कार्यों में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड लंबे समय से पुरानी राशि के स्तर पर ही बना हुआ है।
वर्षों से स्टाइपेंड में बढ़ोतरी नहीं होने का आरोप
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने बताया कि उनका स्टाइपेंड वर्ष 2011 में तय राशि के स्तर पर ही है। छात्रों का कहना है कि इतने वर्षों में महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों में काफी बढ़ोतरी हो चुकी है, लेकिन इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाली राशि में उसी अनुपात में बदलाव नहीं किया गया।
विद्यार्थियों के मुताबिक इंटर्नशिप उनके पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अस्पताल में काम करते हुए उन्हें मरीजों से जुड़े विभिन्न कार्यों में जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। ऐसे में उनका कहना है कि स्टाइपेंड ऐसा होना चाहिए जिससे इंटर्नशिप के दौरान होने वाले जरूरी खर्चों को पूरा करने में मदद मिल सके।
दूसरे शहरों से आने वाले छात्रों पर आर्थिक दबाव
विद्यार्थियों ने बताया कि बाबा खेतानाथ आयुष कॉलेज में कई छात्र दूसरे शहरों और जिलों से पढ़ाई करने के लिए आते हैं। इंटर्नशिप के दौरान भी उन्हें रहने और आने-जाने का खर्च खुद उठाना पड़ता है।
छात्रों के अनुसार उन्हें इन खर्चों के अलावा भोजन और पढ़ाई से जुड़े अन्य जरूरी खर्च भी करने होते हैं। मौजूदा स्टाइपेंड इन खर्चों के मुकाबले काफी कम है। महंगाई बढ़ने के बावजूद स्टाइपेंड में बदलाव नहीं होने से विद्यार्थियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विद्यार्थियों ने सरकार से मांग की कि उनकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्टाइपेंड की राशि में उचित बढ़ोतरी की जाए।
आयुष इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न के स्टाइपेंड का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि इन पाठ्यक्रमों के इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की जा चुकी है, जबकि आयुष पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को अभी भी पुरानी राशि के आधार पर स्टाइपेंड मिल रहा है।
छात्रों ने सवाल उठाया कि जब आयुष विद्यार्थी भी अपनी इंटर्नशिप के दौरान अस्पताल में मरीजों से जुड़े चिकित्सकीय कार्यों में जिम्मेदारी निभाते हैं, तो उनके स्टाइपेंड में भी उचित बढ़ोतरी होनी चाहिए।
उनका कहना है कि स्टाइपेंड में बढ़ोतरी से विद्यार्थियों को अपनी इंटर्नशिप के दौरान होने वाले जरूरी खर्चों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
सरकार से 25 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड की मांग
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने सरकार के सामने अपनी मांग रखते हुए कहा कि इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाले स्टाइपेंड को बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाना चाहिए। छात्रों का कहना है कि वे किसी अतिरिक्त सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि ऐसी राशि चाहते हैं जिससे रहने, खाने, परिवहन और अन्य आवश्यक खर्चों का कुछ हिस्सा पूरा किया जा सके।
विद्यार्थियों ने सरकार से इस मामले में जल्द निर्णय लेने की अपील की। उनका कहना है कि लंबे समय से स्टाइपेंड में बदलाव नहीं होने के कारण आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और सरकार को उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने रखी अपनी बात
प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी समस्याओं और मांगों को सामने रखा। छात्रों का कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पताल में अपने स्तर पर जिम्मेदारियां निभाते हैं और यह अवधि उनके व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए महत्वपूर्ण होती है।
विद्यार्थियों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की कि आयुष इंटर्न के स्टाइपेंड की वर्तमान राशि की समीक्षा की जाए और महंगाई तथा विद्यार्थियों के खर्च को ध्यान में रखते हुए नई राशि निर्धारित की जाए।
इस दौरान छात्र अंकित सैनी, छात्रा संयोगिता समेत अन्य विद्यार्थियों ने अपनी बात रखी। कॉलेज के प्रिंसिपल श्रीनिवास गिरवार का भी बाइट लिया गया।
छात्रों को सरकार के फैसले का इंतजार
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर विद्यार्थियों के प्रदर्शन के बाद अब उनकी नजर सरकार के फैसले पर है। छात्रों का कहना है कि यदि उनकी मांग पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थियों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
फिलहाल विद्यार्थियों ने अपनी मांग को सरकार तक पहुंचाने और स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की मांग की है। आने वाले समय में संबंधित विभाग इस मामले में क्या निर्णय लेता है, इस पर छात्रों और कॉलेज प्रशासन की नजर बनी हुई है।
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