Lucknow AYUSH Doctors Protest: 11वें दिन भी धरना जारी, ₹25,000 Stipend का लिखित आदेश कब?

Lucknow AYUSH Doctors Protest: 11वें दिन भी धरना जारी, ₹25,000 Stipend का लिखित आदेश कब?

Lucknow AYUSH Doctors Protest – गोमती नगर के हैनीमैन चौराहा स्थित नेशनल होम्योपैथिक कॉलेज में आयुष इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर धरना आज 11वें दिन भी जारी है। डॉक्टरों की मांग है कि उनका स्टाइपेंड ₹7,500 से बढ़ाकर ₹25,000 किया जाए।डॉक्टरों का कहना है कि आयुष मंत्री की ओर से आश्वासन मिलने के बावजूद, अभी तक कोई स्पष्ट लिखित शासनादेश जारी नहीं हुआ है। कैबिनेट बैठक के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी इस मुद्दे पर स्पष्ट घोषणा नहीं की गई। धरने वाले स्थान पर पुलिस की उपस्थिति बढ़ गई है, और डॉक्टरों को मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दी जा रही है। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन भी उन पर धरना खत्म करने का दबाव बना रहा है, जबकि ओपीडी खुली हुई है। डॉक्टरों का सवाल है कि जब आश्वासन मिल चुका है, तो लिखित आदेश कब आएगा।अब यह देखना है कि सरकार इस 11 दिन पुराने आंदोलन पर क्या कदम उठाती है।

लखनऊ के गोमती नगर स्थित हैनीमैन चौराहे पर राजकीय नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के आयुष इंटर्न डॉक्टरों का stipend protest लगातार लंबा खिंच रहा है। 17 सितंबर 2026 को आंदोलन 11वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि उनका मासिक स्टाइपेंड ₹7,500 से बढ़ाकर ₹25,000 किया जाए। उनका कहना है कि clinical duty, patient care और internship workload के मुकाबले मौजूदा राशि बेहद कम है। इस आंदोलन का सबसे बड़ा सवाल अब केवल stipend amount नहीं, बल्कि verbal assurance और written government order के बीच बना gap है।

डॉक्टरों के अनुसार, आयुष मंत्री की ओर से मांग पर सकारात्मक आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक स्पष्ट लिखित शासनादेश जारी नहीं हुआ। उनका कहना है कि हाल की Cabinet meeting के बाद हुई press conference में भी आयुष इंटर्न के स्टाइपेंड को लेकर कोई साफ घोषणा नहीं की गई। इसी कारण प्रदर्शनकारी यह पूछ रहे हैं कि यदि निर्णय पर सहमति बन चुकी है, तो उसका written order, implementation date और eligible interns की स्पष्ट जानकारी कब सामने आएगी। जब तक लिखित आदेश नहीं मिलता, तब तक केवल मौखिक आश्वासन से financial benefit सुनिश्चित नहीं माना जा सकता।

धरनास्थल पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ने और मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दिए जाने का दावा भी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने किया है। उनका आरोप है कि कॉलेज प्रशासन की तरफ से आंदोलन समाप्त करने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस, कॉलेज प्रशासन या आयुष विभाग की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। डॉक्टरों का कहना है कि OPD खुली हुई है और protest के साथ patient services को जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पहले 10 सितंबर की एक स्थानीय रिपोर्ट में आंदोलन के दौरान OPD प्रभावित होने और कॉलेज स्तर से शासन को मांग भेजे जाने की जानकारी दी गई थी।

यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है जब उत्तर प्रदेश सरकार MBBS और BDS के सरकारी इंटर्न डॉक्टरों का stipend ₹12,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर चुकी है। आयुष इंटर्न इसी स्तर पर parity की मांग कर रहे हैं, हालांकि दोनों संवर्गों के नियम और administrative departments अलग हो सकते हैं। समस्या का practical solution एक स्पष्ट written order, लागू होने की तारीख, financial approval और सभी stakeholders के साथ time-bound communication है। अब नजर सरकार पर है कि वह 11 दिन पुराने आंदोलन को बातचीत और लिखित निर्णय के जरिए समाप्त करती है या गतिरोध आगे भी जारी रहता है।

AYUSH Intern Doctors की Main Demands क्या हैं?

आयुष इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांग केवल financial relief तक सीमित नहीं है। वे समान clinical responsibility के बदले सम्मानजनक stipend और स्पष्ट policy चाहते हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, आश्वासन मिलने के बाद भी written government order जारी न होने से uncertainty बनी हुई है। इसी वजह से धरना समाप्त करने के बजाय डॉक्टर official notification का इंतजार कर रहे हैं।

  • मौजूदा मासिक stipend: ₹7,500
  • डॉक्टरों की मांग: ₹25,000 प्रतिमाह
  • 17 सितंबर को आंदोलन का 11वां दिन
  • स्पष्ट लिखित शासनादेश जारी करने की मांग
  • OPD खुली रखने का प्रदर्शनकारियों का दावा
Written Government Order Why जरूरी है?
Written Government Order Why जरूरी है?

Written Government Order Why जरूरी है?

मौखिक आश्वासन किसी demand पर सरकार की सकारात्मक मंशा दिखा सकता है, लेकिन financial benefit लागू करने के लिए सामान्यतः written approval, budget provision और implementation instructions जरूरी होते हैं। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की चिंता यही है कि शासनादेश के बिना ₹25,000 stipend कब से मिलेगा, किन batches को मिलेगा और arrears लागू होंगे या नहीं—इन सवालों का स्पष्ट उत्तर नहीं है। Cabinet press conference में मुद्दे का उल्लेख न होने से uncertainty और बढ़ी है।

सरकार एक short written status जारी करके बता सकती है कि proposal किस stage पर है, approval किस authority से चाहिए और expected timeline क्या है। इससे rumours कम होंगे और protestors को official clarity मिलेगी। दूसरी ओर, डॉक्टरों को patient care जारी रखते हुए representation, meeting minutes और written correspondence का record सुरक्षित रखना चाहिए। Negotiation तभी meaningful होगी, जब दोनों पक्ष मौखिक बातचीत को documented action points और समयबद्ध निर्णय में बदलें।

Stipend का Quick Comparison

स्टाइपेंड विवाद को समझने के लिए मौजूदा भुगतान, डॉक्टरों की मांग और MBBS-BDS interns के revised stipend को साथ देखना जरूरी है। इससे पता चलता है कि आयुष डॉक्टर किस आधार पर parity मांग रहे हैं। हालांकि, अलग medical streams पर अलग service rules लागू हो सकते हैं और समान राशि स्वतः लागू नहीं होती।

श्रेणीवर्तमान/पुराना Stipendसंशोधित या मांगी गई राशिमौजूदा स्थिति
AYUSH इंटर्न डॉक्टर₹7,500₹25,000आंदोलन और लिखित आदेश की मांग
सरकारी MBBS/BDS इंटर्न₹12,000₹25,000Cabinet-approved revision
AYUSH stipend difference₹17,500 की बढ़ोतरीअलग शासनादेश आवश्यक
प्रस्तावित बढ़ोतरीमौजूदा राशि का लगभग 3.33 गुना₹25,000आधिकारिक पुष्टि बाकी

सरकारी MBBS और BDS इंटर्न के stipend revision से संबंधित जानकारी इस प्रकाशित रिपोर्ट में देखी जा सकती है।

Protest का Practical Solution क्या हो सकता है?

11 दिन से जारी आंदोलन का sustainable solution confrontation नहीं, बल्कि documented negotiation है। आयुष विभाग को proposal की स्थिति, financial concurrence और शासनादेश की संभावित timeline सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि ₹25,000 की मांग पर पूर्ण निर्णय अभी संभव नहीं है, तो सरकार interim written response या phased revision का विकल्प बता सकती है। कॉलेज प्रशासन को protestors के साथ formal meeting कर attendance, internship completion और patient services से जुड़े practical concerns दर्ज करने चाहिए।

पुलिस की भूमिका कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित और proportionate रहनी चाहिए। मुकदमे की चेतावनी या दबाव से जुड़े आरोपों पर official clarification जरूरी है। डॉक्टरों को peaceful protest, OPD continuity और लिखित communication पर focus रखना चाहिए। इससे patient care प्रभावित होने का risk घटेगा और उनकी मांग का administrative record मजबूत बनेगा। समाधान की credibility तभी होगी, जब announcement के साथ signed order, effective date, eligibility और payment process भी सार्वजनिक किए जाएं।

  • सरकार proposal की लिखित स्थिति बताए
  • Approval और implementation timeline स्पष्ट हो
  • OPD तथा जरूरी patient services जारी रहें
  • पुलिस और प्रशासन आरोपों पर clarification दें

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FAQs: Lucknow AYUSH Doctors Protest

1.आयुष इंटर्न डॉक्टरों का धरना कहां चल रहा है?
धरना लखनऊ के गोमती नगर स्थित हैनीमैन चौराहे पर नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।

2.डॉक्टरों को अभी कितना stipend मिलता है?
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें वर्तमान में ₹7,500 प्रतिमाह stipend मिलता है।

3.डॉक्टर कितना stipend मांग रहे हैं?
आयुष इंटर्न डॉक्टर stipend बढ़ाकर ₹25,000 प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं।

4.क्या stipend बढ़ाने का लिखित आदेश जारी हो गया है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आयुष इंटर्न के लिए स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से सत्यापित शासनादेश अभी सामने नहीं आया है।

5.क्या आंदोलन के दौरान OPD बंद है?
प्रदर्शनकारियों के अनुसार फिलहाल OPD खुली है। हालांकि, 10 सितंबर की एक रिपोर्ट में उस दिन OPD प्रभावित होने की जानकारी दी गई थी।

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