नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) मंगलवार से लागू हो गया। इससे कपड़ा, चमड़ा और जूते-चप्पल जैसे श्रम गहन क्षेत्रों सहित विभिन्न भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। समझौते के तहत भारतीय निर्यात की सभी शुल्क श्रेणियों को पहले दिन से शुल्क मुक्त पहुंच प्रदान की गई है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों – जिनमें कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, रत्न और आभूषण शामिल हैं – को न्यूजीलैंड के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से सबसे ज्यादा फायदा होगा। यह समझौता मंगलवार से लागू हो जाएगा।
इस समझौते के तहत, न्यूजीलैंड में सभी भारतीय सामानों को शुल्क-मुक्त (duty-free) प्रवेश मिलेगा। ओशिनिया क्षेत्र में न्यूजीलैंड भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है; इस क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया, पापुआ न्यू गिनी और प्रशांत महासागर के कई छोटे द्वीप देश भी शामिल हैं। अभी, श्रम-प्रधान क्षेत्रों और अन्य कई भारतीय सामानों पर न्यूजीलैंड में 10% तक का आयात शुल्क लगता है।
यह समझौता भारत की उन कोशिशों का हिस्सा है, जिनके जरिए वह द्विपक्षीय समझौते करके अपने निर्यात को बढ़ावा देना चाहता है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भू-राजनीतिक संघर्ष बढ़ गए हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (global supply-chains) को फिर से व्यवस्थित किया जा रहा है।
गोयल ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि इस FTA के लागू होने से आने वाले वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश आएगा। इस कार्यक्रम में न्यूजीलैंड के उनके समकक्ष टॉड मैक्ले भी वर्चुअली (ऑनलाइन) शामिल हुए।
इस समझौते के तहत, न्यूजीलैंड को भारतीय बाजार में 70% उत्पादों के लिए विशेष पहुंच मिलेगी। वहीं, भारत ने डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा है और कृषि क्षेत्र में सीमित पहुंच ही दी है। इनमें से लगभग 30% उत्पादों पर पहले दिन से ही कोई शुल्क नहीं लगेगा।
व्यापार को दोगुना करना
गोयल ने 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को दोगुने से भी ज्यादा बढ़ाकर लगभग 7 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
गोयल ने बताया कि श्रम-प्रधान क्षेत्रों के अलावा, इस समझौते से इंजीनियरिंग के सामान, प्रोसेस्ड फूड, सिरेमिक, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे कई अन्य क्षेत्रों को भी फायदा होगा।
सेब, कीवी और शहद का आयात केवल टैरिफ-रेट कोटा, न्यूनतम आयात मूल्य और मौसमी समय-सीमा के जरिए ही हो सकेगा। इसके अलावा, एक ‘कृषि उत्पादकता साझेदारी’ (Agriculture Productivity Partnership) का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिसके तहत न्यूजीलैंड की तकनीक भारत आएगी। इसमें बागवानी प्रबंधन, फसल कटाई के बाद का प्रबंधन और टिकाऊ मधुमक्खी पालन जैसी तकनीकें शामिल हैं।
गोयल ने कहा कि यह FTA “हमारे निर्यातकों, खासकर MSME, कारीगरों, किसानों और महिला उद्यमियों के लिए नए और बड़े अवसर” खोलता है। गोयल ने कहा कि भारत के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र फलों और सब्जियों, कॉफी, मसालों, अनाज और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का निर्यात बढ़ा सकते हैं, जो न्यूजीलैंड में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं।

