मेरठ जिला अदालत ने ब्लू ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों को मर्चेंट नेवी के पूर्व अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या कर शव को सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाने का दोषी पाया गया। अदालत ने 126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बाद यह फैसला दिया।
देश को झकझोर कर रख देने वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में मेरठ की अदालत ने बुधवार को पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय ने दोनों को सौरभ की नृशंस हत्या का दोषी मानते हुए कहा, ”अधर्म के काम पर सजा देना धर्म होता है। मुस्कान-साहिल, आप दोनों ने ही सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या की है। इसे छोड़ा नहीं जा सकता। इसमें किसी भी तरीके की माफी स्वीकार नहीं होगी।” अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई। इसके साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत 50 हजार रुपये और धारा 238ए के तहत 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। हालांकि, मृत्युदंड पर अंतिम फैसला उच्च न्यायालय और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा
इस मामले में 126 सुनवाई और 22 से ज़्यादा गवाहों के बयान हुए हैं, जिसमें अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष ने ज़िला जज अरविंद कुमार मिश्रा के सामने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। यह मामला 17 मार्च, 2025 को अदालत पहुँचा, जबकि मुस्कान और साहिल को 19 मार्च को मेरठ जेल भेज दिया गया। जुलाई 2025 में मुक़दमे को ज़िला जज की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया और लगभग 13 महीनों तक बहस चलती रही।
सजा सुनाए जाने के दौरान जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अदालत से जोड़ा गया था। फैसला सुनते ही दोनों फूट-फूटकर रोने लगे। सजा सुनाने से पहले न्यायाधीश ने मुस्कान से पूछा कि वह अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या में दोषी है, तो क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, ”मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। साहिल से भी यही सवाल किया गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।
ब्लू ड्रम मर्डर केस में क्या हुआ था?
यह मामला मेरठ में मार्च 2025 में हुए सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, राजपूत की हत्या की गई और उसके शव के टुकड़े कर दिए गए; इसके बाद शव के अवशेषों को सीमेंट से भरे नीले प्लास्टिक के ड्रम में छिपा दिया गया। यह मामला तब सामने आया जब उस घर में शव के अवशेष मिले जहाँ कथित तौर पर अपराध हुआ था। इसके बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच और मुकदमे के दौरान हत्या से जुड़ी परिस्थितियों, शव को छिपाने की कथित घटना और अपराध के बाद आरोपियों की गतिविधियों से जुड़े सबूतों की पड़ताल की गई। इस मामले ने लोगों का काफी ध्यान खींचा क्योंकि शव को छिपाने का तरीका बहुत चौंकाने वाला था। मीडिया रिपोर्टिंग में ‘ब्लू ड्रम’ इस मामले की मुख्य पहचान बन गया। 30 सितंबर को दोषी ठहराए जाने के बाद, 14 अक्टूबर को अदालत का आदेश मुस्कान और साहिल की सज़ा तय कर दिया।
अधिवक्ता कृष्ण कुमार दुबे ने इसे महत्वपूर्ण फैसला बताते हुए कहा कि अदालत ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड सुनाया है। उन्होंने कहा कि पूरे देश की नजर इस मामले पर थी।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी फाइल
जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) केके चौबे ने बताया कि फैसले को लगभग एक सप्ताह बाद मृत्युदंड की पुष्टि के लिए हाईकोर्ट भेजा जाएगा। हाईकोर्ट से पुष्टि होने पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है। इसके बाद दोषियों के पास राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करने का विकल्प भी रहेगा। उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया में दो से तीन वर्ष या इससे अधिक समय भी लग सकता है। उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट से सजा बदलने अथवा राष्ट्रपति से दया मिलने की स्थिति में फांसी नहीं होगी।

