Bilaspur News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था के साथ-साथ एक परिवार की धार्मिक आस्था को भी झकझोर कर रख दिया। दरअसल, बिलासपुर के भारतीय नगर मुक्तिधाम में 15 जनवरी को आलोक ठाकरे का अंतिम संस्कार किया गया था। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अस्थियों को अस्थि पात्र में रखकर मुक्तिधाम में सुरक्षित रखा गया था। लेकिन जब परिजनों ने अस्थि विसर्जन के लिए पहुंचकर पात्र खोला, तो वह खाली मिला। यह देखकर हर कोई हैरान रह गया।
सीसीटीवी फुटेज में दिखी चौंकाने वाली तस्वीरें
परिजनों ने इस घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें दो महिलाएं अस्थि पात्र उठाकर ले जाती हुई दिखाई दे रही हैं। मृतक के बच्चों ने अपनी मां और बुआ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बच्चों का कहना है कि यह चोरी संपत्ति विवाद के चलते की गई है। बच्चों ने यह भी बताया कि उनकी मां पिछले दो साल से उनसे अलग रह रही थी।
साथ ही, 10 साल का बेटा और 7 साल की बेटी हाथों में खाली अस्थि पात्र लेकर सिविल लाइन थाने पहुंचे। बच्चों ने थानेदार से कहा, ‘साहब, हमारे पापा की अस्थियां चोरी हो गई हैं, वापस दिला दीजिए।’
पारिवारिक विवाद से शुरू हुआ मामला
यह मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा हुआ है। मृतक आलोक और उनकी पत्नी के बीच लंबे समय से कलह चल रही थी। आरोप है कि आलोक की पत्नी को उसकी बहन ने भड़काकर घर से अलग कर दिया था। इसके बाद आलोक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन पुलिस पत्नी को खोजने में असफल रही थी। मानसिक तनाव और पारिवारिक विवादों के चलते आलोक की सेहत खराब हो गई और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
मुक्तिधाम में अस्थि चोरी का विवाद
यह पूरा मामला अब मुक्तिधाम तक पहुंच चुका है, जहां अस्थियों की चोरी ने धार्मिक और पारिवारिक दोनों ही भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। इस घटना के बाद परिजनों ने पुलिस को शिकायत दी, लेकिन शुरुआत में संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
पुलिस जांच में जुटी
सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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