Delhi AQI : दिल्ली और आसपास के इलाकों में दिवाली के बाद से हवा बेहद ही जहरीली हो गई है। इस बार प्रदूषण ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 445 तक पहुंच गया है, जबकि गाजियाबाद में तो यह 548 तक जा पहुंचा है। इसे सबसे ‘गंभीर’ श्रेणी कहां जाता है, यानी इस हवा में सांस लेके स्वस्थ लोग भी बीमार पड़ सकते हैं और जो पहले से बीमार है उनके लिए तो यह हवा जानलेवा हो सकती है।

इस बार सबसे प्रदूषित शहर कौन-कौन?
- गाजियाबाद – AQI 548
- नोएडा – AQI 468
- दिल्ली – AQI 445
- ग्रेटर नोएडा – AQI 450+
- मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़ – 370-380

हवा जहरीली क्यों हो जाती है?
हर साल ठीक नवंबर-दिसंबर में यही होता है। इसके कई बड़े कारण हैं:
- पराली का धुआं :- पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान पराली जलाते हैं। ठंडी हवा में यह धुआं दिल्ली तक पहुंच जाता है।
- गाड़ियों का धुआं :- दिल्ली-NCR में 1 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां हैं। डीजल गाड़ियां और पुरानी गाड़ियां बहुत प्रदूषण फैलाती हैं।
- निर्माण कार्य की धूल :- मेट्रो, फ्लाईओवर, नई इमारतें – हर तरफ धूल उड़ती रहती है।
- फैक्ट्रियों का प्रदूषण :- छोटी-बड़ी हजारों फैक्ट्रियां दिन-रात धुआं उगलती हैं।
- ठंड का मौसम :- सर्दी में हवा नीचे रहती है, ऊपर नहीं उठती। सारे जहरीले कण जमीन के पास ही फंस जाते हैं। इसीलिए स्मॉग बन जाता है।

सेहत पर बुरा असर
- आंखों में जलन, गला खराब होना आम बात है।
- अस्थमा, ब्रॉन्काइटिस के मरीजों को बहुत तकलीफ होती है।
- बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
- लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से फेफड़े खराब हो सकते हैं, दिल की बीमारियां बढ़ सकती हैं।
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वनडे टूर्नामेंट पर प्रदुषण का असर
BCCI ने दिल्ली में होने वाला अंडर-23 वनडे टूर्नामेंट का नॉकआउट स्टेज मुंबई शिफ्ट कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जब तक AQI 400 से ऊपर रहे, दिल्ली-NCR में बाहर खेलने की इजाजत नहीं दी जाए। स्कूलों में आउटडोर खेल और मॉर्निंग असेंबली भी बंद कर दी गई है।

क्या करें? खुद को कैसे बचाएं?
- बाहर निकलना बहुत जरूरी हो तो N95 मास्क जरूर पहनें।
- सुबह-शाम टहलना बंद करें।
- घर के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें।
- एयर प्यूरीफायर चलाएं।
- बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी रखें।
- गाड़ी कम चलाएं, मेट्रो-पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करें।
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दिल्ली की यह हवा हर साल हमें चेतावनी देती है कि हमें मिलकर कुछ करना होगा – पराली जलाना बंद करना, पुरानी गाड़ियां हटाना, पेड़ लगाना और साफ ऊर्जा अपनाना। अगर अभी हम जागरुक नहीं हुए तो आगे आने समय और भी खतरनाक हो सकता हैं।

