बंसत पंचमी पर चालदा महासू मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

आज बसंत पंचमी का पर्व है. माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है. जौनसार बावर में बसंत पंचमी के मौके पर ग्रामीणों ने अपने इष्ट देवता चालदा महासू के दर्शन किए और सुख समृद्धि की कामना. इस मौके पर देवालों की महिलाओं ने होरी गीतों पर नृत्य किया. नृत्य की यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है.

जौनसार बावर के इष्ट देवता के रूप में पूजे जाने वाले चालदा महासू इन दिनों समाल्टा के नवनिर्मित मंदिर में विराजमान हैं. बसंत पंचमी के मौके पर मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ा. सैकड़ों श्रद्धालुओं ने समाल्टा पहुंचकर देव दर्शन किए. मंदिर परिसर में हनोल से आए देवता के देवालों (देवता के साथ ढोल आदि वाद्य यंत्रों के साथ रहने वाले लोग) ने बसंत पंचमी के आगाज पर कृष्ण भगवान की गाथा सुनाई. साथ ही महिलाओं ने बसंत ऋतु के होरी गीतों पर नृत्य भी किया.

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हनोल से आईं देवाल रेखा ने बताया कि जिस तरह कृष्ण के साथ गोपियां नृत्य करती हैं, उसी तरह महासू देवता के मंदिर परिसर में देवता के साथ देवालों की महिलाएं गोपियों की तरह नृत्य करती हैं. यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रहा है. वहीं, देवाल भूपेंद्र ने बताया कि देव संस्कृति का नृत्य देवालों की महिलाएं करती हैं. यह नृत्य होरी नृत्य कहलाता है और बसंत पंचमी का आगाज होने पर कृष्ण लीला का बखान किया जाता है. जिस पर महिलाएं नृत्य करती हैं

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