Stray Dogs: देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और आतंक पर सुप्रीम कोर्ट ने आज एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि नागरिकों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की जान की सुरक्षा सबसे ऊपर है। कोर्ट ने राज्यों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जो कुत्ते रेबीज से संक्रमित हैं, गंभीर रूप से बीमार हैं या अत्यधिक आक्रामक और खतरनाक हो चुके हैं, उन्हें कानून के तहत जरूरत पड़ने पर ‘यूथेनेशिया’ दी जा सकती है।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन जजों की बेंच ने इस मामले से जुड़ीं सभी पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने साफ किया कि 7 नवंबर, 2025 को दिया गया उसका पुराना आदेश पूरी तरह लागू रहेगा और सड़कों व सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के फैसले में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
‘डॉग लवर्स’ को झटका
पशु प्रेमियों और विभिन्न संगठनों की ओर से कोर्ट में याचिकाएं दायर कर मांग की गई थी कि सार्वजनिक स्थानों और सड़कों से पकड़े गए कुत्तों को वैक्सीनेशन करने के बाद वापस उसी जगह छोड़ दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस अपील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि वह एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) के नियमों और एसओपी (SOP) के खिलाफ जाने वाले सभी आवेदनों को नामंजूर करती है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश में लगातार बढ़ रही डॉग बाइट की घटनाओं पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई। कोर्ट ने राजस्थान के श्रीगंगानगर का उदाहरण दिया, जहां महज एक महीने में कुत्तों के काटने की 1,084 घटनाएं सामने आईं। वहीं तमिलनाडु में साल के शुरुआती चार महीनों में ही 2 लाख से अधिक मामले रिकॉर्ड किए गए।
माननीय अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा- ‘देश में बच्चों और बुजुर्गों को सरेआम कुत्ते काट रहे हैं, लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। हम ऐसी गंभीर स्थिति से आंखें नहीं मूंद सकते। गरिमा के साथ जीने के अधिकार (अनुच्छेद 21) में यह भी शामिल है कि नागरिक बिना किसी डर के सार्वजनिक स्थानों पर घूम सकें। हमारा संविधान ऐसा समाज नहीं चाहता जहां बच्चों और बुजुर्गों को सिर्फ शारीरिक ताकत या कुत्तों की दया पर निर्भर रहना पड़े।’
आदेश न मानने पर चलेगा अवमानना का केस
अदालत ने राज्यों की ढुलमुल कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी व्यक्त की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकारों ने ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC)’ नियमों का सही से पालन किया होता, तो आज देश में यह नौबत नहीं आती। कोर्ट ने चेतावनी दी ‘हमारे 7 नवंबर, 2025 के आदेश का राज्यों ने सही तरीके से पालन नहीं किया। अब इसे ‘कोर्ट की अवमानना’ के तौर पर देखा जाएगा। जो राज्य निर्देश नहीं मानेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।’
अदालत ने फिलहाल मामले की सुनवाई बंद कर दी है, लेकिन सभी राज्यों को 17 नवंबर तक ‘कंप्लायंस रिपोर्ट’ सौंपने का आदेश दिया है।
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