Ghooskhor Pandat: रामलीला, पीके, पद्मावत और अब ‘घूसखोर पंडत’… एक और फिल्म को लेकर देश में बवाल मच गया है। नीरज पांडे की वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर देशभर में माहौल गरमाया हुआ है। फिल्म के महज 50 सेकंड के टीज़र रिलीज़ होते ही ब्राह्मण समाज ने इसके नाम पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे अपनी गरिमा के खिलाफ बताया है। भोपाल सहित देश के कई हिस्सों में फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिसमें अभिनेता मनोज बाजपेयी, निर्माता नीरज पांडे और ओटीटी प्लेटफॉर्म का जमकर विरोध किया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि यह मामला केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में गहराती जातिवादी मानसिकता को उजागर करता है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सत्ता और सियासत में मचा हड़कंप
इस विवाद की गूंज अब सत्ता के गलियारों तक भी पहुँच गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में सीरीज के निर्देशक और पूरी टीम के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि समाज के किसी भी वर्ग का इस तरह अपमान करना गलत है।
मेकर्स और मनोज बाजपेयी की सफाई
विवाद बढ़ता देख फिल्म के मुख्य अभिनेता मनोज बाजपेयी ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर कहा, ‘मैं लोगों की भावनाओं और उनकी चिंताओं को समझता हूँ। एक कलाकार के तौर पर मेरा मकसद किसी समुदाय को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि एक ऐसे किरदार को निभाना था जो अपनी कमियों को सुधारता है।’ निर्देशक नीरज पांडे ने भी स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी जाति विशेष पर टिप्पणी करना नहीं था। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए मेकर्स ने फिल्म के टीज़र और पोस्टर को फिलहाल सोशल मीडिया से हटा दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
नेटफ्लिक्स पर आने वाली इस सीरीज में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिसवाले की भूमिका में हैं। फिल्म के नाम में ‘पंडत’ शब्द के साथ ‘घूसखोर’ विशेषण लगाने पर समाज के लोगों का कहना है कि यह एक पूरी जाति की छवि खराब करने की कोशिश है। दिल्ली हाई कोर्ट में भी इस मामले को लेकर याचिका दायर की गई है। फिलहाल, कानूनी और सामाजिक दबाव के बीच फिल्म की रिलीज पर सस्पेंस बना हुआ है।
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