Hardoi Mithni Story

Hardoi Mithni Story: डकैतों के कब्जे से छूटकर 65 साल बाद मायके पहुंची मिठनी

Hardoi Mithni Story: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से एक दिल छूने वाली कहानी सामने आई है, जहाँ 15 साल की उम्र में किडनैप हुई मिठनी नाम की लड़की 65 साल बाद अपने परिवार से वापिस मिली है. जिसे देख पूरा गांव भावुक हो उठा.जी हाँ ये कहानी थोड़ी फ़िल्मी लग सकती है लेकिन ये कहानी असली है. ये कहानी 1961 में यह घटना घटी थी, जब मिठनी को डकैतों ने घर से उठा लिया था।

डकैती की खौफनाक रात

1961 में हरदोई के टोलवा आट गांव में डकैतों ने हमला किया था। मिठनी के पिता बलदेव और भाई शिवलाल को मारकर डकैतों ने मिठनी को अगवा कर लिया। मिठनी के परिवार में सब कुछ पल भर में तबाह हो गया, और 15 साल की लड़की को जंगलों में भटकते हुए डकैतों ने अलीगढ़ तक पहुंचाया।

नई जिंदगी का सफर

अलीगढ़ में मिठनी को पहलवान सोहनलाल यादव ने छुड़ाया और अपनी पत्नी बना लिया। सोहनलाल के साथ मिठनी ने नया जीवन शुरू किया, और उनके 8 बच्चे हुए। लेकिन मिठनी के दिल में हमेशा अपने मायके की यादें बसी रही। वह अक्सर अपने घर और परिवार के बारे में अपनी कहानी सुनाती रहती थीं।

मायके की यादें

मिठनी को अपने पिता और भाई के नाम याद थे, और वह हरदोई जिले के सकाहा गांव के शिव मंदिर के बारे में भी बात करती थीं। उनकी बेटी सीमा यादव (जो नोएडा में रहती हैं) ने ठान लिया कि वह अपनी मां को उनके पुराने घरवालों से मिलवाएगी। सीमा ने मां के बताए रास्तों पर चलकर हरदोई पहुंचे और सकाहा मंदिर के पास मिठनी का गांव ढूंढ़ निकाला।

जब मिठनी ने अपने गांव के पास पहुंचकर पुरानी जगहें देखीं, तो उसे यादें ताजा हो गईं। वहां की खोजबीन से पता चला कि उनके भाई शिवलाल और सूबेदार अब नहीं रहे, लेकिन उनके परिवार के लोग अब भी वहीं रहते थे। मिठनी ने अपनी बहू से मिलकर अपने अपहरण की कहानी सुनाई। फिर, परिवार के लोग एकत्र हुए और मिठनी को गले लगा लिया। यह पल बहुत ही भावुक था, क्योंकि परिवार के लिए मिठनी की वापसी 65 साल का इंतजार था।

यह दिल छूने वाली कहानी एक सच्चे साहस की मिसाल है, जहां एक मां अपने घरवालों से बिछड़ने के 65 साल बाद अपने परिवार से मिल पाई। मिठनी की वापसी ने सबको आंसुओं में डुबो दिया और यह साबित किया कि समय और दूरी से रिश्तों का कोई फर्क नहीं पड़ता।

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