उत्तराखंड में हरेला पर्व के अवसर पर संस्कृति, पर्यावरण और जनजागरूकता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उत्तराखंड संस्कृत साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट ने बताया कि सुमन पर्व यात्रा के तहत बाबा सोमनाथ मंदिर में रुद्राक्ष का पौधा रोपित किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पांच वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों और हरेला पर्व के महत्व पर संगोष्ठियों का आयोजन भी होगा।
उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा। मधु भट्ट ने बताया कि परिषद पिछले कई वर्षों से पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण अभियान चला रही है। पिछले वर्ष तुंगनाथ से सोमनाथ तक पौधरोपण अभियान चलाया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम अब देखने को मिल रहे हैं और लगाए गए फलदार पौधों में फल आने शुरू हो गए हैं। उन्होंने कहा कि हरेला उत्तराखंड की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा है, जो आज पूरे देश और विश्व में अपनी अलग पहचान बना रही है।
हरेला पर्व उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी मजबूत प्रतीक बन चुका है। इस वर्ष आयोजित होने वाले पौधरोपण अभियान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगोष्ठियां और सामाजिक भागीदारी यह दर्शाती हैं कि प्रकृति की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। यदि प्रत्येक नागरिक हर वर्ष एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सकता है। बच्चों की भागीदारी, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और जनजागरूकता जैसे प्रयास इस अभियान को और प्रभावी बनाते हैं। हरेला हमें यह सीख देता है कि प्रकृति के बिना विकास अधूरा है और पर्यावरण की रक्षा ही भविष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा है।
पिछले अभियान बनाम इस वर्ष की तैयारी
इस वर्ष का अभियान पिछले वर्षों की तुलना में अधिक व्यापक और जनसहभागिता आधारित माना जा रहा है।
| पहल | पिछले वर्ष | वर्ष 2026 |
|---|---|---|
| पौधरोपण अभियान | तुंगनाथ से सोमनाथ | राज्यभर में विभिन्न स्थानों पर |
| मुख्य उद्देश्य | पौधरोपण | पौधरोपण + जनजागरूकता |
| सांस्कृतिक कार्यक्रम | सीमित | व्यापक स्तर पर |
| सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी | कम | अधिक |
| बच्चों की सहभागिता | सीमित | विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां |
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FAQs
Q1. हरेला पर्व क्या है?
हरेला उत्तराखंड का पारंपरिक पर्व है, जो प्रकृति, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।
Q2. इस वर्ष हरेला पर कौन-कौन से कार्यक्रम होंगे?
रुद्राक्ष पौधरोपण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगोष्ठियां और राज्यभर में वृक्षारोपण अभियान आयोजित किए जाएंगे।
Q3. सुमन पर्व यात्रा का उद्देश्य क्या है?
इस यात्रा का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक जागरूकता और पौधरोपण को बढ़ावा देना है।
Q4. बच्चों की भूमिका इस अभियान में क्यों महत्वपूर्ण है?
बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश समाज तक पहुंचाएंगे।
Q5. हरेला पर्व का सबसे बड़ा संदेश क्या है?
प्रकृति की रक्षा, अधिक से अधिक पौधरोपण और पर्यावरण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी निभाना।

