Indore News: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब जिले के महू (Mhow) तहसील से डराने वाली खबर सामने आ रही है। महू के कई इलाकों में पिछले 15 दिनों से नलों में गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है, जिसे पीकर अब तक 2 दर्जन (करीब 25) लोग बीमार हो चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या बच्चों की है, जो पीलिया और टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं।
कई अस्पताल में भर्ती बीमार बच्चें
महू के पत्ती बाजार, मोती महल और चंदर मार्ग इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों से नलों से मटमैला और दुर्गंधयुक्त पानी आ रहा है। इस दूषित पानी के सेवन से अब तक 19 बच्चों सहित करीब 25 लोग बीमार पड़ चुके हैं।
बीमार बच्चों में से कई को रेडक्रॉस अस्पताल और मध्य भारत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। परिजनों का कहना है कि पानी को उबालने के बाद भी उसमें नीचे गाद (sediment) जम रही है। बीमारी का आलम यह है कि कई छात्र अपनी प्री-बोर्ड परीक्षाएं तक नहीं दे पा रहे हैं।
प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा गुरुवार देर रात खुद महू पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों का हाल जाना और प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को घर-घर जाकर सर्वे करने और बीमारों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- डोर-टू-डोर सर्वे: स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में जाकर हर परिवार की स्क्रीनिंग कर रही हैं।
- सैंपल जांच: पानी के सैंपल लिए गए हैं ताकि प्रदूषण के सटीक कारण का पता लगाया जा सके।
- वैकल्पिक व्यवस्था: प्रभावित इलाकों में टैंकरों के जरिए साफ पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है।
क्यों फैल रही है बीमारी?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पेयजल की पाइपलाइनें नालियों के बीच से गुजर रही हैं। कई जगहों पर पाइपलाइन में लीकेज है, जिससे सीवर का गंदा पानी पीने के पानी में मिल रहा है। महू छावनी परिषद (Cantonment Board) की लापरवाही को लेकर जनता में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को नहीं बदला गया।
इंदौर की घटना से सहमे लोग
हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग अस्पताल पहुंचे थे। उस घटना के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि महू में वैसी ही स्थिति बनती देख लोग डरे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ई-कोलाई बैक्टीरिया और गंदे पानी की वजह से पीलिया (Jaundice) और गैस्ट्रोएंटेराइटिस का खतरा बढ़ गया है।
बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की सलाह
डॉक्टरों ने क्षेत्र के लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
- पानी को हमेशा उबालकर ही पिएं।
- नल के पानी का सीधे उपयोग करने से बचें।
- यदि बुखार, उल्टी या आंखों में पीलापन दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- खुले में रखे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
महू में दूषित पानी का संकट एक बार फिर शहरी बुनियादी ढांचे और स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। यदि समय रहते पाइपलाइनों की मरम्मत नहीं की गई, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
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