‘बाहुबली’ एलवीएम3-एम5 रॉकेट
उपग्रह को एलवीएम3-एम5 रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसे इसकी भारी भारोत्तोलन क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ कहा जाता है। यह 43.5 मीटर लंबा रॉकेट 4,000 किलोग्राम तक भारी पेलोड को GTO में ले जाने में सक्षम है।
प्रक्षेपण का समय और तैयारी
इसरो ने बताया कि प्रक्षेपण यान को पूरी तरह तैयार कर अंतरिक्ष यान के साथ एकीकृत कर दिया गया है। यह रॉकेट रविवार को शाम 5:26 बजे प्रक्षेपित होगा। इसरो का यह पांचवा अभियानगत उड़ान होगी।
ISRO ने श्रीहरिकोटा से CMS-03 सैटेलाइट प्रक्षेपण के लिए ‘बाहुबली’ रॉकेट का काउंटडाउन शुरू कर दिया। 4410 KG का यह सबसे भारी सैटेलाइट होगा।#isro #cms03 #baahubalirocket #satellitelaunch #spacemission #lvm3m5 #indianspaceresearch #shriharikota #isrolaunch2025 #heavysatellite pic.twitter.com/9dZiGGCkhc
— HNN24X7 (@HNN24X7) November 2, 2025
रॉकेट की तकनीकी विशेषताएं
एलवीएम3-एम5 तीन चरणों वाला प्रक्षेपण यान है जिसमें दो ठोस मोटर (एस200), एक द्रव प्रणोदक कोर चरण (एल110) और एक क्रायोजेनिक चरण (सी25) शामिल हैं। यह रॉकेट 4,000 किलोग्राम तक वजन वाले संचार उपग्रह को जीटीओ में स्थापित करने में सक्षम है।
सीएमएस-03 उपग्रह का उद्देश्य
इसरो के अनुसार, सीएमएस-03 बहु-बैंड संचार सेवाएं प्रदान करेगा और भारतीय भूभाग सहित समुद्री क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा। हालांकि कुछ रिपोर्ट में इसे सैन्य निगरानी के लिए भी इस्तेमाल बताया गया है, इसरो ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
इसरो का पिछला अनुभव
इसरो ने इससे पहले 2018 में अपने सबसे भारी संचार उपग्रह जीसैट-11 (5,854 किलोग्राम) को फ्रेंच गुयाना से प्रक्षेपित किया था। एलवीएम3-एम5 ने पहले चंद्रयान-3 को भी सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था।
प्रक्षेपण की क्षमता
एलवीएम3 यान अपने शक्तिशाली क्रायोजेनिक चरण के साथ 4,000 किलोग्राम पेलोड GTO और 8,000 किलोग्राम पेलोड पृथ्वी की निचली कक्षा तक ले जाने में सक्षम है। इस प्रक्षेपण से भारत की संचार क्षमताओं में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।

