गांधी-शास्त्री जयंती पर देशभर में गूंजा श्रद्धा और संकल्प का संदेश, राष्ट्रपति मुर्मू से PM मोदी तक ने दी श्रद्धांजलि

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर देश ने दोनों महान विभूतियों को किया नमन, राजघाट और विजय घाट पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

नई दिल्ली: देश आज 2 अक्टूबर को दो महान राष्ट्रनायकों—महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री—की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। राजधानी दिल्ली से लेकर राज्यों के अलग-अलग हिस्सों तक नेताओं, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने दोनों महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों एवं आदर्शों को याद किया।

महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। प्रधानमंत्री ने वहां आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना में भी हिस्सा लिया। इस दौरान गांधीजी के सत्य, अहिंसा, शांति और मानवता के संदेश को याद किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजय घाट पहुंचकर देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रपति मुर्मू ने गांधीजी के शांति और अहिंसा के संदेश को किया याद

गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों की प्रासंगिकता पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों के बीच गांधीजी का शांति और अहिंसा का संदेश पहले से भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

राष्ट्रपति ने देशवासियों से गांधीजी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में सहानुभूति, समावेशिता और सभी वर्गों के कल्याण को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने गांधीजी के ‘सर्वोदय’ के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास का वास्तविक उद्देश्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कल्याण और उत्थान सुनिश्चित करना है। उन्होंने गांधी जयंती के अवसर पर देशवासियों से नैतिक आचरण, जिम्मेदारी और सक्रिय भागीदारी के माध्यम से मजबूत, विकसित और आत्मनिर्भर भारत बनाने के संकल्प को दोहराने की अपील की।

राजघाट पर PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि, सर्वधर्म प्रार्थना में हुए शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन भी किया गया। गांधीजी की जयंती पर देशभर में उनके जीवन, संघर्ष और विचारों को याद किया जा रहा है।

महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सत्य और अहिंसा को अपना प्रमुख हथियार बनाया। उन्होंने देशवासियों को एकजुट करते हुए स्वदेशी, आत्मनिर्भरता, सामाजिक समानता और स्वच्छता जैसे विषयों को भी जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया। यही वजह है कि गांधी जयंती आज केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि उनके विचारों को दोहराने और अपने जीवन में उतारने का अवसर भी मानी जाती है।

विजय घाट पहुंचकर शास्त्रीजी को भी PM मोदी ने किया नमन

गांधीजी के साथ ही देश आज पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती भी मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजय घाट पहुंचकर शास्त्रीजी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1964 से 1966 तक देश के प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए पहचाने जाने वाले शास्त्रीजी ने देश के सामने कई चुनौतियों के बीच नेतृत्व किया।

उनका प्रसिद्ध नारा ‘जय जवान, जय किसान’ आज भी देश के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में विशेष महत्व रखता है। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनके नेतृत्व और देश के किसानों तथा जवानों के मनोबल को बढ़ाने के प्रयासों को विशेष रूप से याद किया जाता है। कृषि उत्पादन बढ़ाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने पर भी उन्होंने जोर दिया।

उपराष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

गांधी और शास्त्री जयंती के अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू समेत कई गणमान्य लोगों ने दोनों महान नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की।

देश के विभिन्न राज्यों में भी गांधी जयंती और शास्त्री जयंती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। राजस्थान की राजधानी जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान सचिवालय में महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी।

गुरुग्राम में स्वच्छता अभियान, विजयवाड़ा में ‘स्वच्छथॉन 2026’

गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छता को लेकर भी देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। हरियाणा के गुरुग्राम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वच्छ भारत अभियान में हिस्सा लिया। उन्होंने लोगों से अपने आसपास के क्षेत्रों को साफ-सुथरा रखने और स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

वहीं आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत गांधी जयंती के मौके पर ‘स्वच्छथॉन 2026’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस तरह गांधीजी के स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े संदेश को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।

31 अक्टूबर तक चलेगा देशव्यापी 30 दिवसीय स्वच्छता अभियान

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने गांधी जयंती से लेकर 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती तक करीब 30 दिनों तक देशव्यापी स्वच्छता अभियान चलाने का आह्वान किया है।

रेड्डी ने नागरिकों के साथ-साथ सरकारी और निजी संस्थानों, शिक्षण संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों और अन्य संगठनों से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती से लेकर सरदार पटेल की जयंती तक देशभर में स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस भी

महात्मा गांधी की विचारधारा का प्रभाव भारत तक सीमित नहीं रहा। उनके अहिंसा और शांति के संदेश को वैश्विक स्तर पर सम्मान मिला है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2 अक्टूबर को ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में अहिंसा, शांति और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के महत्व पर चर्चा की जाती है।

गांधीजी का जीवन सत्य, अहिंसा, आत्मअनुशासन और सामाजिक समानता जैसे मूल्यों के लिए समर्पित रहा। उनकी विचारधारा ने दुनिया के कई नेताओं और सामाजिक आंदोलनों को प्रभावित किया।

दो महान नेताओं की जयंती, एक साझा संदेश—राष्ट्रहित सर्वोपरि

2 अक्टूबर का दिन भारत के लिए इसलिए भी विशेष है क्योंकि इसी दिन देश दो ऐसे महान नेताओं को याद करता है, जिन्होंने अलग-अलग परिस्थितियों में राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा, वहीं लाल बहादुर शास्त्री ने सादगी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ देश का नेतृत्व किया।

गांधीजी का सत्य और अहिंसा तथा शास्त्रीजी का ‘जय जवान, जय किसान’ का संदेश आज भी भारतीय जनमानस में गहराई से जुड़ा हुआ है। दोनों नेताओं का जीवन इस बात की प्रेरणा देता है कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी से संभव होता है।

गांधी जयंती और शास्त्री जयंती के इस अवसर पर देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रमों के साथ स्वच्छता अभियान, प्रार्थना सभाएं और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यह दिन देशवासियों को अपने इतिहास के दो महान अध्यायों को याद करने के साथ-साथ उनके आदर्शों को वर्तमान समय में अपनाने का अवसर भी देता है।

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