प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यूपीएससी की 100 साल की यात्रा में पीढ़ियां, सरकारें, तकनीक और सिलेबस बदले हैं, लेकिन इस संस्था पर भरोसा पहले जैसा ही अटूट बना हुआ है। आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में संघ लोक सेवा आयोग-यूपीएससी के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए, श्री मोदी ने ऐसे युवाओं को लोक सेवा में लाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जो सरकारी पद के लिए नहीं, बल्कि जनसेवा के लिए प्रेरित हों। उन्होंने कहा कि आज 21वीं सदी का भारत एक नई कार्य-संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है और इसका मूल सिद्धांत है – जन-हितैषी, सक्रिय और सुशासन।
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यूपीएससी ने पिछले बारह वर्षों में कई उपलब्धियां हासिल की हैं और कई नए आयाम जोड़े हैं। उन्होंने कहा कि यूपीएससी के ज़रिए होने वाली सरकारी नियुक्तियों की संख्या बढ़ी है और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता भी आई है, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ा है। डॉ. सिंह ने बताया कि एनडीए के 12 साल के कार्यकाल में यूपीएससी के ज़रिए लगभग 65 हज़ार नियुक्तियां की गईं, जबकि यूपीए के 10 साल के कार्यकाल में यह संख्या लगभग 45 हज़ार थी। उन्होंने कहा कि आज यूपीएससी देश और दुनिया भर की भर्ती एजेंसियों के लिए एक रोल मॉडल बन गया है।
यह कार्यक्रम साल भर चलने वाले उन समारोहों का समापन है जो पिछले साल पहली अक्टूबर को शुरू हुए थे और 1926 में यूपीएससी की स्थापना के 100 साल पूरे होने का जश्न मना रहे थे। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने यूपीएससी का शताब्दी स्मारक सिक्का, एक स्मारक डाक टिकट और ‘100 लैंडमार्क जजमेंट्स – शेपिंग द पॉलिसीज़ ऑफ़ यूपीएससी एंड पब्लिक सर्विस कमीशंस इन इंडिया’ नामक एक पुस्तक जारी की।

