प्रदेश में बढ़े कोरोना के मामलों से राजनीतिक गतिविधियों पर उठे सवाल

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव जल्द होने वाले है जिसको देख तमाम राजनीतिक दल पूरे जोरों- शोरों के साथ चुनाव में विजय प्राप्ति के लिए तैयारियां कर रहे है। चुनाव में जीत की तैयारियों के लिए सभी पार्टियों द्वारा राज्य के भ्रमण किए जा रहे है, और साथ- साथ जनसभाओं से लेकर रैलियों तक के कार्यक्रम किए जा रहे है।

दूसरी ओर कोरोना वायरस की गति भी प्रदेशभर में तेज हो गई है, और नेताओं की रैलियों से लेकर जनसभा तक करने को लेकर संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ता जा रहा है, क्योंकि रैलियों व जनसभाओं में उमड़ रही भीड़ के बीच कोरोना संक्रमण को ओर ज्यादा गति मिल रही है, न ही जनसभा के जरिए मास्क का उपयोग किया जा रहा है, और न ही उचित दूरी का पालन किया जा रहा।

फिलहाल राज्य के बाहर से आने पर आरटीपीसीआर टेस्ट की अनिवार्यता नहीं की जा रखी, जिस वजह से किसी को भी रोकने पर प्रतिबंध नहीं है, वहीं सावधानी बरतने के लिए हवाई अड्डों पर वीआइपी लोगों की रैपिड जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम है, लेकिन नेताओं के समर्थन से रैपिड टेस्ट नहीं कराए जा रहे है।

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बाहर से आने वाले नेता भी कोरोना से बचाव के लिए गाइडलाइन का पालन करते नजर नहीं आ रहे, इस स्थिति को देखते हुए कोरोना और अधिक चिंताजनक बनता जा रहा है, इसको जल्द से रोकने की जरुरत है।

सिमरन बिंजोला

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