RSS centenary celebrations

RSS centenary celebrations: RSS ने 39 देशों में कैसे कायम किया अपना वर्चस्व ?

RSS centenary celebrations: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दिल्ली के अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में एक भव्य समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया, साथ ही उपस्थित लोगों को संबोधित भी किया। 27 सितंबर 1925 को स्थापित आरएसएस अपनी शताब्दी वर्षगांठ को विजयदशमी 2026 तक मना रहा है। इस एक सदी की यात्रा न केवल अद्भुत और अभूतपूर्व है, बल्कि प्रेरक भी है। आज आरएसएस का प्रभाव न केवल भारत में, बल्कि विश्व के 39 देशों में फैल चुका है, जहां यह हिंदू स्वयंसेवक संघ (एचएसएस) के नाम से जाना जाता है।

 

RSS centenary celebrations
डाक टिकट एवं सिक्के का लोकार्पण (फोटो सभार-सोशल मीडिया)

 

वैश्विक स्तर पर विस्तार

 

आरएसएस ने अपनी विचारधारा और संगठनात्मक ताकत को वैश्विक मंच पर ले जाने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। हिंदू स्वयंसेवक संघ (एचएसएस) के रूप में यह संगठन 39 देशों में अपनी शाखाएं संचालित कर रहा है। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, नेपाल, मॉरिशस और मध्य पूर्व के पांच देश शामिल हैं। खास बात यह है कि मध्य पूर्व के कुछ देशों में जहां खुले तौर पर शाखाएं संचालित करने की अनुमति नहीं है, वहां स्वयंसेवक घरों में एकत्र होकर संगठन के कार्यों को आगे बढ़ाते हैं। इसके अलावा, फिनलैंड में एक अनूठी पहल के तहत ई-शाखाएं संचालित की जाती हैं, जहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 20 देशों के स्वयंसेवक एक साथ जुड़ते हैं।

 

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नेपाल में भारत के बाद सबसे ज्यादा शाखाएं संचालित होती हैं, जबकि अमेरिका में 146 स्थानों पर और ब्रिटेन में 84 स्थानों पर शाखाएं लगती हैं। अमेरिका में ये शाखाएं सप्ताह में एक बार और ब्रिटेन में सप्ताह में दो बार आयोजित होती हैं। पिछले 25 सालों में अमेरिका में एचएसएस की शाखाओं का नेटवर्क तेजी से विस्तारित हुआ है, जो संगठन की वैश्विक को दर्शाता है।

 

रमेश सुब्रमण्यम की अहम भूमिका

 

हिंदू स्वयंसेवक संघ की वैश्विक शाखाओं का संचालन रमेश सुब्रमण्यम के कुशल नेतृत्व में हो रहा है। उन्होंने 1996 से 2004 तक मॉरिशस में शाखाओं को स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्तमान में, वे ‘सेवा’ नामक संस्था के अध्यक्ष हैं, जो आरएसएस के कार्यक्रमों के लिए धन जुटाने का कार्य करती है। रमेश के अनुसार, एचएसएस विदेशों में चिन्मय मिशन, रामकृष्ण मिशन जैसे अन्य हिंदू संगठनों के साथ मिलकर काम करता है, जिससे हिंदू संस्कृति और मूल्यों का प्रचार-प्रसार और सशक्त होता है।

 

सामाजिक योगदान और प्रभाव

 

RSS centenary celebrations
RSS (फोटो सभार-सोशल मीडिया)

 

पिछले 100 सालों में आरएसएस ने भारत और विदेशों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप और चक्रवात के दौरान आरएसएस के स्वयंसेवकों ने राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई है। संगठन के सहयोगी संस्थानों ने युवाओं, महिलाओं और किसानों को सशक्त बनाने, सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने और स्थानीय समुदायों को मजबूत करने में अहम योगदान दिया है।

 

वैचारिक और सांस्कृतिक प्रभाव

 

आरएसएस की वैश्विक उपस्थिति केवल शाखाओं तक सीमित नहीं है; यह हिंदू संस्कृति, मूल्यों और एकता के प्रचार का एक मंच बन चुका है। संगठन ने विदेशों में बसे भारतीय समुदायों को एकजुट करने और उनकी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा, आरएसएस ने कई देशों में हिंदू समुदायों के बीच सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर उनकी एकता और संगठनात्मक शक्ति को मजबूत किया है।

 

भविष्य में संघ का लक्ष्य

 

शताब्दी समारोह के अवसर पर आरएसएस ने अपने भविष्य के लक्ष्यों को रेखांकित किया है। संगठन का उद्देश्य अपनी वैश्विक उपस्थिति को और मजबूत करना, सामाजिक सेवा के क्षेत्र में और अहम योगदान देना और हिंदू संस्कृति को विश्व स्तर पर फैलाना है। आरएसएस का यह वैश्विक विस्तार न केवल संगठन की ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक विचारधारा और समर्पण विश्व स्तर पर अपना प्रभाव डाल सकता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा भारतीय इतिहास और वैश्विक मंच पर एक मील का पत्थर है। 39 देशों में फैली इसकी शाखाएं, सामाजिक कार्यों में योगदान और हिंदू संस्कृति के प्रचार-प्रसार ने इसे विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली संगठन बनाया है। जैसे-जैसे आरएसएस अपने शताब्दी वर्ष में आगे बढ़ रहा है, इसका प्रभाव और विस्तार भविष्य में और भी गहरा होने की संभावना है।

 

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