NCERT : NCERT की कक्षा 8 की किताब पर सुप्रीम कोर्ट का ‘ब्लैंकेट बैन’

NCERT : नई दिल्ली, 26 फरवरी 2026: एक नई क्लास 8 सोशल साइंस किताब में ज्यूडिशियरी (न्यायपालिका) में भ्रष्टाचार का जिक्र करने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया और NCERT पर सख्ती दिखाई। इसके जवाब में NCERT ने बुधवार देर शाम प्रेस रिलीज जारी कर किताब की डिस्ट्रीब्यूशन पर सख्त रोक लगा दी। NCERT ने इसे ‘एरर ऑफ जजमेंट’ (निर्णय की गलती) बताया और माफी मांगी। केंद्र सरकार ने भी कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी।

किताब का नाम और विवादित अध्याय क्या है?

किताब का नाम है Exploring Society: India and Beyond, Volume II (क्लास 8 सोशल साइंस, पार्ट 2)। यह 24 फरवरी 2026 को जारी हुई थी।

चैप्टर नंबर 4 का शीर्षक है – ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’
इसमें लिखा था कि न्यायपालिका की चुनौतियों में ‘विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार’, लंबित केसों का ढेर (81,000 सुप्रीम कोर्ट में, 62 लाख हाईकोर्ट में, 4.7 करोड़ जिला अदालतों में), जजों की कमी और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है। छात्रों को बताया गया कि जजों पर कोड ऑफ कंडक्ट लागू है, लेकिन फिर भी शिकायतें आती हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लिया कड़ा संज्ञान?

25 फरवरी को इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्या कांत की बेंच ने स्वतः संज्ञान लिया। CJI ने कहा,’कोई भी संस्था को बदनाम नहीं कर सकता। यह गणना की गई साजिश लगती है। अगर बच्चों को पढ़ाया जाएगा कि ज्यूडिशियरी भ्रष्ट है, तो क्या मैसेज जाएगा?’


कोर्ट ने इसे ‘डीप रूटेड कॉन्स्पिरेसी’ कहा और ‘हेड्स मस्ट रोल’ (जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए) की बात कही। 26 फरवरी को कोर्ट ने पूरी किताब पर ब्लैंकेट बैन लगा दिया – प्रिंटिंग, रीप्रिंटिंग, डिजिटल शेयरिंग सब बंद। सभी फिजिकल और डिजिटल कॉपी जब्त करने के आदेश दिए। NCERT डायरेक्टर और स्कूल एजुकेशन सेक्रेटरी को शो-कॉज नोटिस भी जारी किया।

NCERT का बयान और माफी

‘किताब जारी होने के बाद पाया गया कि चैप्टर 4 में अनजाने में अनुचित सामग्री और निर्णय की त्रुटि आ गई। यह पूरी तरह अनइंटेंशनल (अनजाने में) है। हम न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान देते हैं – यह संविधान का रक्षक और मौलिक अधिकारों का संरक्षक है।’

NCERT ने माफी मांगी और कहा – डिस्ट्रीब्यूशन पर सख्त रोक लगा दी गई है। मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन के निर्देश पर भी यही किया गया। विवादित चैप्टर को विशेषज्ञों से सलाह लेकर फिर से लिखा जाएगा और 2026-27 सेशन से पहले नई किताब जारी की जाएगी।

अब आगे क्या होगा?

किताब की सभी कॉपियां बाजार और स्कूलों से हटाई जाएंगी।
डिजिटल वर्जन भी डिलीट कर दिया जाएगा।
नई किताब में न्यायपालिका की सकारात्मक भूमिका पर फोकस होगा।
कोर्ट ने गहरी जांच के आदेश दिए हैं – कौन जिम्मेदार है, यह पता चलेगा।
यह मामला शिक्षा में संवेदनशील विषयों को कैसे सिखाया जाए, इस पर बड़ी बहस छेड़ रहा है।

यह विवाद दिखाता है कि स्कूली किताबों में संस्थाओं के बारे में क्या लिखा जाए, यह कितना संवेदनशील है। NCERT जैसी संस्था से उम्मीद की जाती है कि वह निष्पक्ष और सकारात्मक शिक्षा दे। छात्रों को सच्चाई बतानी जरूरी है, लेकिन उम्र के हिसाब से तरीका सही होना चाहिए।

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