Supreme Court on Street Dogs

Supreme Court on Street Dogs : आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर SC सख्त, 3 नवंबर को जवाबदेही तय करने के आदेश

Supreme Court on Street Dogs : आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पूरे देश में चिंता का विषय बन गई है। दिल्ली से लेकर छोटे शहरों तक, ये कुत्ते लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और राज्यों को सख्त निर्देश दे रहा है।

dehradun : तीन नवंबर को सुबह 11 बजे विधानसभा के विशेष सत्र में होगा राष्ट्रपति का संबोधन

कोर्ट का सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट ने 3 नवंबर तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोई वर्चुअल पेशी की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव खुद आकर बताएं कि उनके राज्य में क्या कदम उठाए जा रहे हैं। यह आदेश 27 अक्टूबर की सुनवाई में दिया गया, जब ज्यादातर राज्यों ने कोर्ट के पिछले निर्देशों का पालन नहीं किया।

Supreme Court on Street Dogs
Supreme Court on Street Dogs

सॉलिसिटर जनरल की अपील खारिज

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य सचिवों को राहत देने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हो सकते हैं, क्योंकि व्यक्तिगत रूप से आना मुश्किल है। लेकिन जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने यह अपील ठुकरा दी। कोर्ट ने कहा, नहीं, उन्हें खुद आना होगा। वे अदालती आदेशों पर सो रहे हैं। कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।

https://youtu.be/svaa_kjZ2x8?si=xsJK_byNSlFHIhQJ

क्यों बुलाए गए मुख्य सचिव?

कोर्ट ने गुस्सा जताया कि राज्यों को 22 अगस्त को आदेश दिया गया था, लेकिन ज्यादातर ने अनुपालन हलफनामा दाखिल नहीं किया। केवल पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को तलब किया गया। हलफनामे में बताना था कि कुत्तों के लिए बाड़े, डॉक्टर, पकड़ने वाले कर्मचारी और विशेष वाहन कितने हैं। कोर्ट ने कहा, ‘अदालत के आदेशों का सम्मान नहीं हो रहा। चुप्पी साधकर बैठे हैं। अब खुद आकर जवाब दें।’

समस्या की जड़ क्या है?

यह मामला दिल्ली में शुरू हुआ। 28 जुलाई को एक मीडिया रिपोर्ट आई कि आवारा कुत्तों के काटने से बच्चे रेबीज का शिकार हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और पूरे देश में फैला दिया। अब सभी राज्य पक्षकार हैं। पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियमों का पालन हर जगह एक समान होना चाहिए। इन नियमों में कुत्तों को पकड़कर नसबंदी करना, टीका लगाना और छोड़ना शामिल है। लेकिन संसाधनों की कमी से यह काम नहीं हो पा रहा।

राज्यों की जिम्मेदारी

कोर्ट ने नगर निगमों को निर्देश दिया कि वे संसाधनों की पूरी जानकारी दें। कितने बाड़े हैं, कितने पशु चिकित्सक, कितने कर्मचारी और कितने संशोधित वाहन-पिंजरे। यह सब हलफनामे में लिखना था। लेकिन राज्यों ने लापरवाही दिखाई। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अब कोई बहाना नहीं चलेगा। मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को अदालत में हाजिर होकर सबूत देना होगा।

सुप्रीम कोर्ट इस मामले में लगातार सख्ती दिखा रहा है। अगर मुख्य सचिव नहीं आए या जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो कार्रवाई हो सकती है। यह कदम राज्यों को जगाने के लिए है। आवारा कुत्तों की समस्या सिर्फ कुत्तों की नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की है। रेबीज जैसी बीमारियां जान ले लेती हैं। उम्मीद है कि इस सुनवाई से ठोस कदम उठेंगे।

More From Author

dehradun : तीन नवंबर को सुबह 11 बजे विधानसभा के विशेष सत्र में होगा राष्ट्रपति का संबोधन

dehradun : नई टीम के साथ एक्टिव मोड़ में भाजपा, मिशन 2027