UGC Protest

UGC Protest: UGC के नए नियमों पर बवाल, लखनऊ में BJP के 11 पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा

UGC Protest: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर विवाद तेज हो गया है। इस विवाद के चलते भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 11 पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। साथ ही, आज 27 जनवरी को बड़ी संख्या में छात्र दिल्ली स्थित UGC मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

UGC ने ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ के तहत कुछ नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव को रोकना और सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान करना है। इसके तहत, हर उच्च शिक्षा संस्थान को ‘Equal Opportunity Centre’ बनाना होगा और भेदभाव से संबंधित शिकायतों के लिए समितियां गठित करनी होंगी। नियमों का पालन न करने वालों पर जुर्माना या कार्रवाई भी की जा सकती है।

बीजेपी के पदाधिकारियों ने क्यों दिया इस्तीफा?

इस्तीफा देने वाले नेताओं का कहना है कि UGC के नए नियम सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। कुम्हरवां मंडल महामंत्री आलोक तिवारी ने कहा कि इस कानून को लागू करने से सवर्ण समाज के बच्चों को नुकसान हो रहा है और यह उनके लिए अन्यायपूर्ण है।

इस्तीफा देने वाले प्रमुख नाम

सामूहिक इस्तीफा देने वालों में अंकित तिवारी (मंडल महामंत्री), महावीर सिंह (मंडल मंत्री), आलोक सिंह (उपाध्यक्ष), अनूप सिंह (युवा मोर्चा अध्यक्ष) समेत शक्ति केंद्र संयोजक और बूथ अध्यक्ष शामिल हैं। इन सभी ने घोषणा की है कि वे अब बीजेपी के किसी भी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे।

विरोध की आग पूरे यूपी में फैली

UGC के इन नियमों का विरोध सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं है:

  • नोएडा: बीजेपी युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष राजू पंडित ने नियमों को ‘काला कानून’ बताते हुए पद छोड़ दिया है।
  • बरेली: सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
  • दिल्ली: आज, 27 जनवरी को बड़ी संख्या में छात्र दिल्ली स्थित UGC मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं।

विरोध क्यों हो रहा है?

  • अस्पष्ट नियम: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नियम स्पष्ट नहीं हैं और इनका दुरुपयोग हो सकता है।
  • अधिकारों का डर: आलोचकों का मानना है कि समितियों को बहुत ज्यादा ताकत दे दी गई है, जिससे झूठे आरोपों का खतरा बढ़ सकता है।
  • सवर्ण हितों की चिंता: इस्तीफा देने वाले नेताओं का कहना है कि यह कानून खास तौर पर सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ है।

भाजपा नेतृत्व की प्रतिक्रिया

इस्तीफों की खबर पर जिला अध्यक्ष विजय मौर्य का कहना है कि उन्हें सोशल मीडिया के जरिए जानकारी मिली है, लेकिन अभी तक लिखित पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। बहरहाल, चुनाव से पहले इतने पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा बीजेपी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है।

Read more:- UGC’s New Directive : क्या बदल जाएगा आपकी यूनिवर्सिटी का माहौल?

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