“खूबसूरत घाटियों में समां गईं चीखें, पल भर में ओझल हुईं कई जिंदगियां”…..उत्तरकाशी हादसे में राहत-बचाव कार्य जारी

उत्तरकाशी हादसे में राहत-बचाव कार्य जारी

 

उत्तरकाशी के धराली में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। रेस्क्यू टीमों द्वारा आपदा स्थल से 135 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया है, धराली के पास(गंगोत्री की तरफ) से लगभग 100 लोग तथा हर्षिल आर्मी गेट से नीचे की तरफ 35 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। वहीं गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भटवड़ी चढ़ेती के पास 60 मीटर सड़क वॉस आऊट हो रखी है, इसके साथ ही गंगनानी के आगे एक पुल भी वॉश आउट हो गया। लिहाजा इस कारण अतिरिक्त फोर्स राहत-बचाव कार्य के लिए आगे नहीं बढ़ पा रही है।

 

देर शाम तक चलता रहा राहत-बचाव कार्य

 

हालांकि उत्तरकाशी प्रशासन ने रेस्क्यू को कल सांय से जारी रखा, जिसमें रेस्क्यू टीम में SDRF, NDRF, मिलिट्री फोर्स और उत्तरकाशी पुलिस रेस्क्यू में जुटी हुई हैं। केंद्र सरकार व राज्य सरकार युद्ध स्तर तक कार्य करती भी दिख रही हैं। लगातार हो रही वर्षा से गंगोत्री नेशनल हाईवे भटवाड़ी के पास बंद हैं, जिसमे जवानों को रेस्क्यू की जगह पर पहुंचने में समय लग रहा है। फिलहाल हवाई सेवा के द्वारा भी अब रेस्क्यू ऑपरेशन शुरु किया गया है, स्थानीय निवासियों जिन्होंने कल धराली, हर्षिल और अवाना वाला मंजर अपने आखों से देखा, वे सभी लोग ये मंजर देख कर स्तब्ध हो गए। वहां के एक निवासी का कहना है कि ऐसा दृश्य 5 अगस्त 1978 में कंजोड़िया नामक जगह में देखने को मिला, वहीं मंजर आज 47 साल बाद 5 अगस्त 2025 को धराली गांव में देखने को मिला। इस हादसे में न जाने कितने होटल व घर बह गए हैं, वहीं अभी तक 5 शवों की प्राप्ति हो चुकी हैं। वहीं 50 से ऊपर लोग अब भी लापता चल रहे हैं, हादसे की विभिषिका की कल्पना करना भी साधारण इंलान की रुह कंपा देती है।

 

 

 

 

लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

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