देहरादून, जो कभी गन्ना, धान की खेती और लीची-आम के बाग-बगीचों से महकता था, आज अनियोजित विकास और तेजी से बढ़ती कंक्रीट की इमारतों की चपेट में आ चुका है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) के मास्टर प्लान के अनुसार शहर में हरित क्षेत्र का आंकड़ा घटकर केवल 5.98 प्रतिशत रह गया है, जबकि शहरी नियोजन मानकों के मुताबिक यह कम से कम 18 प्रतिशत होना चाहिए। स्थिति इतनी गंभीर है कि पार्क, बाग-बगीचे और खुले मैदान महज 1-2 प्रतिशत तक सिमट गए हैं। पहले जहां 40 प्रतिशत भूमि कृषि के लिए सुरक्षित थी, अब वह घटकर सिर्फ 10 प्रतिशत रह गई है। कभी बासमती की खुशबू और लीची के बागानों की छांव से पहचाने जाने वाला दून शहर अब कंक्रीट के जंगल में बदलता जा रहा है।
देहरादून की हरियाली घटकर 5.98% पर सिमटी
एमडीडीए की प्रस्तावित महायोजना-2041 के अनुसार देहरादून के 16,774.75 हेक्टेयर विकसित क्षेत्र में से केवल 1,071.25 हेक्टेयर भूमि को ही हरित क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। इसमें भी अधिकतर हिस्सा केंद्रीय संस्थानों की परिसंपत्तियों में शामिल होने के कारण आम लोगों के लिए उपलब्ध हरियाली बेहद सीमित हो जाती है। नतीजतन, शहरवासियों की सांस लेने की जगह मानी जाने वाली नर्सरी, पार्क और बाग-बगीचों का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है, जिससे दून घाटी की पहचान रही प्राकृतिक खूबसूरती और पारिस्थितिक संतुलन पर गहरी चोट पड़ रही है।
मास्टर प्लान और महायोजना में बाग-बगीचे सिमटे
देहरादून में नए मास्टर प्लान के मुताबिक शहर की जमीन का संतुलन तेजी से बदल रहा है। वर्तमान में आवासीय क्षेत्र के लिए 58.43%, मिश्रित उपयोग (आवासीय + वाणिज्यिक) के लिए 9.33%, वाणिज्यिक के लिए 4.28%, औद्योगिक के लिए 1.07%, सार्वजनिक/सेमी-पब्लिक के लिए 9.42%, परिवहन के लिए 11.15% और पर्यटन के लिए 0.34% भूमि निर्धारित की गई है, जबकि हरित क्षेत्र केवल 5.98% पर सिमट गया है। यह बेहद चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि शहरी नियोजन के मानकों के अनुसार किसी भी शहर में कम से कम 18% हिस्सा हरित क्षेत्र होना चाहिए। एक समय अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बाग-बगीचों और ताजगी भरे वातावरण के लिए पहचान रखने वाला देहरादून अब कंक्रीट के जंगल में तब्दील होता जा रहा है।
अब नगर निगम बढ़ाएगा ग्रीन एरिया
शहर में लगातार घटती हरियाली को देखते हुए अब देहरादून नगर निगम सक्रिय हो गया है। नगर आयुक्त नमामी बंसल के अनुसार, बीते कुछ महीनों में निगम ने 20 हेक्टेयर से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। अब इन खाली पड़ी जमीनों को पार्क और ग्रीन एरिया में बदलने की तैयारी की जा रही है। निगम का मानना है कि यह पहल न केवल दून घाटी की कम होती हरित पट्टी को बचाने में सहायक होगी बल्कि शहर के पर्यावरण संतुलन और नागरिकों के लिए स्वच्छ, हरा-भरा माहौल उपलब्ध कराने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

