नीलगिरी में 10 दिन में तीन हाथियों की मौत, पानी की कमी को कारण मानने से वन विभाग का इनकार

नीलगिरी: तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में गए 10 दिनों में तीन हाथियों की मौत ने जंगली जानवर प्रेमियों और पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ा दी है। ये मौतें मुदुमलाई टाइगर रिजर्व के बाहरी हिस्से में हुई हैं।

शुरुआत में बारिश कम होने और पानी के स्रोत सूख जाने के बारे में चिंता जताई गई थी। लेकिन हाथियों की मौत को बस पानी की कमी के रूप में समझा जा रहा है, जो सही नहीं है। वन विभाग इन मौतों के वास्तविक कारणों की जांच कर रहा है। इसके लिए पोस्टमार्टम और अन्य चिकित्सा परीक्षण किए जा रहे हैं।

हाल की रिपोर्ट में एक हाथी के शरीर पर पैर की चोट के अलावा पेट और कंधे के हिस्से में गंभीर चोट के बारे में बताया गया है। इससे यह भी जांच में शामिल है कि हाथियों के बीच संघर्ष या अन्य चोटें हो सकती हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञ कहते हैं कि हाथियों की लगातार मौतों के कई कारण हो सकते हैं। नीलगिरी क्षेत्र में हाथियों के आवास मानवीय गतिविधियों, सड़कों, बिजली के ढांचे और आवास के विस्तार के कारण दबाव में है। हाल की क्षेत्रीय योजना में हाथी की मौत और मानव-हाथी संघर्ष के मुख्य कारणों में आवास के विखंडन और असुरक्षित बुनियादी ढांचे की बात कही गई है।

तमिलनाडु में 2026 के पहले छह महीनों में 19 हाथियों की मौत हुई थी। इनमें आठ मौतें मुदुमलाई में हुई थीं। वन विभाग के अनुसार अधिकांश मौतें प्राकृतिक कारणों से हुई थीं।

तीन हाथियों की मौत के बाद वन विभाग के सामने चुनौती है कि प्रत्येक मामले की वैज्ञानिक जांच कर वास्तविक कारण सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही हाथियों के प्राकृतिक आवास, जलस्रोतों और सुरक्षित गलियारों की निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

नीलगिरी में तीन हाथियों की मौत: कब और कैसे हुई घटनाएं?

पहली घटना 8 अगस्त 2026 को सिगुर वन क्षेत्र में सामने आई। वहाँ एक लगभग 50 वर्ष की मादा हाथी मृत पाई गई। वन विभाग के शुरुआती आकलन के अनुसार, उसकी मौत का कारण उम्रदराज होना था। घटनास्थल पर ऐसे संकेत भी मिले कि हाथी ढलान पर फिसलकर गिरा हो सकता है, जिससे उसकी मौत हो गई होगी।

इसके बाद, 17 अगस्त को मसिनागुड़ी रेंज के अवरल्ला सेक्शन के कुथिराई पाराई इलाके में एक और मौत हुई। यह हाथी भी लगभग 50 वर्ष की मादा था। उसका शव मोयर नदी से करीब 1.5 किलोमीटर दूर मिला। अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिक जांच में मौत का कारण वृद्धावस्था माना गया है, जो कि हाथी की उम्र से संबंधित समस्याओं के कारण हो सकती है।

तीसरी घटना 18 अगस्त को हुई, जब एक लगभग 30 वर्ष की मादा हाथी मर गई। वन विभाग को संदेह है कि किसी दूसरे हाथी से लड़ाई के दौरान उसके पिछले पैर में चोट लगी थी, जिससे उसकी आवाजाही प्रभावित हुई और उसकी शारीरिक स्थिति बिगड़ सकती थी। उसका शव मरावकंडी जलाशय से करीब 500 मीटर की दूरी पर मिला, जो कि एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।

मसिनागुड़ी में हर साल कितने हाथियों की मौत होती है?

अनुसार, मसिनागुड़ी वन प्रभाग में पिछले सालों में हर साल औसतन 15 से 20 जंगली हाथियों की मौत होती रही है। इसकी वजह प्राकृतिक कारण बताई जा रही है। हाथी बड़े शाकाहारी होते हैं और उन्हें बहुत ज्यादा भोजन और पानी की जरूरत होती है। उनके चलने का क्षेत्र कभी-कभी मौसम, वनस्पति, चारा और पानी की उपलब्धता के हिसाब से बदल जाता है।

इसलिए किसी खास अवधि में बारिश कम होने और उसी दौरान हाथियों की मौत होने के बीच कोई सीधा कारण-परिणाम तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए वैज्ञानिक जांच की जरूरत है।

नीलगिरी में हाथियों के संरक्षण की चुनौती

नीलगिरी दक्षिण भारत में हाथियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण भू-दृश्य है। तमिलनाडु सरकार पहले ही मानव-हाथी संघर्ष को कम करने और हाथियों की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाने के लिए कई उपाय कर रही है। राज्य के वन विभाग की नीति में हाथियों की गतिविधियों की निगरानी के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम और संवेदनशील क्षेत्रों में तकनीकी निगरानी जैसी योजनाओं का उल्लेख है।

लगातार तीन हाथियों की मौत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र हाथियों की बड़ी आबादी वाला इलाका है। हालांकि, उपलब्ध वन विभागीय आकलन के अनुसार इन तीन मामलों में पानी की कमी को प्रत्यक्ष मृत्यु-कारण नहीं माना गया है। आगे की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से प्रत्येक मामले की अंतिम स्थिति औष्ट हो सकती है।

निष्कर्ष

नीलगिरी में तीन हाथियों की मौत ने सूखे और वन्यजीवों के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता जरूर बढ़ाई है, लेकिन वन विभाग के मौजूदा आकलन के मुताबिक तीनों मौतों को पानी की कमी से जोड़ने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं मिला है। पहली दो मौतों में वृद्धावस्था और तीसरी घटना में लड़ाई से लगी चोट को संभावित कारण बताया गया है। साथ ही, दो हाथियों के शव स्थायी जलस्रोतों के पास मिलने से पानी की कमी वाली थ्योरी को और कमजोर आधार मिलता है।

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