उत्तराखंड में अवैध मदरसों पर प्रशासन सख्त….बच्चों की सुरक्षा से हो रहा खिलवाड़

उत्तराखंड में अवैध मदरसों पर प्रशासन सख्त

 

 

उत्तराखंड में अवैध अतिक्रमण को लेकर धामी सरकार की कड़ी कार्रवाई लगातार जारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार प्रशासन लगातार अवैध अतिक्रमणों और कब्जों को मुक्त कराने में जुटी है, जिसके लिए शासन-प्रशासन को कई बार ठोस निर्णयों का भी सहारा लेना पड़ रहा है। उत्तराखंड में अवैध मदरसों के खिलाफ भी उत्तराखंड सरकार का एक्शन लगातार जारी है, इसी क्रम में हरिद्वार जिले में बगैर पंजीकरण के संचालित हो रहे अवैध मदरसों पर प्रशासन ने अपना शिकंजा कसा है। दरअसल, प्रशासन ने हरिद्वार जिले में 12 अवैध रुप से संचालित मदरसों को सील किया है। बीते बुधवार को उप जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में तहसील प्रशासन और पुलिस विभाग में संयुक्त कार्रवाई करते हुए 8 मदरसों को सील कर दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई पर कुछ स्थानियों ने विरोध भी किया परंतु पुलिस प्रशासन की सख्ती के आगे उनका विरोध ज्यादा देर तक टिक न सका। वहीं अवैध मदरसों पर कार्रवाई करते हुए जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह ने बताया कि अब तक हरिद्वार जिले में 79 मदरसे सील किए जा चुके हैं।

 

 

बच्चों की सुरक्षा से हो रहा खिलवाड़

 

 

प्रशासन के अनुसार हरिद्वार जिले में सील किए गए यह मदरसे बिना किसी पंजीकरण और बिना की मान्यता और भूमि उपयोग की अनुमति के अवैध रुप से संचालित किए जा रहे थे। वहीं प्रशासन के अनुसार कुछ मदरसों पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों का तबीयत से उल्लंघन और आवश्यक व्यवस्थाओं की घोर कमी को भी पाया गया। प्रशासन द्वारा सील किए गए मदरसों में ग्राम अम्बुवाला पथरी स्थित मदरसा ईसा अतुल कुरान, ग्राम बादशापुर का मदरसा जामिया फरुकिया, ग्राम पदार्था धनपुरा का मदरसा इस्लामिया अरबिया इसातुल पुरान, ग्राम इब्राहिमपुर का मदरसा इस्लामिया तामिल कुरान, मदरसा दारुल उलूम महमूदिया, ग्राम गुर्जर बस्ती पथरी स्थित मदरसा सकलानिया एवं मदरसा फैज़ ए आम, धनपुरा क्षेत्र का मदरसा गोसिया रहमानिया तालीमुल कुरान शामिल हैं।

 

 

उपजिलाधिकारी जितेन्द्र कुमार ने बताया कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। अवैध रूप से संचालित किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। अवैध रूप से संचालित ऐसे संस्थानों की जांच के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वह अपने बच्चों को केवल मान्यता प्राप्त और नियमानुसार संचालित संस्थानों में ही अध्ययन के लिए भेजें।

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