उत्तराखंड में बड़ी विद्युत परियोजनाओं पर कार्य तेज
उत्तराखंड में विद्युत के निर्बाध आपूर्ति के लिए मास्टरप्लान बनाया जा रहा है, जिसमें उत्तराखंड में निर्माणाधीन 6 बड़ी विद्युत परियोजनाऐं सम्मिलित हैं। इसी क्रम में बीते सोमवार को मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने सचिवालय स्थित सभागार में पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन आफ उत्तराखंड लिमिटेड द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में आवश्यक दिशा निर्देश दिए। बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को कड़े स्वर में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मानसून सत्र में पारेषण तंत्र की स्थिरता और निर्बाध विद्युत संचालन में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं आनी चाहिए। इसके लिए एसओपी का पूर्णत: पालन अनिवार्य बताया गया है। वहीं मुख्य सचिव ने वर्षाकाल में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने और अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं, इसके अतिरिक्त लाइन ब्रेकडाउन की स्थिति में त्वरित एनालिसिस कर विद्युत आपूर्ति बहाल करने को भी निर्देशित किया गया।
इन परियोजनाओं से बढ़ेगा निर्बाध वितरण
आपको बताते चलें कि उत्तराखंड में 6 बड़ी विद्युत परियोजनाओं के निर्माण पर कार्य चल रहा है, जिसमें 220 केवी सेलाकुई, 132 केवी खटीमा, 132 केवी लोहाघाट (चंपावत), 132 केवी धौलाखेड़ा (नैनीताल), 132 केवी आराघर (देहरादून), 220 केवी मंगलौर शामिल हैं। माना जा रहा है कि एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) वित्त पोषित द्वार यह छह बड़ी पारेषण परियोजनाएं वर्ष 2026 तक पूरी कर ली जाएंगी। इन परियोजनाओं से बार-बार ट्रिपिंग और लो वोल्टेज जैसी समस्याओं से निजाद मिलेगी, जिससे उद्योगों और आम उपभोक्ताओं को लाभ होगा। यह जानकारी मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में पिटकुल के अधिकारियों ने दी। वहीं उक्त बैठक में पिटकुल के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024–25 में पिटकुल की रेटिंग A से बढ़कर A हो गई है। इसका लाभ यह होगा कि पिटकुल को मिलने वाले ऋण पर 0.50 प्रतिशत ब्याज की छूट प्राप्त होगी।
मुख्य सचिव ने ली परियोजना-प्रगति की जानकारी
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में निर्बाध विद्युत वितरण पर सभी मुख्य और आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा तथा दिशा-निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने पिटकुल के सभी निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित विद्युत पारेषण परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में लागत वृद्धि के बिना पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने उन्होंने कहा कि किसी भी मास्टर प्लान को लागू करने से पूर्व उसकी सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथारिटी से समीक्षा कराना अनिवार्य होगा। मुख्य सचिव ने लाइन विस्तारीकरण और नए सबस्टेशन की स्थापना से पहले भूमि अधिग्रहण हेतु तय हुए नए मानकों के अनुसार एक प्रस्ताव तैयार कर उसे राज्य सरकार को भेजने के लिए भी निर्देशित किया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वे स्वंय भी कुछ निर्माणाधीन परियोजनाओं और सबस्टेशनों का धरातलिय निरीक्षण करेंगे। सचिवालय स्थित सभागार में आयोजित इस बैठक में प्रमुख सचिव आर. मिनाक्षी सुंदरम, मुख्य अभियंता अनुपम सिंह, कमल कांत और महाप्रबंधक (वित्त) मनोज कुमार आदि उपस्थित रहे।
लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

