उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर के बाद पानी के बिलों में बेतहाशा वृद्धि
ऋषिकेश समेत उत्तराखंड के कई वार्डों में स्मार्ट मीटर लगने के बाद पेयजल बिलों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी जा रही है। दो या तीन सदस्य वाले परिवारों को भी दो महीने का पानी का बिल 15,000 से 18,000 रुपये तक मिल रहा है, जिससे लोग हैरान और परेशान हैं। नगर निगम क्षेत्र के इंद्रानगर, बापू ग्राम, सुमन नगर, शिवाजी नगर जैसे वार्डों में पेरी अर्बन योजना के तहत लगाए गए स्मार्ट मीटरों से 30 से 35 गुना तक बिल बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं। उपभोक्ताओं ने जल संस्थान की शुल्क निर्धारण प्रणाली पर सवाल उठाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। जल संस्थान का कहना है कि दो कनेक्शन होने जैसे तकनीकी कारणों से समस्या उत्पन्न हुई है, जिसका समाधान किया जा रहा है और उपभोक्ताओं से फौरन शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है। इंद्रानगर, मालवीय नगर, सुमन नगर और प्रगति विहार जैसे क्षेत्रों के पार्षदों ने जल संस्थान के अधिकारियों के समक्ष बढ़े हुए पानी के बिलों को लेकर विरोध जताया है। पार्षदों के दबाव पर कुछ वार्डों में अत्यधिक बिलों को कम जरूर किया गया, लेकिन अभी भी कई इलाकों में उपभोक्ता परेशान हैं। जल संस्थान की क्षेत्रीय जेई पिंकी चंद ने बताया कि कई वार्डों से ज्यादा बिल आने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं और इनका समाधान किया जा रहा है। यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि उसका बिल असामान्य रूप से ज्यादा है, तो वह विभागीय कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकता है, और उनकी समस्या का निस्तारण अवश्य किया जाएगा।
संस्थान का दावा समस्या जल्द सुलझाने का वादा
जल संस्थान के क्षेत्रीय जेई पिंकी चंद ने बताया कि बढ़े हुए पानी के बिलों की जांच में पाया गया कि कई उपभोक्ताओं के पास दो कनेक्शन (पुराना और नया) होने के कारण बिल कई गुना बढ़ रहे हैं। पुरानी लाइन में छोड़ा गया पानी भी स्मार्ट मीटर द्वारा रिकॉर्ड हो रहा है, जबकि उपभोक्ता पुरानी लाइन का पानी उपयोग नहीं कर रहे हैं। समस्या के समाधान के लिए विभाग ने अधिकांश पुराने कनेक्शनों को नए कनेक्शन से अलग कर दिया है, जिससे बिलों में कमी आ रही है। हालांकि, बापू ग्राम, मीरा नगर और बीस बीघा जैसे कुछ क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के पुरानी लाइन बंद न करने के आग्रह के कारण काम में देरी हो रही है, परन्तु वहाँ भी जल्द इस समस्या का समाधान किया जाएगा।
जल्द निर्धारित होगा पानी का शुल्क
जल संस्थान के अनुसार, प्रत्येक पानी के कनेक्शन पर दो माह की अवधि में 40,000 लीटर तक पानी की खपत पर ₹449 का शुल्क निर्धारित किया गया है। यदि उपभोक्ता इस सीमा से अधिक पानी का उपयोग करते हैं तो उन्हें हर 1,000 लीटर पर ₹15.40 अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इस व्यवस्था के तहत, स्मार्ट मीटर से पानी की खपत दर्ज होने के बाद ही उपभोक्ताओं का बिल बनाया जाता है। विभाग का कहना है कि यह स्लैब दर उपभोक्ताओं की जरूरत और खपत के अनुसार शुल्क लगाने के उद्देश्य से तय की गई है।
लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

