Badrinath Dham: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट आज दोपहर 2 बजे से भक्तों के लिए बंद कर दिए गए हैं। अब मंदिर के कपाट छह महीने बाद फिर से खोले जाएंगे। कपाट बंद होने के अवसर पर मंदिर को रंग-बिरंगी लाइटों और ताज़े फूलों से बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया। इस बार मंदिर को सजाने में 12 क्विंटल गेंदे के फूलों का उपयोग किया गया, जिससे पूरा परिसर जगमगा उठा। इस भव्य दृश्य को देखने के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुँचे और इस पवित्र पल का आनंद लिया।
हर साल की तरह सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर को अक्टूबर-नवंबर में बंद किया जाता है और अगले साल अप्रैल-मई में दोबारा खोल दिया जाता है। कपाट बंद होने के अवसर पर मंदिर को रंग-बिरंगी लाइटों और ताज़े फूलों से बेहद सुंदर तरीके से सजाया गया।

कपाट बंद करने से पहले चार दिनों तक चलने वाली पंच पूजा का आयोजन किया गया। चौथे दिन माता लक्ष्मी के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई और प्रसाद अर्पित किया गया। इसके बाद परंपरा के अनुसार माता लक्ष्मी को बद्रीनाथ मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होने का निमंत्रण दिया गया। मुख्य पुजारी अमरनाथ नंबूदरी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह पूरा अनुष्ठान संपन्न किया। माना जाता है कि गर्मियों में माता लक्ष्मी अपने मंदिर में रहती हैं, जबकि सर्दियों में वे मुख्य गर्भगृह में विराजमान होती हैं। इसी कारण कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
पंच पूजा 21 नवंबर 2025 से शुरू हुई थी, जिसमें गणेश मंदिर, आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी स्थल के कपाट भी विधि-विधान से बंद किए गए। पूजा के दौरान वेद मंत्रों का वाचन भी निरंतर चलता रहा, जिससे वातावरण काफी भक्तिमय बना रहा।
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