Piprahwa Relics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की ग्रैंड इंटरनेशनल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में भगवान बुद्ध से जुड़ी दुर्लभ और पवित्र धरोहरें आम लोगों के दर्शन के लिए रखी गई हैं।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भगवान बुद्ध का ज्ञान और उनका दिखाया मार्ग पूरी मानवता के लिए है। उन्होंने कहा कि ये पवित्र अवशेष केवल ऐतिहासिक वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि भारत की पूजनीय विरासत और सभ्यता का अहम हिस्सा हैं।
पीएम मोदी ने बताया कि साल 1898 में खोजे गए ये पिपरहवा अवशेष करीब 125–127 साल बाद भारत लौटे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध सभी के हैं और लोगों को जोड़ने का संदेश देते हैं। अवशेषों की भारत वापसी में सहयोग के लिए उन्होंने गोदरेज समूह का आभार भी जताया।

प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि 2026 की शुरुआत ऐसे शुभ अवसर से होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कामना की कि भगवान बुद्ध के आशीर्वाद से नया साल दुनिया के लिए शांति, समृद्धि और सद्भाव लेकर आए। उन्होंने यह भी कहा कि किला राय पिथौरा का यह स्थान भारत के गौरवशाली इतिहास से जुड़ा हुआ है।

पीएम मोदी ने अपने जीवन पर भगवान बुद्ध के प्रभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका जन्मस्थान वडनगर कभी बौद्ध शिक्षा का बड़ा केंद्र था और सारनाथ, जहां भगवान बुद्ध ने पहला उपदेश दिया, आज उनकी कर्मभूमि है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि देशभर में बौद्ध सर्किट विकसित किया जा रहा है, ताकि बौद्ध तीर्थ स्थलों के बीच बेहतर संपर्क हो और देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव मिल सके। भारत बौद्ध विरासत को प्राकृतिक और सुरक्षित तरीके से संरक्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पिपरहवा रत्न अवशेषों की वापसी देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि संस्कृति मंत्रालय पुरातात्विक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है।

