Kishtwar Encounter

Kishtwar Encounter : किश्तवाड़ में सेना और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़, 8 जवान घायल

Kishtwar Encounter : जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के सुदूर और घने जंगलों में रविवार को सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ शुरू हुई। इस एनकाउंटर में भारतीय सेना के 8 जवान घायल हो गए हैं। घायलों में से कुछ की हालत गंभीर है और तीन जवानों को हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर उधमपुर आर्मी बेस अस्पताल पहुंचाया गया। मुठभेड़ ऑपरेशन त्राशी-I के तहत चल रही है, जो सेना की जम्मू स्थित व्हाइट नाइट कोर द्वारा जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर संचालित किया जा रहा है।

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मुठभेड़ कैसे शुरू हुई?

ऑपरेशन रविवार दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुआ। खुफिया जानकारी के आधार पर किश्तवाड़ के चतरू इलाके के उत्तर-पूर्व में सोनार (Sonnar) क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था। तलाशी दल को दो-तीन विदेशी आतंकवादियों से सामना हुआ, जो पाकिस्तान आधारित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े बताए जा रहे हैं। आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की और घेराबंदी तोड़ने के लिए हथगोले फेंके। सुरक्षाबलों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। गोलीबारी कई घंटों तक चलती रही और शाम 5:40 बजे तक रुक-रुककर होती रही। अब गोलीबारी थम गई है, लेकिन घेराबंदी मजबूत कर ली गई है।

घायलों की स्थिति और रेस्क्यू

आठ घायल जवानों में ज्यादातर को हथगोले के छर्रों से चोटें आई हैं। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। सेना ने जवानों की बहादुरी की सराहना की है, क्योंकि चुनौतीपूर्ण पहाड़ी इलाके और खराब मौसम में उन्होंने असाधारण साहस दिखाया। अतिरिक्त बलों को तैनात किया गया है, जिसमें CRPF, पुलिस और सेना के जवान शामिल हैं।

ऑपरेशन में इस्तेमाल हो रही आधुनिक तकनीक

आतंकियों को ढूंढने के लिए व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इसमें ड्रोन से निगरानी, खोजी कुत्ते (स्निफर डॉग्स) और अन्य उन्नत उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इलाका ऊपरी जंगलों वाला है, जहां पहुंचना मुश्किल है। सेना ने कहा कि नागरिक प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर अभियान जारी है।

इस साल जम्मू क्षेत्र में तीसरी मुठभेड़

यह जम्मू क्षेत्र में साल की तीसरी मुठभेड़ है। इससे पहले 7 और 13 जनवरी को कठुआ जिले के बिलवार क्षेत्र में एनकाउंटर हुए थे। पिछले साल दिसंबर में उधमपुर के माजलता इलाके में एक पुलिस अधिकारी शहीद हुए थे। अधिकारी बताते हैं कि पिछले साल से जम्मू के जंगलों में छिपे करीब तीन दर्जन आतंकवादियों को खदेड़ने का अभियान चल रहा है। गणतंत्र दिवस से पहले सुरक्षा बढ़ाई गई है, क्योंकि खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली है कि पाकिस्तान से और आतंकी भेजने की साजिश है।

क्या छिपा है इस मुठभेड़ के पीछे

आतंकी जैश-ए-मोहम्मद के हैं, जो पाकिस्तान से निर्देशित होते हैं। क्या यह घुसपैठ की नई कोशिश है? या पुराने छिपे आतंकियों का सफाया? अभी तक आतंकियों के मारे जाने या पकड़े जाने की पुष्टि नहीं हुई है। ऑपरेशन जारी है और सुरक्षा बल हर कीमत पर उन्हें खत्म करने के लिए तैयार हैं।

यह घटना जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की गंभीरता दिखाती है। हमारी सेना के जवान देश की सुरक्षा के लिए दिन-रात कुर्बानी दे रहे हैं। पीड़ित जवानों के जल्द स्वस्थ होने की कामना।

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