डेढ़ वर्षीय आरव के हत्यारे विराज को फांसी की सजा एकतरफा प्यार की सनक में मासूम की बेरहमी से हत्या करने पर जिला न्यायालय का बड़ा फैसला, कोर्ट बोला– यह जघन्य अपराध फिरोजाबाद। शिकोहाबाद के बहुचर्चित डेढ़ वर्षीय मासूम आरव हत्याकांड में जिला न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने एकतरफा प्यार की सनक में मासूम की नृशंस हत्या को जघन्य अपराध मानते हुए आरोपी को मृत्युदंड से दंडित किया। फैसले के बाद अदालत परिसर में भारी सुरक्षा व्यवस्था रही।
गुरुवार को अदालत ने विराज को हत्या का दोषी करार दिया था और सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की थी। शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुना दी यह मामला 30 मई का है।
यह मामला 30 मई का है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। अभियोजन के अनुसार बदायूं के शेखूपुर निवासी विराज एक महिला से एकतरफा प्रेम करता था और उस पर शादी का दबाव बना रहा था। महिला द्वारा प्रस्ताव ठुकराने से बौखलाए आरोपी ने बदला लेने की नीयत से महिला के डेढ़ वर्षीय बेटे आरव को टॉफी दिलाने का झांसा देकर अपने साथ ले गया और सुनसान गली में उसे कई बार जमीन पर पटक दिया। गंभीर चोटों के कारण मासूम की मौके पर ही मौत हो गई। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया था। बाद में पुलिस ने आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि पुलिस और अभियोजन ने इस मामले में तेजी से पैरवी करते हुए मात्र छह दिनों में 13 गवाहों की गवाही पूरी कराई। मजबूत वैज्ञानिक साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। फैसला सुनाए जाने के बाद मृतक आरव की मां रति शर्मा भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “मेरा बेटा कोई गुड्डा नहीं था। जिसने उसे इतनी बेरहमी से मार डाला, उसे फांसी की सजा मिलनी ही चाहिए थी। मुझे न्याय मिला है।”
इस फैसले को जिले के सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि अदालत का यह निर्णय मासूमों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर कड़ा संदेश देगा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
Why ऐसे फैसले जरूरी हैं?
सख्त न्यायिक फैसले केवल दोषियों को सजा देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि भविष्य में अपराध रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
| पहलू | प्रभाव |
|---|---|
| पीड़ित परिवार | न्याय मिलने का भरोसा |
| समाज | कानून पर विश्वास बढ़ता है |
| अपराधी | सख्त कानूनी संदेश |
| प्रशासन | बेहतर जांच और जवाबदेही |
| न्याय व्यवस्था | पारदर्शिता और विश्वास मजबूत |
कमिश्नरी चौराहे पर बवाल: पुलिसकर्मियों पर हमला, डीएम दफ्तर का गेट तोड़ा; 13 नामजद, 7 गिरफ्तार
Gurugram Encounter: दीपक नांदल गैंग के 4 बदमाश ढेर, ₹1 करोड़ की रंगदारी मांगने पहुंचे थे
FAQs
1. श्रीगंगानगर केस का फैसला क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
क्योंकि इसे जिले के सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है और यह बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्त संदेश देता है।
2. क्या ऐसे फैसलों से अपराध कम हो सकते हैं?
सख्त फैसले कानून का डर बढ़ाते हैं, लेकिन जागरूकता और प्रभावी कानून-व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।
3. बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार क्या कर सकते हैं?
बच्चों को सुरक्षा संबंधी जानकारी दें, उनकी बात ध्यान से सुनें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत कार्रवाई करें।
4. ऐसे मामलों में समाज की क्या भूमिका होती है?
पीड़ित परिवार का सहयोग करना, जागरूकता फैलाना और अपराध की सूचना समय पर देना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
5. क्या यह लेख कानूनी सलाह है?
नहीं। यह केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

