कमिश्नरी चौराहे पर बवाल – पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला, डीएम दफ्तर का गेट तोड़ा , रवि गौतम और दिग्विजय भाटी समेत 13 नामजद, 7 गिरफ्तार मेरठ। मेरठ जनपद में कमिश्नरी चौराहे पर धरना-प्रदर्शन के दौरान भारी बवाल, सड़क जाम और पुलिस पर जानलेवा हमले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। थाना सिविल लाइन पुलिस ने इस मामले में सोशल मीडिया पर भ्रामक दुष्प्रचार करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोप में 13 नामजद और 25 से 50 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 7 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में 11 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
थाना सिविल लाइन पुलिस द्वारा जारी की गई आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, दिनांक 08.07.2026 को थाना टीपीनगर पर दर्ज एक मुकदमे (मु0अ0सं0 273/2026, जिसमें बीएनएस और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं शामिल हैं) की विवेचना के विरोध में कुछ स्थानीय और बाहरी लोग बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के कमिश्नरी चौराहे पर एकत्र होकर प्रदर्शन कर रहे थे। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर मौके पर पहुंची। अपर जिलाधिकारी नगर, एसपी ग्रामीण, नगर मजिस्ट्रेट, सीओ कैंट और सीओ सिविल लाइन ने लाउड हेलर के माध्यम से भीड़ को कानून हाथ में न लेने और शांति बनाए रखने की बार-बार अपील की। पुलिस के समझाने पर प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। उन्होंने पुलिसकर्मियों से अभद्रता शुरू कर दी और जिलाधिकारी कार्यालय में जबरन घुसने की धमकी दी। इस दौरान रवि गौतम नाम के व्यक्ति ने पुलिस पर दबाव बनाने के लिए आत्मदाह करने की धमकी भी दी।
करीब साढ़े पांच घंटे (सुबह 11:00 बजे से शाम 16:30 बजे तक) उपद्रवियों ने मुख्य चौराहे को जाम रखा। इस कारण आम जनता, छात्र, महिलाएं और बच्चे घंटों फंसे रहे। गंभीर रूप से मरीज ले जा रही दो एम्बुलेंस भी इस जाम में फंस गईं, जिन्हें पुलिसकर्मियों ने सूझबूझ से सुरक्षित बाहर निकाला। उग्र भीड़ ने जिलाधिकारी कार्यालय का गेट तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की। जब पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल के साथ धक्का-मुक्की, हाथापाई करते हुए जानलेवा हमला कर दिया गया। महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा। पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले को सोशल मीडिया के जरिए जातिगत वैमनस्य फैलाने और भ्रामक सूचनाएं प्रसारित कर लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। सीसीटीवी फुटेज और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है।
पुलिस ने थाना सिविल लाइन में उपद्रवियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालना, पुलिस पर हमला, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और तमाम गंभीर धारों में तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा और 7 सीएल एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस ने 13 लोगों को नामजद किया है, जिनमें से 7 को गिरफ्तार कर लिया गया है। जिसमें अंकित कुमार (31 वर्ष) – निवासी: शाहपुर चौधरी, गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़, अरविंद कुमार (27 वर्ष) – निवासी: छिजारसी, सेक्टर-63, नोएडा,रवि कुमार उर्फ गौतम (32 वर्ष) – निवासी: छिजारसी कॉलोनी, सेक्टर-63, गौतमबुद्धनगर, (नामजद)
ऋतिक (20 वर्ष) – निवासी: ग्राम सिसौली, मुंडाली, मेरठ (नामजद), नवनीत कुमार – निवासी: बुद्धि विहार, आवास विकास कॉलोनी, मझोला, मुरादाबाद, हिमान्शु सिद्धार्थ – निवासी: जनपद मेरठ। (नामजद), लवि उर्फ शुभम – निवासी: अम्बेडकर चौपाल के पास, किला परीक्षितगढ़, मेरठ। (नामजद) आदि अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की तैयारी कर ली है।
पुलिस के द्वारा नामजद आरोपी
सुशील गौतम (मेरठ), सागर (लिसाड़ी गेट, मेरठ), बिजेन्द्र गौतम, मोहित जाटव, हेमन्त प्रधान (मेरठ), संजय (लिसाड़ी गेट, मेरठ), बिजेन्द्र सूद, दिग्विजय भाटी (अमरोहा), और अजय कुमार इसके अलावा 25 से 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ तलाश जारी है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे मुख्य चेहरे पेशेवर अपराधी हैं और उनके खिलाफ पहले से ही हत्या और जानलेवा हमले जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। मेरठ पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और वीडियो के आधार पर अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। सोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए आईटी सेल को एक्टिव किया गया है ताकि किसी भी तरह की भ्रामक खबर या अफवाह फैलाने वालों पर तुरंत कानूनी शिकंजा कसा जा सके।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडे ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के गेट पर सड़क को जाम कर दिया गया जिसमें बच्चे, बुजुर्ग और एंबुलेंस भी फस गए प्रदर्शनकारियों को तमाम अधिकारियों ने समझाने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने सड़क को जाम मुक्त नहीं किया जिसके बाद हल्का बल प्रयोग कर सभी को वहां से हटाया गया जिसके चलते उन्होंने पुलिस कर्मियों पर भी हमला कर दिया जिसमें कई पुलिसकर्मी और महिला पुलिसकर्मी घायल हुए हैं प्रदर्शन कारियों में बवाल करने वाले सात अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजने की तैयारी कर ली है। गिरफ्तार किए गए अभियुक्त जनपद का माहौल बिगाड़ना चाहते थे।
Arrest Update: अब तक क्या कार्रवाई हुई?
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अन्य संदिग्धों की पहचान लगातार की जा रही है।
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| घटना स्थल | कमिश्नरी चौराहा, मेरठ |
| प्रदर्शन अवधि | लगभग 5.5 घंटे |
| नामजद आरोपी | 13 |
| गिरफ्तार आरोपी | 7 |
| अज्ञात आरोपी | 25–50 |
| घायल पुलिसकर्मी | 11 |
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FAQs
Q1. मेरठ कमिश्नरी चौराहा विवाद कब हुआ?
उत्तर: यह घटना 8 जुलाई 2026 को धरना-प्रदर्शन के दौरान हुई।
Q2. पुलिस ने कितने लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है?
उत्तर: 13 नामजद और 25 से 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
Q3. अब तक कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
उत्तर: पुलिस के अनुसार अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
Q4. इस घटना में कितने पुलिसकर्मी घायल हुए?
उत्तर: पुलिस के मुताबिक 11 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
Q5. क्या मामले की जांच अभी भी जारी है?
उत्तर: हां, पुलिस सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही है तथा अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है।

