Meerut Central Market Case – मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट (स्कीम नंबर-7) का विवाद अब आर-पार की जंग में बदल चुका है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 44 सील परिसरों को ध्वस्त करने के सख्त आदेश के बाद शनिवार को कमिश्नरी कार्यालय के बाहर उस वक्त भारी हंगामा हो गया, जब सैकड़ों की संख्या में स्कूल और नर्सिंग होम संचालक, व्यापारी और महिलाएं धरना देने पहुंच गए।
प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए कमिश्नरी का मुख्य गेट बंद कर दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने गेट पर ही डेरा डाल दिया।
दर असल, सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद 8 अप्रैल को आवास विकास परिषद ने भारी पुलिस बल के साथ सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों को सील कर दिया था। इन संपत्तियों में 6 बड़े अस्पताल, चिकित्सकों के क्लीनिक और 6 प्रतिष्ठित स्कूल भी शामिल थे। व्यापारियों और भवन स्वामियों को उम्मीद थी कि अदालत से उन्हें कुछ राहत मिलेगी, लेकिन 14 जुलाई को आए सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले ने सबको हिला कर रख दिया। कोर्ट ने न सिर्फ सीलिंग को सही ठहराया, बल्कि सभी 44 अवैध व्यावसायिक निर्माणों को 15 दिन के भीतर स्वयं ध्वस्त करने का आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के बाद प्रभावित परिवारों, शिक्षकों और व्यापारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
’ऑल इंडिया स्कूल लीडर्स एसोसिएशन’ के बैनर तले सील हुए स्कूलों के शिक्षक, संचालक और नर्सिंग होम के डॉक्टर्स सुबह 11 बजे ही कमिश्नरी पहुंच गए। उनके समर्थन में सेंट्रल मार्केट के व्यापारी और बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं।प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कम से कम उनके एक प्रतिनिधिमंडल को कमिश्नर से मिलकर अपनी बात रखने और इस सीलिंग व ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पैदा हुई मानवीय समस्याओं को बताने की अनुमति दी जाए। गेट बंद होने के कारण करीब दो घंटे तक गेट पर तीखी बहस और नारेबाजी का दौर चलता रहा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कमिश्नरी परिसर और उसके आस-पास भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई है।
सीओ सिविल लाइन विश्व ज्योति राय ने बताया कि “माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करना प्रशासन की कानूनी बाध्यता है। कानून-व्यवस्था को किसी भी सूरत में हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा। सुरक्षा कारणों और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ही कमिश्नरी गेट पर एहतियातन रोक लगाई गई थी। प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। व्यापारियों और संचालकों के ज्ञापन को सक्षम अधिकारियों तक नियमानुसार पहुंचा दिया जाएगा, लेकिन माननीय न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना या शहर की शांति भंग करने की कोशिश करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई 15 दिनों की मोहलत तेजी से घट रही है। यदि भवन स्वामी खुद इन अवैध निर्माणों को नहीं हटाते हैं, तो आवास विकास परिषद और जिला प्रशासन भारी फोर्स के साथ खुद बुल्डोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर देगा, जिसका खर्च भी भवन स्वामियों से ही वसूला जाएगा। व्यापारी समाज इस समय पूरी तरह मायूस है और सरकार से किसी चमत्कारी हस्तक्षेप या अध्यादेश की उम्मीद लगाए बैठा है।
क्या है पूरा मामला? (Case Explained)
मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में 44 व्यावसायिक परिसरों को अवैध निर्माण मानते हुए पहले सील किया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इन परिसरों को निर्धारित समय सीमा के भीतर ध्वस्त करने का आदेश दिया है।
पहले और अब की स्थिति
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद प्रशासनिक कार्रवाई और तेज हो गई है।
| पहले | अब |
|---|---|
| 44 परिसर सील थे | ध्वस्तीकरण का आदेश |
| राहत की उम्मीद | 15 दिन की समय सीमा |
| व्यापार जारी नहीं | बुल्डोजर कार्रवाई की तैयारी |
| कानूनी प्रक्रिया जारी | प्रशासन सख्त मोड में |
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FAQs
Q1. मेरठ सेंट्रल मार्केट मामला क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के 44 अवैध व्यावसायिक परिसरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है।
Q2. कितने संस्थान प्रभावित हुए हैं?
करीब 44 परिसर, जिनमें 6 अस्पताल और 6 स्कूल भी शामिल हैं।
Q3. प्रदर्शन क्यों किया गया?
व्यापारियों, स्कूल संचालकों और नर्सिंग होम संचालकों ने राहत और प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
Q4. प्रशासन का क्या कहना है?
प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना उसकी कानूनी बाध्यता है।
Q5. आगे क्या होगा?
यदि भवन स्वामी स्वयं निर्माण नहीं हटाते, तो प्रशासन बुल्डोजर से ध्वस्तीकरण करेगा और उसका खर्च भी संबंधित भवन स्वामियों से वसूला जाएगा।

