Sambhal News – संभल जिले के चन्दौसी नगर पालिका क्षेत्र में करीब 5 करोड़ 17 लाख रुपये की लागत से तैयार की गई स्ट्रीट लाइट परियोजना अब सवालों के घेरे में है। उत्तर प्रदेश सरकार की माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी की शिकायत पर जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल द्वारा कराई गई जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट के अनुसार परियोजना के सैकड़ों पोल, स्ट्रीट लाइटें और फाउंडेशन या तो गायब हैं या फिर क्षतिग्रस्त पाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने नगर पालिका परिषद चन्दौसी के अधिशासी अधिकारी, यानी ईओ, से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण और गायब पोल व स्ट्रीट लाइटों की पुनर्स्थापना के लिए विस्तृत कार्ययोजना मांगी है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में राज्यमंत्री गुलाब देवी के प्रस्ताव पर लोक निर्माण विभाग (यांत्रिक), मुरादाबाद द्वारा सिम्स कॉलेज से विश्वकर्मा धर्मकांटा, ग्रीन सिटी, रेलवे ट्रेनिंग कॉलेज होते हुए ओएलएफ तक हाईवे पर इस स्ट्रीट लाइट परियोजना का निर्माण कराया गया था। करीब 5.17 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना के तहत कुल 697 पोल और स्ट्रीट लाइटें स्थापित की गई थीं।
15 अगस्त 2022 को इस परियोजना का लोकार्पण किया गया था और बाद में 5 दिसंबर 2022 को इसका रखरखाव नगर पालिका परिषद चन्दौसी को सौंप दिया गया।राज्यमंत्री गुलाब देवी का कहना है कि यह परियोजना आम लोगों की सुविधा और रात के समय सुरक्षित आवागमन को ध्यान में रखकर स्वीकृत कराई गई थी। नगर पालिका को जब परियोजना सौंपी गई, तब सभी स्ट्रीट लाइटें चालू अवस्था में थीं। लेकिन समय के साथ रखरखाव में लापरवाही बरती गई, जिसके चलते लगातार शिकायतें मिलने लगीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर जिलाधिकारी से जांच कराने का अनुरोध किया गया।जिलाधिकारी के निर्देश पर कराए गए भौतिक सत्यापन में सामने आया कि मौके पर केवल 426 पोल, 444 स्ट्रीट लाइटें और 427 फाउंडेशन ही मौजूद मिले। यानी 271 पोल, 253 स्ट्रीट लाइटें और 270 फाउंडेशन गायब या क्षतिग्रस्त पाए गए। सरकारी संपत्ति के संरक्षण में इतनी बड़ी कमी मिलने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीर मामला माना है।
जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर पूरे मामले पर जवाब देने और गायब पोल व स्ट्रीट लाइटों की पुनर्स्थापना के लिए विस्तृत एक्शन प्लान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई इस परियोजना के सैकड़ों पोल और स्ट्रीट लाइटें आखिर कहां गईं? क्या यह केवल रखरखाव में लापरवाही का मामला है या इसके पीछे किसी बड़े भ्रष्टाचार की कहानी छिपी है? इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल पूरे मामले ने चन्दौसी नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Project में क्या मिली बड़ी गड़बड़ी?
जिलाधिकारी के निर्देश पर कराए गए भौतिक सत्यापन में परियोजना की वास्तविक स्थिति सामने आई। जांच में बड़ी संख्या में पोल, स्ट्रीट लाइट और फाउंडेशन गायब या क्षतिग्रस्त पाए गए, जिससे सरकारी संपत्ति के संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
मुख्य तथ्य
- परियोजना की लागत लगभग ₹5.17 करोड़।
- वर्ष 2022 में कुल 697 पोल और स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं।
- जांच में केवल 426 पोल मौजूद मिले।
- 253 स्ट्रीट लाइटें और 270 फाउंडेशन गायब या क्षतिग्रस्त पाए गए।
Original vs Verification Report
जांच रिपोर्ट में मूल परियोजना और मौके पर मिली वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला।
| विवरण | परियोजना के अनुसार | जांच में मिला |
|---|---|---|
| पोल | 697 | 426 |
| स्ट्रीट लाइट | 697 | 444 |
| फाउंडेशन | 697 | 427 |
| गायब/क्षतिग्रस्त पोल | – | 271 |
| गायब/क्षतिग्रस्त स्ट्रीट लाइट | – | 253 |
| गायब/क्षतिग्रस्त फाउंडेशन | – | 270 |
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FAQs
Q1. संभल की स्ट्रीट लाइट परियोजना की लागत कितनी थी?
परियोजना की कुल लागत लगभग ₹5.17 करोड़ थी।
Q2. जांच में कितने पोल गायब मिले?
भौतिक सत्यापन में 271 पोल गायब या क्षतिग्रस्त पाए गए।
Q3. जांच किसके निर्देश पर हुई?
राज्यमंत्री गुलाब देवी की शिकायत के बाद जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल के निर्देश पर जांच कराई गई।
Q4. नगर पालिका को क्या निर्देश दिए गए हैं?
EO को तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण और गायब पोल व स्ट्रीट लाइटों की पुनर्स्थापना की कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा गया है।
Q5. क्या अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है?
हाँ। यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला या जांच में लापरवाही सिद्ध हुई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

