शिक्षा विभाग में फर्जी IGRS और वसूली के आरोप
Unnao Fake IGRS Complaint Case – यूपी के उन्नाव में नवाबगंज ब्लाक संसाधन केंद्र में तैनात खण्ड शिक्षा अधिकारी सहित कार्यालय के कर्मचारियों पर फर्जी नंबरों और फर्जी अलग- अलग नामो से IGRS के कथित दुरुपयोग कर जाँच के नाम पर कथित वसूली का मामला सामने आया है। आरोप है कि पूर्व खण्ड शिक्षा अधिकारी और वर्तमान खण्ड शिक्षा अधिकारी इस खेल में शामिल है। प्रधानाध्यापिका के पति ने शिक्षा निदेशक और उन्नाव डीएम को शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वही डीएम ने मामले को गंभीरता से लेकर जाँच समिति बनाकर जांच कर सख्त कार्यवाई के आदेश दिए।
जनपद के नवाबगंज ब्लाक संसाधन केंद्र (BRC) में उस समय हड़कंप मच गया जब दर्जनो अध्यापक- अध्यापिकाओं के खिलाफ एक ही नंबर और अलग- अलग कई नामो से फर्जी आईजीआरएस शिकायत कर कार्यवाई की मांग की गई। नोटिश निस्तारण कार्यवाई को लेकर खण्ड शिक्षा अधिकारियों द्वारा अध्यापिकाओं से पैसे वसूली की मांग की गई। वही प्राथमिक विद्यालय नवाबगंज सरायइंदल में तैनात अध्यापिका शिखा पाण्डये के पति अश्वनी मिश्रा ने आरोप लगाते हुए बताया कि नवाबगंज बीआरसी में एक ही फर्जी नंबर से अलग-अलग नामो से एक दर्जन से अधिक फर्जी आईजीआरएस शिकायत कर जाँच के नाम पूर्व खण्ड शिक्षा अधिकारी दीपेश कुमार, लेखाकार प्रवीन श्रीवास्तव और लिपिक दीपाली पर 10 हजार से 50 हजार तक वसूली के आरोप लगाए है। वही फर्जीवाड़ा खेल तब सामने खुल कर आ गया जब खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से एक ही दिनांक के नोटिश निस्तार के दो पत्र सामने आ गए।
पहला पत्र 29-मई-2026 में पत्रांक -206 के पत्र में साल का पुराना सत्र- 2025_26 लिखा मिला और खण्ड शिक्षा अधिकारी का नाम नही लिखा और अधिकारी का हस्ताक्षर भी मैच नही कर रहा…वही दूसरा पत्र 20-जून-2026 यानी 23 दिन बाद पत्र जारी किया जिसमें पहले पत्रांक- 206-पत्र का हवाला देते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजा गया जिसमें साल का सत्र 2026_27 बदल दिया गया। खण्ड शिक्षा अधिकारी शुचि गुप्ता नाम सहित प्रमाणित पत्र सामने आने से साफ जाहिर हो रहा है की अधिकारियों ने नोटिश निरस्त करने के नाम पर कितना बड़ा फर्जीवाड़े खेल को अंजाम दिया है…वही पूर्व खण्ड शिक्षा अधिकारी दीपेश कुमार से बात की गई तो मामले में सफाई देते हुए बताया कि वर्ष 2026 मई माह में खण्ड शिक्षा अधिकारी शुचि गुप्ता के छुट्टी पर जाने के बाद उन्हें अतिरिक्त प्रभार मिला था।
उसी दौरान 22 मई 2026 को एक ही नंबर से अलग- अलग नामो से दर्जनो शिक्षक- शिक्षिकाओं के खिलाफ शिकायत की गई जबकि खण्ड शिक्षा अधिकारी दीपेश कुमार ने 25 मई 2026 को वर्तमान खण्ड शिक्षा अधिकारी शुचि गुप्ता के वापस लौटते ही उन्होंने नवाबगंज का कार्यभार छोड़ दिया था। दीपेश कुमार ने बताया कि उनके जाने के बाद सभी दस्तवेजो मे हस्ताक्षर वर्तमान खण्ड शिक्षा अधिकारी शुचि गुप्ता के है। इससे एक बात साफ हो गयी है कि फर्जीवाड़ा खेल हुआ है और किस हद तक किया जा रहा था। इसका अंदाजा लगा पाना भी बेहद मुश्किल है। फर्जी आईजीआरएस निस्तारण खेल में अध्यापक अध्यापिकाओं से 10 हजार से लेकर लाखों तक की वसूली की गयी। वही पूरे मामले को गंभीरता से लेकर जिलाधिकारी घनश्याम मीणा ने एक जाँच समिति बनाई और जांच कर सख्त कार्यवाई के निर्देश दिए है।

Why मामला इतना गंभीर माना जा रहा है?
यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल फर्जी शिकायतों का मामला नहीं बल्कि सरकारी शिकायत निवारण प्रणाली के कथित दुरुपयोग का भी गंभीर मामला हो सकता है। इससे शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
मुख्य बिंदु
- फर्जी नंबरों और अलग-अलग नामों से IGRS शिकायतों का आरोप।
- जांच के नाम पर कथित वसूली की शिकायत।
- BEO और BRC कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल।
- DM ने जांच समिति गठित की।
- पूरे मामले की जांच जारी।

Case Timeline एक नजर में
अब तक सामने आई जानकारी के आधार पर मामले की प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| मामला | फर्जी IGRS शिकायतों का आरोप |
| स्थान | नवाबगंज BRC, उन्नाव |
| मुख्य आरोप | कथित वसूली और फर्जी शिकायतें |
| शिकायतकर्ता | अश्वनी मिश्रा |
| वर्तमान स्थिति | DM द्वारा गठित समिति जांच कर रही है |
FAQs
Q1. Unnao Fake IGRS Complaint Case क्या है?
यह उन्नाव शिक्षा विभाग में फर्जी IGRS शिकायतों और कथित वसूली से जुड़ा मामला है।
Q2. इस मामले में किन पर आरोप लगाए गए हैं?
शिकायत में पूर्व और वर्तमान खंड शिक्षा अधिकारियों सहित कुछ BRC कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए हैं।
Q3. DM ने क्या कार्रवाई की है?
जिलाधिकारी ने जांच समिति गठित कर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
Q4. क्या आरोप साबित हो गए हैं?
नहीं। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
Q5. शिकायत में कितनी वसूली का आरोप लगाया गया है?
शिकायत के अनुसार, कथित रूप से ₹10 हजार से ₹50 हजार तक की वसूली की मांग किए जाने का आरोप है।

