देहरादून के कारगी ग्रांट इलाके में लगातार बारिश के बीच नाले का किनारा टूटने से एक घर ढह गया। परिवार के लोगों ने खतरा भांपकर समय रहते घर खाली कर दिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना में किसी की मौत या गंभीर जनहानि की सूचना नहीं है। प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित परिवार के लिए आर्थिक सहायता स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब देहरादून में मानसून के दौरान नालों और जल निकासी वाले क्षेत्रों के आसपास रहने वाले परिवारों के लिए खतरा लगातार बना हुआ है। पिछले साल भी कारगी ग्रांट में बारिश के दौरान नदी किनारे बने घरों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आई थीं।
अचानक बढ़ा पानी, ढह गया नाले का किनारा
बताया गया कि सोमवार रात लगातार बारिश के बाद स्थानीय नाले में पानी तेजी से बढ़ा। पानी के दबाव से नाले का किनारा टूट गया और उसके पास बना मकान अचानक कमजोर होकर पानी में जा गिरा।
परिवार उस समय घर के भीतर मौजूद था। खतरे का अंदाजा होने के बाद लोगों ने तुरंत बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर शरण ली। घर के गिरने से सामान और संपत्ति का नुकसान हुआ, लेकिन समय पर निकासी के कारण किसी की जान नहीं गई।
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास के लोगों ने भी अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया।
बिस्मिल्लाह चौक पर दो दुकानें भी गिरीं
कारगी ग्रांट मुस्लिम बस्ती के बिस्मिल्लाह चौक क्षेत्र में भी बारिश से नुकसान की सूचना सामने आई है। यहां मंगलवार सुबह दो दुकानों के ढहने की बात कही गई है।
लगातार बारिश के बीच निचले और नाले के आसपास के इलाकों में जलस्तर बढ़ने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई। प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और राहत दलों की गतिविधियां तेज की गईं।
हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन घटनाओं में भी किसी व्यक्ति की मौत की सूचना नहीं है।
पिछले मानसून की घटनाएं भी बढ़ाती हैं चिंता
कारगी ग्रांट में जलभराव और नाले के आसपास रहने वाले लोगों की परेशानी नई नहीं है। जून 2025 में भी लगातार बारिश के दौरान कारगी ग्रांट में नदी किनारे बने दो मकान ढह गए थे। उस घटना में भी कोई जनहानि नहीं हुई थी और पुलिस तथा फायर सर्विस की टीमों ने मौके पर पहुंचकर आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की कार्रवाई की थी।
पिछले मानसून में देहरादून के कई इलाकों में नालों के आसपास जलभराव और मलबा जमा होने की समस्या भी सामने आई थी। कारगी ग्रांट समेत कई क्षेत्रों के निवासियों ने जल निकासी व्यवस्था और नालों की सफाई को लेकर चिंता जताई थी।
इस पृष्ठभूमि में मौजूदा घटना केवल एक मकान के गिरने तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठाती है कि भारी बारिश के दौरान नालों और जलधाराओं के किनारे स्थित आवासीय इलाकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं या नहीं।
पीड़ित परिवार ने सहायता नहीं मिलने का आरोप लगाया
प्रभावित परिवार की सदस्य निशा के अनुसार, नाले का पानी अचानक बढ़ा और किनारा टूटने के बाद मकान उसकी चपेट में आ गया। परिवार ने समय रहते घर छोड़ दिया, लेकिन उनका सामान और मकान बुरी तरह प्रभावित हुआ।
निशा ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले वर्ष भारी बारिश से नुकसान होने के बावजूद परिवार को प्रशासन की ओर से आर्थिक सहायता नहीं मिली थी। यह एक स्थानीय निवासी का आरोप है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है।
मौजूदा घटना के बाद प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवार को आर्थिक सहायता स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई है।
प्रशासन ने किया मौके का निरीक्षण
घटना की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल पर किसी व्यक्ति की जान नहीं गई है।
देहरादून की SDM अपूरवा मिश्रा ने बताया कि प्रशासन स्थिति पर नजर रख रहा है और क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
बारिश के दौरान नाले के किनारे बने मकानों की स्थिति पर विशेष निगरानी रखने की जरूरत बताई गई है, क्योंकि जलस्तर अचानक बढ़ने पर मिट्टी और किनारों के कटाव से खतरा तेजी से बढ़ सकता है।
निर्माण की वैधता पर भी उठे सवाल
घटना के बाद एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी सामने आया है कि नाले के इतने करीब बने मकान का निर्माण स्वीकृत नियमों के अनुरूप था या नहीं। उपलब्ध जानकारी में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रभावित मकान के पास निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति थी या नहीं।
इसका जवाब प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। इसलिए फिलहाल मकान के निर्माण को अवैध या नियमविरुद्ध बताना उचित नहीं होगा।
हालांकि, यदि जांच में यह सामने आता है कि नाले या जलधारा के संवेदनशील क्षेत्र में बिना आवश्यक अनुमति के निर्माण हुआ था, तो यह मामला केवल राहत और मुआवजे का नहीं रहेगा। इससे भविष्य में ऐसे इलाकों में निर्माण नियंत्रण और आपदा जोखिम को लेकर भी सवाल उठेंगे।
आगे सबसे जरूरी है नाले के किनारे सुरक्षा
कारगी ग्रांट की घटना एक बार फिर दिखाती है कि मानसून में नालों के किनारे बसे इलाकों में जोखिम कुछ ही घंटों में बढ़ सकता है। खासकर तब, जब तेज बारिश के कारण जलस्तर अचानक बढ़े और पानी का बहाव किनारों को काटने लगे।
तत्काल चुनौती प्रभावित परिवार को राहत देने और असुरक्षित हिस्से को सुरक्षित करने की है। इसके साथ ही नाले के किनारे बसे घरों और दुकानों का जोखिम आकलन, जल निकासी की नियमित सफाई तथा कमजोर किनारों की मजबूती जैसे कदम लंबे समय के लिए जरूरी होंगे।
अभी इस घटना में सबसे बड़ी राहत यही है कि मकान गिरने से पहले परिवार बाहर निकल गया। लेकिन कारगी ग्रांट में पिछले मानसून की घटनाओं और इस बार फिर सामने आए नुकसान को देखते हुए सवाल यह है कि अगली तेज बारिश से पहले कितने संवेदनशील घरों की पहचान और सुरक्षा की जाएगी।
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