
ईरान से अमेरिका क्या चाहता है?– ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ़ ने अमेरिकी प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा है कि वॉशिंगटन ईरान पर अतिरिक्त दबाव डालकर ऐसी रियायतें चाहता है, जिन पर किसी संभावित समझौते में पहले कभी चर्चा नहीं हुई।
उनके इस बयान के बाद, ईरान-अमेरिका संबंधों और दोनों देशों के बीच संभावित वार्ताओं को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। ईरानी प्रतिनिधियों का कहना है कि अमेरिका को पहले उन परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करना चाहिए, जिन्हें उसने स्वयं उत्पन्न किया है।ईरान-अमेरिका तनाव,
ईरान से अमेरिका क्या चाहता है? ग़ालिबाफ़ ने अमेरिकी अधिकारियों पर साधा निशाना
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ़ ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों द्वारा मुद्दे को जिस दृष्टिकोण से देखा जा रहा है, उससे समस्या का समाधान नहीं निकल सकता। ग़ालिबाफ़ के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन को ईरान पर दबाव बढ़ाने के बजाय पहले उन समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए, जो अमेरिकी नीतियों के कारण उत्पन्न हुई हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका तनाव में है, अमेरिकी दबाव, और संभावित समझौते पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है।
ईरान से किन रियायतों की उम्मीद कर रहा है अमेरिका?
ग़ालिबाफ़ का बयान मुख्यत: इस बात पर केंद्रित है कि अमेरिकी अधिकारियों का प्रयास है कि वे ईरान पर अधिक दबाव डालकर उसे अतिरिक्त रियायतें देने के लिए मजबूर करें। ईरानी संसद के अध्यक्ष ने यह भी बताया कि जिन्हें रियायतें कहा जा रहा है, वे दरअसल किसी संभावित समझौते की मूल शर्तें नहीं थीं। इसका मतलब यह है कि ईरान का आरोप है कि अमेरिका दबाव डालकर वार्ता से बाहर की मांगों को भी स्वीकार करवाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, ग़ालिबाफ़ ने अपने बयान में उन रियायतों की विस्तृत सूची नहीं दी। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी प्रशासन किन विशेष बिंदुओं पर अतिरिक्त रियायतों की उम्मीद कर रहा है।
अमेरिका-ईरान विवाद में बढ़ी बयानबाज़ी
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों, और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर मत भेद मौजूद हैं। जैसे-जैसे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता है, आर्थिक और राजनीतिक दबाव भी विवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।
ऐसी स्थिति में, ईरान के प्रमुख राजनीतिक नेताओं के बयान यह दर्शाते हैं कि तेहरान किसी संभावित समझौते में अपनी शर्तों और सीमाओं को लेकर सतर्क है। ग़ालिबाफ़ ने अमेरिकी अधिकारियों के प्रति तीखे शब्दों में स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि केवल दबाव डालने से ईरान को किसी अतिरिक्त मांग को मानने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
इराक़ यात्रा को लेकर भी ग़ालिबाफ़ का बयान
ग़ालिबाफ़ ने अपनी इराक़ यात्रा के बारे में एक और सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी दी। उन्होंने ईरान और इराक़ के बीच के रिश्तों को ऐतिहासिक और मजबूत बताया, यह जोर देते हुए कि दोनों देशों के लोगों के बीच का संबंध अधिक स्थायी और अटूट है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक शांति को बढ़ावा देने तथा लोगों की समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण और व्यावहारिक कदम उठाए जाएंगे। ईरान के लिए इराक़ के साथ संबंधों को रणनीतिक और क्षेत्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए ग़ालिबाफ़ की यह यात्रा क्षेत्रीय सहयोग और दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से विशेष महत्व रखती है।
आगे क्या हो सकता है?
ग़ालिबाफ़ का बयान यह स्पष्ट करता है कि ईरान और अमेरिका के बीच किसी संभावित समझौते की प्रक्रिया आसान नहीं होगी। यदि दोनों पक्ष वार्ता के लिए आगे बढ़ते हैं, तो सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि किन मुद्दों को समझौते में शामिल किया जाना चाहिए और किन मांगों को मान्यता दी जानी चाहिए।
वर्तमान में, ग़ालिबाफ़ ने अमेरिका पर अतिरिक्त दबाव बनाने के द्वारा नए रियायतें हासिल करने की कोशिश का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष की ओर से इन आरोपों का क्या उत्तर दिया जाएगा, यह भविष्य की स्थिति को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Read more
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा दावा, ईरान से मांगा युद्ध का मुआवजा

