Uttarakhand Doctors Protest – उत्तराखंड में चिकित्सकों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर डॉक्टरों के संगठन प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ उत्तराखण्ड ने सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर चिकित्सकों से जुड़े 11 प्रमुख मुद्दे उठाए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा। प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ उत्तराखण्ड के अध्यक्ष डॉक्टर रमेश कुंवर, व महासचिव डॉ यशपाल तोमर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सबसे पहले हाल में किए गए चिकित्सकों के स्थानांतरण में संशोधन की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि स्थानांतरण के दौरान कई विसंगतियां सामने आई हैं। बीमार चिकित्सकों को पर्वतीय क्षेत्रों में भेजने तथा युगल दंपती चिकित्सकों को अलग-अलग स्थानों पर स्थानांतरित किए जाने का भी मुद्दा उठाया गया है।चिकित्सकों ने SDACP (Special Dynamic Assured Career Progression) का लाभ दिलाने की मांग भी की है। संगठन के अनुसार, पात्र चिकित्सकों को इसका लाभ लंबे समय से नहीं मिल रहा है। इसके अलावा रिक्त पदों के सापेक्ष डीपीसी कराने, लंबित डीपीसी पर तत्काल कार्रवाई और भविष्य के लिए समयबद्ध रोस्टर तैयार करने की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री पत्र में अल्मोड़ा, टिहरी और नैनीताल जिला मुख्यालय तथा मसूरी नगर क्षेत्र को सुगम से पुनः दुर्गम श्रेणी में शामिल करने, विभिन्न पदों पर विभागीय आवश्यकतानुसार पदों में वृद्धि, जिला चिकित्सालयों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित न करने और अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई है।https://health.uk.gov.in
चिकित्सकों ने सभी स्थानीय एवं राजकीय चिकित्सालयों में पुलिस चौकी स्थापित करने, चिकित्सकों के लिए आवास सुविधा उपलब्ध कराने, मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों में पीएमएचएस के अभ्यर्थियों के लिए सीटें आरक्षित करने तथा सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर कार्यरत चिकित्सकों को पर्वतीय क्षेत्रों में ही तैनाती देने की मांग भी रखी है। प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ उत्तराखण्ड ने कहा है कि इन मांगों को लेकर पूर्व में भी सरकार को पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब 15 दिन का समय दिया गया है। मांगों का समाधान नहीं होने पर चिकित्सक आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।https://health.uk.gov.in/pmhs-cadre-class-1-medical-officers-transfer-list-2026-27.
उत्तराखंड के सरकारी चिकित्सकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर सरकार के सामने आवाज उठाई है। प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ उत्तराखण्ड ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर चिकित्सकों से जुड़े 11 प्रमुख मामलों में जल्द कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर मांगों पर उचित फैसला नहीं लिया गया तो डॉक्टर आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। संघ के अध्यक्ष डॉ. रमेश कुंवर और महासचिव डॉ. यशपाल तोमर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इन मुद्दों को पहले भी सरकार के सामने रखा जा चुका है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
Doctors की 11 प्रमुख मांगों में क्या शामिल है?
चिकित्सक संगठन ने transfers से लेकर promotion, सुरक्षा और आवास तक कई मुद्दों को एक साथ उठाया है। संघ चाहता है कि सरकार केवल आश्वासन देने के बजाय हर मांग पर समयबद्ध कार्रवाई करे। मुख्य मांगों को पांच बड़ी categories में समझा जा सकता है।
- विवादित और असुविधाजनक transfers में संशोधन किया जाए।
- पात्र डॉक्टरों को SDACP का लाभ दिया जाए।
- रिक्त पदों के अनुसार लंबित DPC पूरी की जाए।
- अस्पतालों में पुलिस चौकी और आवास की व्यवस्था हो।
- PMHS चिकित्सकों के लिए PG seats आरक्षित की जाएं।
Transfer Policy और SDACP का मुद्दा Why Important है?
संघ की सबसे तत्काल मांग हाल में किए गए चिकित्सकों के स्थानांतरण की समीक्षा है। संगठन के मुताबिक कुछ बीमार डॉक्टरों को पर्वतीय क्षेत्रों में भेजा गया है, जबकि चिकित्सक दंपतियों को अलग-अलग स्थानों पर तैनाती मिली है। ऐसे मामलों में स्वास्थ्य, पारिवारिक परिस्थिति और विभागीय जरूरत के बीच संतुलन बनाने की मांग की जा रही है।
SDACP का मामला चिकित्सकों की career progression से जुड़ा है। संघ का कहना है कि पात्र डॉक्टरों को इसका लाभ लंबे समय से नहीं मिला है। इसी तरह रिक्त पद मौजूद होने के बावजूद DPC लंबित होने से पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। संगठन ने वर्तमान DPC पूरी करने के साथ भविष्य के लिए fixed roster बनाने को कहा है, ताकि हर बार प्रक्रिया में देरी न हो।
- Medical grounds वाले transfers की समीक्षा हो।
- Doctor couples की posting में समन्वय रखा जाए।
- SDACP के लंबित लाभ जल्द जारी किए जाएं।
- DPC के लिए समयबद्ध annual roster बनाया जाए।
Current Situation vs Doctors की Demand
डॉक्टरों की मांगों में service matters और अस्पतालों की बुनियादी व्यवस्था दोनों शामिल हैं। नीचे दी गई table से यह समझा जा सकता है कि संगठन ने किन समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया है और उनके लिए क्या समाधान मांगा है।
| मुद्दा | संगठन की शिकायत | डॉक्टरों की मांग |
|---|---|---|
| Transfer | बीमार डॉक्टरों की पहाड़ में तैनाती | Medical grounds पर संशोधन |
| Doctor Couples | पति-पत्नी को अलग-अलग posting | संभव होने पर एक क्षेत्र में तैनाती |
| SDACP | पात्र डॉक्टरों को लाभ नहीं मिला | लंबित benefit तत्काल जारी हो |
| DPC | पद रिक्त, लेकिन प्रक्रिया लंबित | DPC पूरी कर fixed roster बनाया जाए |
| Hospital Security | पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं | अस्पतालों में पुलिस चौकी बने |
| Housing | कई स्थानों पर आवास की कमी | चिकित्सकों को रहने की सुविधा मिले |
Hospital Security और Housing पर क्या मांग है?
संघ ने सभी स्थानीय और राजकीय चिकित्सालयों में पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग रखी है। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में सुरक्षित माहौल जरूरी है, ताकि चिकित्सक और अन्य स्वास्थ्यकर्मी बिना दबाव के अपनी जिम्मेदारी निभा सकें। इसके साथ डॉक्टरों के लिए कार्यस्थल के पास उचित आवास उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
संगठन ने अल्मोड़ा, टिहरी और नैनीताल जिला मुख्यालय तथा मसूरी नगर क्षेत्र को दोबारा दुर्गम श्रेणी में शामिल करने को कहा है। विभागीय जरूरत के अनुसार अलग-अलग पदों की संख्या बढ़ाने और जिला चिकित्सालयों को दूसरे स्थानों पर transfer न करने की मांग भी पत्र में रखी गई है। मेडिकल कॉलेजों में PG seats का एक हिस्सा PMHS अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित करने से सेवाकालीन डॉक्टरों को आगे पढ़ने का अवसर मिल सकता है।
- हर स्थानीय और राजकीय अस्पताल में पुलिस चौकी स्थापित हो।
- चिकित्सकों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था की जाए।
- PMHS अभ्यर्थियों के लिए PG seats आरक्षित हों।
- संविदा पर कार्यरत सेवानिवृत्त डॉक्टर पहाड़ों में तैनात किए जाएं।
बातचीत से निकले समाधान, सेवाएं न हों प्रभावित
प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ उत्तराखण्ड की 11 मांगें transfer और promotion से लेकर अस्पताल सुरक्षा, आवास तथा PG education तक फैली हुई हैं। संगठन का कहना है कि ये मुद्दे पहले भी सरकार के सामने रखे गए, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण अब सरकार को 15 दिनों का समय देते हुए आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
सरकार के लिए जरूरी होगा कि वह हर मांग की प्रशासनिक और वित्तीय स्थिति स्पष्ट करे। जिन मामलों में तत्काल फैसला संभव है, उन पर समयबद्ध आदेश जारी किया जा सकता है। वहीं policy से जुड़े विषयों पर सरकार और चिकित्सक संघ के बीच औपचारिक बैठक उपयोगी साबित हो सकती है। Transfer विसंगतियों, लंबित DPC और अस्पताल सुरक्षा जैसे मामलों को प्राथमिकता से देखने की जरूरत है। आंदोलन की स्थिति बनने से पहले संवाद के जरिए समाधान निकालना डॉक्टरों, सरकार और मरीजों—तीनों के हित में रहेगा। संगठन को भी किसी अगले कदम के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की सुविधा का ध्यान रखना चाहिए।
FAQs:Uttarakhand Doctors Protest
1. चिकित्सक संगठन ने सरकार को कितना समय दिया है?
संगठन ने मांगों पर कार्रवाई के लिए सरकार को 15 दिनों का समय दिया है।
2. डॉक्टरों की कुल कितनी प्रमुख मांगें हैं?
मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को भेजे पत्र में 11 प्रमुख मुद्दे उठाए गए हैं।
3. चिकित्सक transfers में क्या संशोधन चाहते हैं?
संघ बीमार डॉक्टरों और अलग-अलग तैनात किए गए चिकित्सक दंपतियों के transfers की समीक्षा चाहता है।
4. SDACP क्या है?
SDACP का पूरा नाम Special Dynamic Assured Career Progression है। संगठन पात्र चिकित्सकों को इसका लंबित लाभ देने की मांग कर रहा है।
5. मांगें पूरी नहीं होने पर डॉक्टर क्या करेंगे?
संगठन ने कहा है कि उचित कार्रवाई नहीं होने पर चिकित्सक आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

