Acharya Balkrishna Acquitted: फर्जी पासपोर्ट केस में CBI कोर्ट से बड़ी राहत

Acharya Balkrishna Acquitted: फर्जी पासपोर्ट केस में CBI कोर्ट से बड़ी राहत

Acharya Balkrishna Acquitted – फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र और पासपोर्ट से जुड़े करीब डेढ़ दशक पुराने मामले में आचार्य बालकृष्ण को बड़ी राहत मिली है। देहरादून की सीबीआई अदालत ने मामले में आचार्य बालकृष्ण को आरोपों से बरी कर दिया है। दरअसल, सीबीआई ने आरोप लगाया था कि आचार्य बालकृष्ण ने वर्ष 1997 में खुर्जा स्थित श्री राधा कृष्ण संस्कृत महाविद्यालय से कथित फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र हासिल किए और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाया।

इस मामले में कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य प्रोफेसर नरेश द्विवेदी को भी सह-आरोपित बनाया गया था। सीबीआई ने वर्ष 2012 में मुकदमा दर्ज किया था, जबकि 2013 से मामले की अदालत में सुनवाई चल रही थी। अब लंबे समय बाद देहरादून की सीबीआई अदालत ने आचार्य बालकृष्ण को आरोपों से बरी कर दिया है।

Acharya Balkrishna Case में Court ने क्या फैसला दिया?

देहरादून की विशेष CBI अदालत ने मामले की लंबी सुनवाई के बाद आचार्य बालकृष्ण को आरोपों से बरी कर दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार prosecution की तरफ से पेश evidence के आधार पर आरोपों को आवश्यक कानूनी स्तर तक साबित नहीं किया जा सका। इसके बाद अदालत ने दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया।

  • आचार्य बालकृष्ण को मामले में बरी किया गया।
  • फैसला देहरादून की विशेष CBI अदालत ने सुनाया।
  • मामला कथित फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र और पासपोर्ट से जुड़ा था।
  • केस करीब 15 वर्षों से कानूनी प्रक्रिया में था।
  • सह-आरोपी के रूप में प्रोफेसर नरेश द्विवेदी का नाम भी शामिल था।

CBI का क्या था आरोप और कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

CBI के मुताबिक विवाद की जड़ उन educational certificates से जुड़ी थी, जिन्हें पासपोर्ट हासिल करने की प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया गया। जांच एजेंसी का दावा था कि आचार्य बालकृष्ण ने खुर्जा स्थित श्री राधा कृष्ण संस्कृत महाविद्यालय से जुड़े कथित फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज पेश किए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर बरेली पासपोर्ट कार्यालय में भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किए जाने का आरोप था।

जांच के बाद आचार्य बालकृष्ण और महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य नरेश द्विवेदी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। CBI ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं के साथ Passport Act के प्रावधानों के तहत भी मामला आगे बढ़ाया था।

बाद में जांच एजेंसी ने 2012 में chargesheet दाखिल की। इसके बाद अदालत में मामला चला और 2013 में आरोप तय होने के साथ regular trial की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

  • विवाद पासपोर्ट आवेदन में इस्तेमाल documents को लेकर था।
  • Certificates का संबंध खुर्जा के संस्कृत महाविद्यालय से बताया गया।
  • CBI ने documents की authenticity पर सवाल उठाए।
  • 2012 में मामले में chargesheet दाखिल हुई।
  • कई वर्षों तक witnesses और evidence पर सुनवाई हुई।

CBI के आरोप vs Court का Final Outcome

करीब 15 साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद मामला आरोपों से आगे बढ़कर final judicial verdict तक पहुंचा। जांच एजेंसी ने जहां documents और passport प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे, वहीं आखिरकार अदालत में उपलब्ध evidence के आधार पर आचार्य बालकृष्ण को दोषमुक्त कर दिया गया।

मुद्दाCBI का पक्षFinal स्थिति
शैक्षणिक प्रमाण पत्रकथित तौर पर फर्जी होने का आरोपआरोप साबित नहीं हुए
Passport Applicationविवादित documents के इस्तेमाल का आरोपबालकृष्ण बरी
सह-आरोपीप्रो. नरेश द्विवेदी को आरोपी बनाया गयारिपोर्ट्स में उनके भी बरी होने की जानकारी
कानूनी प्रक्रियाजांच, chargesheet और trialकरीब 15 साल बाद फैसला
वर्तमान स्थितिProsecution ने आरोप लगाए थेCourt से बड़ी राहत

source link – https://www.haribhoomi.com/state-local/uttarakhand/news/acharya-balkrishna-acquitted-dehradun-court-fake-passport-case-cbi-verdict-2026-09-07-111845

FAQs:Acharya Balkrishna Acquitted

Q1. आचार्य बालकृष्ण को किस मामले में बरी किया गया है?
आचार्य बालकृष्ण को कथित फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने से जुड़े मामले में देहरादून की अदालत ने बरी किया है।

Q2. Acharya Balkrishna Passport Case कितना पुराना है?
यह मामला करीब 15 साल पुराना है और इसकी जांच व कानूनी प्रक्रिया 2011 से चल रही थी।

Q3. CBI ने आचार्य बालकृष्ण पर क्या आरोप लगाए थे?
CBI का आरोप था कि पासपोर्ट हासिल करने की प्रक्रिया में कथित फर्जी educational certificates का इस्तेमाल किया गया।

Q4. मामले में दूसरे आरोपी कौन थे?
खुर्जा स्थित संस्कृत महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य प्रोफेसर नरेश द्विवेदी को भी मामले में सह-आरोपी बनाया गया था।

Q5. Acharya Balkrishna को कब बरी किया गया?
देहरादून की अदालत ने 7 सितंबर 2026 को मामले में आचार्य बालकृष्ण को बरी करने का फैसला सुनाया।

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